जयपुर में एयर इंडिया की फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग, क्या है Squawk 7500 कोड और कैसे भेजा जाता है अलर्ट?

Saurabh Mishra | Oct 14, 2026, 15:45 IST
जयपुर एयरपोर्ट इमरजेंसी लैंडिंग
जयपुर एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2030 की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। यह विमान जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से दिल्ली जा रहा था। उड़ान के दौरान Squawk 7500 कोड से जुड़ा अलर्ट मिलने पर विमान के हाईजैक होने की आशंका जताई गई। आखिर क्या है यह कोड और इसका इस्तेमाल कब किया जाता है?

जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार सुबह एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग से हड़कंप मच गया। फ्लाइट AI-2030 जर्मनी के फ्रैंकफर्ट से दिल्ली जा रही थी। इसी दौरान विमान से हाईजैक का संकेत देने वाला Squawk 7500 कोड एटीसी को मिला। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। विमान को दिल्ली के बजाय जयपुर भेजा गया और उसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। अब सवाल उठ रहा है कि आखिर यह कोड किसने और क्यों एक्टिव किया? क्या विमान में सचमुच कोई खतरा था या गलती से अलर्ट चला गया? आइए समझते हैं कि Squawk 7500 क्या है और ऐसा अलर्ट मिलने पर क्या होता है?



क्या होता है Squawk कोड?

आसमान में उड़ रहे विमानों की पहचान के लिए एक खास कोड इस्तेमाल होता है। इसे Squawk कोड कहते हैं। विमान में ट्रांसपोंडर नाम का डिवाइस लगा होता है। पायलट इसमें चार अंकों का कोड सेट करता है। इस कोड में 0 से 7 तक के अंक होते हैं। इनसे कुल 4096 अलग-अलग कोड बनाए जा सकते। एयर ट्रैफिक कंट्रोल यानी ATC इनकी मदद से विमानों की पहचान करता है। साथ ही उनकी उड़ान पर नजर भी रखता है।



Squawk 7500 का मतलब क्या है?

Squawk 7500 का मतलब विमान में गैरकानूनी दखल (फोर्सफुल एंट्री) या हाईजैक की आशंका है। पायलट यह कोड सेट करके एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) को बता सकता है कि विमान की सुरक्षा खतरे में हो सकती। इसकी खास बात यह है कि पायलट को रेडियो पर खुलकर खतरे की जानकारी देने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, सिर्फ 7500 कोड दिखने से यह साबित नहीं होता कि विमान हाईजैक हो गया। कोड गलती से भी सेट हो सकता है और जयपुर में जिस एयर इंडिया की इंटरनेशनल फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग हुई है, उसमें इसी तरह की गलती की आशंका जताई जा रही। हालांकि, ये जांच के बाद ही साफ होगा।



अलर्ट मैसेज एयर ट्रैफिक कंट्रोल तक कैसे पहुंचता है?

विमान का ट्रांसपोंडर रेडियो सिग्नल के जरिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (Air Traffic Control) तक जानकारी पहुंचाता है। आमतौर पर पायलट इसमें मिला हुआ चार अंकों का कोड सेट करता है। अगर विमान में हाईजैक जैसी स्थिति बनती है, तो पायलट 7500 कोड चुन सकता। इसके बाद एटीसी के सिस्टम पर खतरे का संकेत दिखाई देता है। यह मोबाइल मैसेज या फोन कॉल की तरह नहीं होता।



अगर पायलट गलती से 7500 कोड सेट कर दे, तो वह इसे ठीक कर सकता और एटीसी को इसकी जानकारी दे सकता है लेकिन अलर्ट मिलने के बाद शुरू हुई जांच तुरंत बंद हो जाए, यह जरूरी नहीं है।



7500, 7600 और 7700 कोड में क्या अंतर है?

कोड इसका मतलब



कोड 7500-हाईजैक या विमान में गैरकानूनी दखल की आशंका



कोड 7600-विमान और एटीसी के बीच रेडियो संपर्क में खराबी



कोड 7700-विमान में दूसरी गंभीर इमरजेंसी की बात



ये तीनों कोड अलग-अलग खतरे बताते। इससे ATC को स्थिति समझने और जरूरी कदम उठाने में मदद मिलती है।



विमान में खतरे का अलर्ट मिलने पर क्या होता है?

