जयपुर व्यापार मंडल गेट लगाएंगे तो निगम से लेनी होगी मंजूरी, दिवाली पर फ्री नहीं होगा विज्ञापन
जयपुर में दिवाली से पहले बाजारों की रौनक बढ़ने लगती है। व्यापारी और व्यापार मंडल बाजारों में सजावटी स्वागत गेट लगाते हैं। इन गेटों पर बाजार का नाम और दिवाली की शुभकामनाएं लिखी जाती हैं। कई बाजारों में इन गेटों पर दुकान, संस्था या कंपनी का विज्ञापन भी लगाया जाता है। अब नगर निगम ने ऐसे विज्ञापनों को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। गेट भले ही सजावट के लिए लगाया गया हो, लेकिन विज्ञापन होने पर शुल्क देना होगा।
नगर निगम ने दिवाली के दौरान लगाए जाने वाले सजावटी और विज्ञापन गेटों को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के मुताबिक गेट पर विज्ञापन लगाने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। अगर शुल्क जमा नहीं कराया गया तो विज्ञापन को अवैध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में नगर निगम गेट हटाने की कार्रवाई भी कर सकता है।
बाजार में गेट लगाने से पहले जोन उपायुक्त की मंजूरी लेना जरूरी होगा
सिर्फ विज्ञापन का शुल्क देना ही काफी नहीं होगा। सजावटी या विज्ञापन गेट लगाने से पहले संबंधित जोन उपायुक्त से मंजूरी लेनी होगी। नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश कसेरा की स्वीकृति के बाद इस संबंध में आदेश जारी हुआ है। उपायुक्त राजस्व प्रथम नवीन भारद्वाज ने आदेश जारी किया है। सभी जोन उपायुक्तों को अपने-अपने क्षेत्र में नियमों की पालना कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मतलब अब बाजारों में अपनी मर्जी से गेट नहीं लगाए जा सकेंगे। पहले निगम से अनुमति लेनी होगी और फिर तय नियमों के अनुसार गेट लगाया जा सकेगा।
गेट पर विज्ञापन है तो सजावट के नाम पर शुल्क से छूट नहीं मिलेगी
नगर निगम ने साफ किया है कि सजावटी गेट होने से विज्ञापन फ्री नहीं हो जाएगा। अगर गेट पर किसी संस्था, दुकान या एजेंसी का प्रचार है, तो शुल्क देना होगा। निगम के मुताबिक अब तक ऐसे गेटों पर विज्ञापन लगाए जाते थे। लेकिन इन विज्ञापनों से निगम को शुल्क नहीं मिलने की स्थिति रहती थी। इसका असर निगम के राजस्व पर पड़ता है। इसके अलावा शहर में निगम की स्वीकृत विज्ञापन साइटों पर भी इसका असर पड़ता है। इसी वजह से अब गेटों पर लगाए जाने वाले विज्ञापनों को शुल्क के दायरे में लाया गया है।
बिना शुल्क लगाया विज्ञापन अवैध होगा, गेट भी हट सकता है
अगर कोई व्यापारी या संस्था बिना निर्धारित शुल्क दिए विज्ञापन लगाती है, तो उसे अवैध माना जाएगा। निगम ऐसे मामलों में कार्रवाई कर सकता है। नियमों के खिलाफ लगाए गए गेट को हटाने की कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए व्यापार मंडलों और दुकानदारों को दिवाली सजावट से पहले नियमों का ध्यान रखना होगा।
स्वीकृत होर्डिंग ढकने वाला दिवाली गेट भी निगम की कार्रवाई में आएगा
नगर निगम ने सिर्फ विज्ञापन शुल्क को लेकर ही नियम नहीं बनाए हैं। गेट लगाने की जगह को लेकर भी साफ निर्देश दिए गए हैं। कोई भी सजावटी गेट इस तरह नहीं लगाया जा सकेगा कि निगम की पहले से स्वीकृत विज्ञापन साइट छिप जाए। अगर गेट से अधिकृत होर्डिंग या विज्ञापन साइट ढकती है, तो निगम कार्रवाई कर सकता है। नियमों के खिलाफ लगाए गए ऐसे गेट को हटाया भी जा सकता है। इसलिए बाजारों को गेट लगाने से पहले आसपास की जगह और विज्ञापन साइट का ध्यान रखना होगा।
2004 और 2008 की विज्ञापन उपविधियों के तहत गेट लगाए जाएंगे
नगर निगम के अनुसार सभी सजावटी और विज्ञापन द्वार नियमों के तहत ही लगाए जा सकेंगे। इसके लिए नगर निगम जयपुर विज्ञापन उपविधियां 2004 लागू होंगी। इसके साथ संशोधित विज्ञापन उपविधियां 2008 के प्रावधान भी लागू होंगे। यानी बाजारों को गेट लगाने से पहले इन नियमों का पालन करना होगा।
व्यापार मंडलों को दिवाली गेट के लिए अनुमति, शुल्क और जगह तीनों देखनी होंगी
दिवाली पर स्वागत गेट लगाने वाले व्यापार मंडलों और दुकानदारों के लिए अब प्रक्रिया साफ है। सबसे पहले संबंधित जोन उपायुक्त से मंजूरी लेनी होगी। अगर गेट पर विज्ञापन लगाया जा रहा है तो निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। इसके अलावा यह भी देखना होगा कि गेट से निगम की स्वीकृत विज्ञापन साइट न ढके।
इन नियमों में से किसी का उल्लंघन होने पर नगर निगम कार्रवाई कर सकता है। जरूरत पड़ने पर नियमों के खिलाफ लगाए गए गेट को हटाया भी जा सकता है। सभी जोन उपायुक्तों को अपने क्षेत्र में इन नियमों की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में दिवाली से पहले बाजारों में लगने वाले स्वागत गेट अब निगम की निगरानी में रहेंगे।