डिप्टी सीएम के कहने पर आईपीएस को मिला यूनिवर्सिटी कैंपस में बंगला, राजभवन पहुंची शिकायत,आवंटन हुआ रद्द

Mukesh Sharma | Feb 07, 2026, 17:20 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान यूनिवर्सिटी कैंपस में आईपीएस प्रीति मलिक को बंगला आवंटन करना कुलगुरू को भारी पड़ गया। उन्हें यूनिवर्सिटी स्टाफ के भारी विरोध के बाद अपना आदेश वापस लेना पड़ गया।

News in Short

  • राजस्थान यूनिवर्सिटी कैंपस में आईपीएस को बंगला आवंटन हुआ रद्ध
  • आईपीएस प्रीति मलिक को एक साल के लिए किया था आवास आवंटन
  • यूनिवर्सिटी के कुलगुरु ने विवेकाधीन कोटे से किया था यह आवंटन
  • डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के पत्र के बाद हुआ था यह आवास आवंटन
  • यूनिवर्सिटी स्टाफ के विरोध के कारण 24 घंटे में करना पड़ा आवंटन रद्ध

News in Detail

राजस्थान यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला किसी छात्र आंदोलन या परीक्षा परिणाम का नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा सेवारत आईपीएस अधिकारी को कैंपस के भीतर आईपीएस प्रीति मलिक को 'विशेष कोटे' से आवास आवंटित करने का है। जब इस पर हल्ला हुआ तो कुलगुरु को 24 घंटे में ही अपना आदेश वापस लेना पड़ा। यह बंगला कुलगुरू ने डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के पत्र के बाद विशेष कोटे से आवंटित किया था। इसकी शिकायत राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति से की गई।





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एक साल के लिए दिया था बंगला

दरअसल मामला यूनिवर्सिटी कैंपस में आईपीएस अफसर प्रीति मलिक को बंगला आवंटित करने का है। कुलगुरु ने डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के कहने पर 5 फरवरी को इंटेलिजेंस ब्यूरो में उप-निदेशक प्रीति मलिक को यूनिवर्सिटी कैंपस में बंगला नंबर सी-9 आवंटित कर दिया। यह आवंटन एक साल के लिए किया गया था। आदेश में बताया कि कुलगुरु ने आवास आवंटन अपने विशेषाधिकार के तहत किया है।





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​ऐसे जुड़े सत्ता के गलियारों से तार?

सूत्रों के अनुसार यह आवास राजस्थान डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के कहने पर दिया गया। उन्होंने 29 जनवरी 2026 को कुलगुरू को आवास आवंटन का पत्र भेजा था। इसका मतलब है कि आईपीएस को विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थान के भीतर आवास दिलाने के लिए 'ऊपर' से सिफारिश की गई थी। डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के पास तकनीकी और उच्च शिक्षा विभाग भी है। यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का कहना था कि क्या विश्वविद्यालय के आवास, जो प्रोफेसरों और शैक्षणिक स्टाफ के लिए आरक्षित होने चाहिए, उनका उपयोग बाहरी अधिकारियों को उपकृत करने के लिए करना सही है।



टीचिंग स्टाफ ने शुरु किया विरोध

आवंटन आदेश की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी शिक्षको ने विरोध शुरु कर दिया। शिक्षकों का कहना था कि बंगला प्रोफेसर श्रेणी का आवास है। किसी भी बाहरी अधिकारी को बंगला आवंटित करना राजस्थान यूनिवर्सिटी आवास आवंटन नियम-1982 की भावना के विपरीत है। शिक्षकों ने इस आवंटन को शिक्षक समुदाय के अधिकारों पर सीधा प्रहार बताया।



घर का जोगी जोगना,आन गांव का सिद्ध

यूनिवर्सिटी के लोक प्रशासन विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ.डेजी शर्मा का कहना है कि नियमों के अनुसार विशेषाधिकार का इस्तेमाल अपवाद की स्थितियों में सीमित रुप से किया जाता है। कई प्रोफेसर बरसों से प्रोफेसर श्रेणी का आवास आवंटित होने का इंतजार कर रहे है। यह उनका कानूनी अधिकार भी है। ऐसी स्थिति में यूनिवर्सिटी से बाहर के अधिकारी को बंगला आवंटित करना ना केवल यूनिवर्सिटी शिक्षकों की भावनाओं को आहत करने वाला है, बल्कि इससे कैंपस का शैक्षणिक वातावरण भी खराब होगा। शिक्षकों ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर इस आवंटन को तत्काल रद्ध करने की मांग की थी।



पहले ही एक प्रोपर्टी पुलिस कब्जे में

यूनिव​र्सिटी शिक्षकों का कहना है कि कई साल पहले यूनिवर्सिटी ने अपना एक भवन राजस्थान पुलिस को दिया था। उस समय कहा गया था कि यह सिर्फ कुछ समस के लिए ही दिया जा रहा है, लेकिन आज तक यह जगह यूनिवर्सिटी को वापस नहीं मिली है। ऐसे में एक प्रोफेसर श्रेणी का बंगला और दे दिया जाता तो इसे वापिस ​लेना बहुत मुश्किल होता।



और रद्ध हो गया आवंटन

यूनिवर्सिटी शिक्षकों के भारी विरोध और मामला राज्यपाल तक पहुंचने के कारण यह आवंटन रद्ध कर दिया गया। इस संबंध में 6 फरवरी को ही यूनिवर्सिटी के कुलसचिव ने आदेश भी जारी कर दिए हैं। इसकी सूचना आईपीएस प्रीति मलिक को भी दी गई है।



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