विमान में खतरे की जानकारी मिलने पर पायलट फौरन एटीसी को सूचना देता है। इसके बाद ATC विमान की स्थिति पर नजर रखता। जरूरत के हिसाब से आसपास के हवाई यातायात को नियंत्रित किया जाता है, ताकि विमान को सुरक्षित रास्ता मिल सके।



अगर खतरे की सूचना एयरपोर्ट के ग्राउंड स्टाफ को मिलती है, तो आगे की कार्रवाई विमान की स्थिति देखकर होती। विमान हवा में हो तो ATC के जरिए क्रू को जानकारी दी जाती। विमान जमीन पर हो तो जरूरत के मुताबिक यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर उसकी जांच की जा सकती। खतरा गंभीर होने पर सुरक्षा एजेंसियों और इमरजेंसी टीमों को तैयार रखा जाता है। कुछ खास स्थितियों में लड़ाकू विमानों की मदद भी ली जा सकती है।



जयपुर के मामले में फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने प्लेन की डी-बोर्डिंग की और फिर उसकी पूरी जांच करने के बाद ही दोबारा उड़ान के लिए मंजूरी दी।



क्या 7500 कोड बम होने का संकेत है?

नहीं। 7500 कोड खास तौर पर हाईजैक या गैरकानूनी दखल से जुड़ा है। यह बम की धमकी का अलग से तय कोड नहीं है। बम की धमकी मिलने पर भी विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई जा सकती है। लेकिन दोनों स्थितियों में फर्क है। इसलिए किसी विमान से 7500 कोड आने का मतलब सीधे बम होना नहीं माना जा सकता।



जयपुर में उतरी एयर इंडिया की फ्लाइट में अब क्या जांच होगी?

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट AI-2030 में सुरक्षा संबंधी अलर्ट के बाद विमान को जयपुर डायवर्ट किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों की जांच के बाद एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरों को भी बुलाए जाने की जानकारी है। अब DGCA की जांच में यह पता लगाया जाएगा है कि 7500 कोड किस वजह से एक्टिव हुआ। क्या पायलट ने जानबूझकर खतरे का संकेत दिया था या कोड गलती से सेट हो गया था?



विमान के सिस्टम और उड़ान से जुड़े रिकॉर्ड से इन सवालों के जवाब मिल सकते हैं। फिलहाल किसी संभावित हाईजैक, बम की धमकी या पायलट की गलती को जांच पूरी होने से पहले पक्का नहीं माना जा सकता।



क्या पहले भी किसी फ्लाइट में हाईजैक का खतरा सामने आया है?

बीते महीने 30 सितंबर को दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 से भी हाईजैक का संकेत देने वाला Squawk 7500 कोड भेजा गया था। आरोप है कि विमान के एक पायलट ने उसे हाईजैक कर क्रैश करने की कोशिश की थी। इस दौरान उसने भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर भी हमला किया था। हालांकि, विमान में मौजूद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने हमलावर को काबू कर लिया था। इसके बाद विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया। इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) भी कर रही है।



FAQs

  1. क्या Squawk 7500 कोड का मतलब है?
    Squawk 7500 कोड का मतलब है कि विमान में गैरकानूनी दखल या हाईजैक की आशंका है। पायलट इस कोड को सेट करके एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचित कर सकता है कि विमान की सुरक्षा खतरे में है।
  2. इमरजेंसी लैंडिंग के बाद क्या जांच होती है?
    इमरजेंसी लैंडिंग के बाद सुरक्षा एजेंसियां विमान की पूरी जांच करती हैं। जांच के दौरान यह देखा जाता है कि Squawk 7500 कोड किस वजह से सक्रिय हुआ, क्या पायलट ने जानबूझकर खतरे का संकेत दिया या गलती से कोड सेट हुआ।
  3. 7500, 7600 और 7700 कोड के बीच क्या अंतर है?
    7500 कोड हाईजैक या गैरकानूनी दखल का संकेत देता है, 7600 कोड विमान और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच रेडियो संपर्क में खराबी का संकेत होता है, और 7700 कोड विमान में दूसरी गंभीर इमरजेंसी को दर्शाता है।
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