जयपुर डिस्कॉम का डिजिटल ट्विन तैयार, AI बताएगा बिजली चोरी और फॉल्ट का पता
1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर का डिजिटल नेटवर्क तैयार
जयपुर डिस्कॉम ने दो एजेंसियों के सहयोग से यह तकनीक शुरू की है। इसके तहत करीब 1.6 लाख ट्रांसफॉर्मर का डिजिटल नेटवर्क तैयार किया गया है। नेटवर्क के पोल, मीटर और ट्रांसफॉर्मर की जियो-टैगिंग की गई है। हर उपकरण को यूनिक आईडी के जरिए जीपीएस से जोड़ा गया है। इससे बिजली नेटवर्क की वास्तविक स्थिति को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकेगा।
AI पहले ही देगा खराब ट्रांसफॉर्मर का अलर्ट
डिजिटल ट्विन तकनीक में एआई की मदद से बिजली नेटवर्क की निगरानी की जाएगी।
- लाइव मॉनिटरिंग: कंट्रोल रूम में इंजीनियर देख सकेंगे कि किस फीडर पर कितना लोड है और कहां वोल्टेज कम हो रहा है।
- प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस: ट्रांसफॉर्मर के गर्म होने या खराब होने की आशंका पहले ही पता चल सकेगी।
- फॉल्ट की पहचान: बिजली लाइन में खराबी आने पर उसकी सटीक लोकेशन पता लगाने में मदद मिलेगी।
- सोलर मॉनिटरिंग: सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली की रियल टाइम निगरानी की जा सकेगी।
बिजली चोरी और कटौती पर लगेगी लगाम
इस तकनीक से बिजली वितरण व्यवस्था में कई सुधार होने की उम्मीद है। फॉल्ट आने पर कर्मचारियों को खराबी ढूंढने में कम समय लगेगा। टीम सीधे संबंधित स्थान पर पहुंचकर सुधार कर सकेगी। बिजली चोरी और एटीएंडसी लॉस कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को बेहतर वोल्टेज के साथ बिजली आपूर्ति मिलने की संभावना है।
यह खबर क्यों जरूरी है
डिजिटल ट्विन तकनीक से बिजली नेटवर्क की निगरानी पहले से ज्यादा आसान और तेज हो सकती है। इससे बिजली कटौती का समय घटाने, ट्रांसफॉर्मर की खराबी रोकने और बिजली चोरी पर नियंत्रण करने में मदद मिलेगी। आम उपभोक्ताओं को इसका फायदा बेहतर बिजली आपूर्ति के रूप में मिल सकता है।
आगे क्या?
अब इस तकनीक के जरिए बिजली नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव को बेहतर बनाने पर काम होगा। इसके प्रभाव से बिजली कटौती, लाइन लॉस और ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं में कितनी कमी आती है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।