476 करोड़ का अनुबंध, फिर भी नहीं सुधरी जयपुर डिस्कॉम की हालत
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में 6 महीनों में 2 लाख से अधिक बिजली फॉल्ट शिकायतें दर्ज हुईं।
- फॉल्ट सुधार का 476 करोड़ का ठेका होने के बावजूद समय पर बिजली बहाल नहीं हो रही।
- शिकायतों के बाद भी कई मामलों में सिस्टम में समाधान दिखाकर फाइलें बंद की जा रही हैं।
- 90 मिनट में शहर, 2 घंटे में शहरी क्षेत्र और 4 घंटे में ग्रामीण सुधार का नियम लागू है।
- वैशाली नगर, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर समेत कई इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में पिछले छह महीनों में 2 लाख से अधिक बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज हुई हैं। फॉल्ट सुधारने की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी को दिया गया था। कंपनी यह ठेका 476 करोड़ में मिला है जो चार साल के लिए होगा। इसके बावजूद तय समय में बिजली बहाल नहीं हो रही। कागजों में शिकायतें बंद दिखती हैं, लेकिन जमीन पर लोग घंटों अंधेरे में बैठे रहते हैं।
6 महीने में 2 लाख शिकायतें
गर्मियों में जयपुर के घरों में बिजली जाना आम बात हो गई है। लेकिन इसका असली पैमाना देखें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले छह महीनों में अकेले जयपुर शहर में 50 हजार से अधिक बिजली फॉल्ट की शिकायतें दर्ज हुईं। पूरे जयपुर डिस्कॉम क्षेत्र में यह संख्या 2 लाख के पार पहुंच गई है। इनमें नो करंट, ट्रिपिंग, फ्यूज उड़ना और अन्य फॉल्ट शामिल हैं।
476 करोड़ का ठेका, पर नतीजा क्या
जयपुर डिस्कॉम ने फॉल्ट रिपेयर का काम संध्या एंड कंपनी जेवी को सौंपा है। इस कंपनी को एफआरटी यानी फॉल्ट रिपेयर टीम के संचालन के लिए 476.39 करोड़ रुपए का चार साल का अनुबंध दिया गया है। जरूरत पड़ने पर इसे दो साल और बढ़ाया जा सकता है।
लेकिन इतने बड़े अनुबंध के बावजूद दो महीनों में कंपनी पर केवल 13.65 लाख रुपए की पेनल्टी लगाई गई है। यह आंकड़ा शिकायतों की तादाद के मुकाबले बेहद कम है।
कितनी टीमें, कितना काम
टेंडर की शर्तों के मुताबिक जयपुर शहर में 90 मिनट के अंदर बिजली बहाल करना अनिवार्य है। अन्य शहरी क्षेत्रों में यह समय सीमा 2 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे है।
जयपुर शहर में एलटी यानी लो टेंशन के 37 और एचटी यानी हाई टेंशन के 8 सब-डिवीजन हैं। इनके लिए केवल 58 एफआरटी टीमें और 58 वाहन तैनात हैं। यानी टीमों की संख्या शिकायतों के अनुपात में बहुत कम है।
कागजों में बंद, जमीन पर खुली शिकायतें
एफआरटी की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। कंपनी और आईटी विंग के बीच तालमेल की कमी के चलते असली निगरानी नहीं हो पा रही। कई शिकायतें मौके पर समाधान किए बिना ही सिस्टम में बंद दिखा दी जाती हैं। ऐसी शिकायतों की जांच नहीं होती। इससे असल समस्या छुपी रहती है और लोगों को राहत नहीं मिलती।
एचटी लाइन का काम भी अधूरा
टेंडर के अनुसार एचटी लाइन की शिकायतों का समाधान भी एफआरटी को करना है। लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। यह काम अभी भी डिस्कॉम के अपने तकनीशियन कर रहे हैं। वजह यह है कि एफआरटी के पास पर्याप्त प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं हैं। इसके बावजूद अनुबंध के तहत भुगतान जारी है।
इन इलाकों में सबसे अधिक परेशानी
वैशाली नगर, झोटवाड़ा, विद्याधर नगर, पुराना घाट, जगतपुरा, भांकरोटा, बिंदायका और सांगानेर ग्रामीण क्षेत्र में गर्मियों के दौरान फॉल्ट और ट्रिपिंग की शिकायतें सबसे अधिक आ रही हैं। यहां के लोगों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी घंटों इंतजार करना पड़ता है।
बढ़ती आबादी और बिजली की बढ़ती मांग के बीच एफआरटी संसाधनों की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग अब तेज होती जा रही है।
FAQ
- जयपुर डिस्कॉम में बिजली फॉल्ट की शिकायत कितने समय में दूर होनी चाहिए?
टेंडर शर्तों के अनुसार जयपुर शहर में 90 मिनट, अन्य शहरी क्षेत्रों में 2 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 4 घंटे में बिजली बहाल करना अनिवार्य है। यह जिम्मेदारी निजी कंपनी की एफआरटी टीमों पर है। हालांकि शिकायतें बताती हैं कि यह समय सीमा अक्सर नहीं मानी जाती। - FRT क्या होती है और इसे किसने चलाने का ठेका लिया है?
एफआरटी यानी फॉल्ट रिपेयर टीम बिजली फॉल्ट को मौके पर जाकर ठीक करने वाली टीम होती है। जयपुर डिस्कॉम ने यह काम संध्या एंड कंपनी जेवी को सौंपा है। इस कंपनी को 476.39 करोड़ रुपए का चार साल का अनुबंध दिया गया है। - जयपुर में बिजली फॉल्ट की शिकायत कैसे करें?
जयपुर डिस्कॉम की हेल्पलाइन पर कॉल करके या मोबाइल ऐप के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने पर एक नंबर मिलता है जिससे स्थिति ट्रैक होती है। हालांकि मौजूदा व्यवस्था में कई शिकायतें बिना समाधान के ही सिस्टम में बंद दिखा दी जाती हैं।
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