लूडो लेकर सेल में गया, तौलिए से गला घोंटा, जगन हत्या की मिनट-टू-मिनट कहानी

Jageshwar prasad | Jul 04, 2026, 16:16 IST
लूडो के बहाने सेल में बुलाया, तौलिए से गला घोंटा, जगन हत्या की मिनट-टू-मिनट कहानी
राजस्थान की अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर को 15 मिनट में मारा गया। विष्णु जाट ने वर्चस्व के लिए रची साजिश। मिनट-टू-मिनट सामने आई पूरी कहानी।

समझें क्या है पूरा मामला

  • अजमेर जेल में जगन गुर्जर की हत्या वर्चस्व की लड़ाई थी।
  • विष्णु ने बड़ा अपराधी साबित होने के लिए की थी हत्या।
  • जगन ने विष्णु के परिवार और अपराधों को लेकर कसे थे ताने।
  • जगन ने लूडो के लिए सेल में बुलाया, विष्णु ने तौलिए से गला घोंटा।
  • पहले भाई के साथ था, फिर अलग किया, 2 दिन बाद हत्या।

29 जून को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की हत्या महज आवेश में नहीं हुई थी। यह जेल के भीतर वर्चस्व की जंग और लगातार मिल रहे तानों का नतीजा था।



आरोपी विष्णु जाट अपनी गैंग में खुद को बड़ा साबित करना चाहता था। जगन उसके अपराधों और परिवार पर तंज कसता था। पुलिस पड़ताल में वारदात की मिनट-टू-मिनट पूरी कहानी अब सामने आ गई है।



तानों से बना हत्यारा

मार्च 2026 में जगन को अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट किया गया। 100 से अधिक मुकदमों वाले जगन का जेल में अलग दबदबा था। बंदी उसे जग्गू दादा कहकर बुलाते थे।



विष्णु की गैंग के साथी अक्सर उसका मजाक उड़ाते कि उसके खिलाफ केवल छोटे-मोटे चोरी के मामले हैं। जगन भी विष्णु के अपराधों और परिवार को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां करता था।



इन तानों से परेशान होकर विष्णु ने तय कर लिया कि जगन जैसे बड़े अपराधी की हत्या से जेल में उसका भी वर्चस्व बन जाएगा। पूछताछ में उसने कहा कि उसने जगन की हत्या कर उसका उद्धार किया है।



15 मिनट में हुई हत्या की कहानी

सुबह 11:00 बजे: ब्लॉक लॉक होने के बाद जगन ने विष्णु को लूडो खेलने के लिए अपनी सेल में बुलाया। विष्णु लूडो लेकर जगन की सेल में गया। दोनों अंदर बंद हो गए।



11:18 बजे: सफाई कर्मचारी पहुंचा। दोनों सामान्य बातचीत करते दिखे।



12:00 बजे: जेल के दो कंपाउंडर आए और जगन को दर्द निवारक इंजेक्शन लगाकर चले गए।



12:26 बजे: जेल प्रहरी ने नियमित राउंड लिया। सेल में सब सामान्य दिखा।



दोपहर 1:00 से 1:15 बजे: इन्हीं 15 मिनट में विष्णु ने मौका पाकर तौलिए से जगन का गला घोंट दिया।



1:18 बजे: विष्णु ने प्रहरी को आवाज दी। झाड़ू लगाने का बहाना बनाकर पंखा बंद करवाया। प्रहरी ने चारपाई पर लेटे जगन को सोता समझा।



1:20 बजे के बाद: विष्णु ने शव को पंखे से लटकाकर आत्महत्या दिखाने की कोशिश की। सेल की छत ऊंची होने से शव नहीं लटका सका। थककर वह खुद जगन के शव के पास सो गया।



27 जून को एक सेल में आए, 29 को हत्या

जगन का भाई पप्पू गुर्जर पहले से उसी जेल में था। 29 मार्च 2026 को जगन के आने के बाद दोनों भाइयों को एक वार्ड में रखा गया। 16 मई को दोनों के बीच विवाद के बाद जगन को अलग ब्लॉक भेजा गया।



27 जून को विष्णु को जगन की सेल में शिफ्ट किया गया। ठीक 2 दिन बाद हत्या हो गई।



सेल का कैमरा खराब, फिर भी लेंस पर लगाया टूथपेस्ट

जांच में सामने आया कि हत्या वाली सेल का कैमरा कई दिनों से खराब था। विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। वारदात वाले दिन सुबह करीब 10 बजे उसने सबूत मिटाने के इरादे से कैमरे के लेंस पर टूथपेस्ट लगा दिया।



ब्लॉक के बाकी कैमरों में विष्णु का जगन की सेल में जाना, प्रहरी की गश्त और कंपाउंडरों की आवाजाही सब रिकॉर्ड हो गई।



जेल में टेक्निकल स्टाफ नहीं, 20 कैमरे बार-बार खराब

जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने बताया कि जेल में सीसीटीवी (Closed Circuit Television) की देखरेख के लिए कोई तकनीकी स्टाफ नहीं है। करीब 20 कैमरे समय-समय पर खराब हो जाते हैं।



ठीक करवाने के लिए डीओआईटी (Department of Information Technology) को 7 से 8 बार मेल भेजी गई लेकिन समस्या दूर नहीं हुई।



कौन था जगन गुर्जर?

जगन गुर्जर धौलपुर के डांग के भवुतीपुरा गांव का रहने वाला था। 1994 में उसने जीजा के हत्यारों की हत्या की थी। इसके बाद उसने पत्नी और भाइयों के साथ मिलकर डकैत गैंग बनाई।



चंबल में आतंक का पर्याय बने जगन पर राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के विभिन्न थानों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, फिरौती, अपहरण, नकबजनी और डकैती से जुड़े 100 से अधिक मामले दर्ज थे।



कौन है हत्यारा विष्णु?

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार विष्णु जाट कुलदीप जघीना हत्याकांड का मुख्य शूटर था। तीन साल पहले 12 जुलाई को जयपुर-भरतपुर के अमोली टोल पर हुए उस हत्याकांड में पहली गोली विष्णु ने ही चलाई थी।



उस हत्याकांड में नाम आने से पहले विष्णु मामूली बाइक चोरी की वारदातों में शामिल था। डीजी जेल अशोक राठौड़ के अनुसार विष्णु पिछले 3 साल से अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था।



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