मालपुरा दंगा मामला, 26 साल बाद 10 आरोपी बरी, 5 हत्याओं के मामले में कोर्ट का फैसला
News In Short
- सबूतों की कमी के चलते 10 नामजद आरोपी बरी
- फरार चल रहे 7 अन्य आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर स्थाई वारंट जारी
- परिवादी मंजू देवी ने 5 व्यक्तियों की नृशंस हत्या के संबंध में मामला दर्ज करवाया था
- 26 साल लंबे चले ट्रायल में कमजोर पुलिस जांच और गवाहों के विरोधाभासी बयान बरी होने का मुख्य आधार बने
News In Detail
सांप्रदायिक दंगे मामलों की विशेष कोर्ट जयपुर ने 26 साल पुराने मालपुरा दंगो के 10 आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने आरोपी फहीम अहमद,नवाब,रकीब,रऊफ,मुनीर, अब्दुल वाहिद,ईशाक,रज्जाक,साजिद और इम्तियाज को संदेह का लाभ देकर बरी किया है। कोर्ट ने इस मामले में फरार चल रहे सात अन्य आरोपियों को भगौड़ा घोषित करके उनके स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। मामले में परिवादी मंजू देवी ने मालपुरा थाने में पांच व्यक्तियों की हत्या का केस दर्ज करवाया था।
सांप्रदायिक दंगों से जुड़ा मामला
टोंक जिले के मालपुरा कस्बे में सांप्रदायिक दंगों से जुड़े मामलों में कोर्ट ने 2024-2026 के बीच कई फैसले दिए हैं। जिनमें से अधिकतर मामलों में 25 साल बाद सबूतों के अभाव में आरोपियों को बरी किया गया है।
ये मामले मुख्य रूप से वर्ष 2000 में हुए दंगों से संबंधित हैं। जिनमें से कुछ की जड़ें 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों तक जाती हैं। अधिकांश मामलों में आरोपी सबूतों की कमी,गवाहों के बयानों में विरोधाभास और पुलिस की कमजोर जांच के कारण आरोपी बरी हुए हैं। दंगों के कारण मालपुरा को अति संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया था और लंबे समय तक वहां पुलिस बल तैनात रहा।
पहले भी बरी हुए हैं आरोपी
फरवरी 2026 में अदालत ने जुलाई 2000 के मालपुरा दंगा मामले में 25 साल बाद 14 आरोपियों को बरी कर दिया था।
अगस्त 2025 में अदालत ने जुलाई 2000 में मोहम्मद सलीम और मोहम्मद अली की हत्या के मामले में 13 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया था।
इससे पहले दिसंबर 2024 में जुलाई 2000 के दंगे के दौरान किसान हरिराम की हत्या के मामले में विशेष अदालत ने 8 लोगों को उम्रकैद की सजा से दंडित किया था।
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