रिटायरमेंट के बाद आईपीएस किशन सहाय की भावुक अपील, जयपुर में किराए पर चाहिए मकान
ऐसे समझें पूरा मामला
- आईपीएस किशन सहाय की सोशल मीडिया पर एक पोस्ट चर्चा का विषय बनी।
- रिटायरमेंट के बाद उन्हें जयपुर में 3 बीएचके मकान की जरूरत है।
- आईपीएस किशन 31 जुलाई को भारतीय पुलिस सेवा की नौकरी से रिटायर हो गए।
- सोशल मीडिया पर यह चर्चा हो रही है कि क्या उनके पास खुद का मकान नहीं है।
Jaipur: राजस्थान कैडर के सीनियर आईपीएस किशन सहाय मीणा 31 जुलाई को रिटायर हो गए। इतने बरसों तक पुलिस में उच्च पदों पर रहने के बाद भी उनके पास जयपुर में अपना खुद का कोई मकान नहीं है।
अब रिटायरमेंट के बाद सरकारी आवास खाली करने की नौबत आई तो उन्होंने खुद के लिए आशियाने की तलाश शुरू कर दी है। इसके लिए किशन सहाय ने सोशल मीडिया पर एक अनोखी अपील पोस्ट की है। यह पोस्ट चर्चा का विषय बनी हुई है।
क्या है पूर्व IPS की अपील?
फेसबुक पर अपनी अपील में पूर्व आईपीएस किशन सहाय ने लिखा है कि उन्हें जयपुर के पॉश इलाके जगतपुरा में किराए पर एक मकान की जरूरत है।
उन्होंने लिखा कि मकान में कम से कम तीन कमरे होने चाहिए। इसमें से एक कमरा विशेष रूप से उनसे मिलने आने वाले लोगों के लिए हो। इसके साथ अटैच लेट-बाथ की सुविधा हो।
अपील में यह भी कहा कि मुलाकात करने आने वाले लोगों के लिए मकान में 2 से 3 गाड़ियों की पार्किंग जगह होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा है कि यदि शर्तों में थोड़ी-बहुत कमी भी होगी तो भी काम चल जाएगा।
क्या इतनी लंबी सेवा के बाद भी अपना घर नहीं
आईपीएस किशन सहाय की किराए के मकान की यह अपील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। उनके समर्थकों का कहना है कि इतने लंबे सेवाकाल और आईजी जैसे शीर्ष पद पर रहने के बावजूद वे अपने लिए एक घर तक नहीं बना सके।
अब तक वे सरकार द्वारा आवंटित आधिकारिक आवास में रह रहे थे। इसे नियम के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद खाली करना होगा।
विवादों से रहा है पुराना नाता
किशन सहाय का नाता विवादों से रहा है। अप्रैल महीने में उनके खिलाफ रेप का एक गंभीर मामला दर्ज हुआ था। यह केस 29 अप्रैल को जयपुर शहर के मालवीय नगर थाने में दर्ज हुआ।
एक महिला ने डाक के जरिए पुलिस को पत्र भेजा था। इसमें आरोप लगाया गया कि आईपीएस किशन सहाय ने शादी का झांसा देकर उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए। फिलहाल जयपुर पुलिस इस मामले की जांच कर रही हैं।
दुष्कर्म का केस दर्ज होने के बाद किशन सहाय ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया था। उन्होंने कहा था कि वे पिछले 10 साल से विज्ञानवाद का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। अंधविश्वास के खिलाफ बेबाकी से बोलते रहे हैं।
उनका दावा था कि अंधविश्वास में डूबे लोग उनके विज्ञानवाद को हजम नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए षड्यंत्र के तहत उन्हें बदनाम करने के लिए यह झूठी एफआईआर दर्ज कराई गई है।
चुनाव ड्यूटी से निलंबन
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान भी वे विवादों में आए थे। चुनाव आयोग ने उनकी ड्यूटी झारखंड में लगाई थी।
वे वहां गए तो सही, लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के अचानक जयपुर लौट आए। इसे चुनाव आयोग ने घोर लापरवाही माना। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था।
ऐसा रहा राजस्थान पुलिस में सफर
किशन सहाय मूल रूप से राजस्थान में अलवर जिले के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआत राजस्थान पुलिस सेवा (आरपीएस) अधिकारी के रूप में हुई थी। वर्ष 2013 में उन्हें पदोन्नति मिली। वे भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में शामिल हुए।
आईपीएस बनने के बाद वे टोंक जिले के एसपी रहे। इसके अलावा उन्होंने जीआरपी और क्राइम ब्रांच में भी एसपी के पद पर अपनी सेवाएं दीं।
सेवानिवृत्ति के समय वे पुलिस मुख्यालय में आईजी (मानवाधिकार प्रकोष्ठ) के पद पर तैनात थे, जहां से 31 जुलाई को वे आधिकारिक रूप से रिटायर हो गए।
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