10 लाख की ‘सोने की मूर्ति’ निकली अष्टधातु, ग्राहक बनकर पहुंची CID ने पकड़ा आरोपी

Raghvendra Singh Rathore | Sept 10, 2026, 11:09 IST
जयपुर में सोने की मूर्ति बेचने आया ठग गिरफ्तार
जयपुर में ‘ऑपरेशन भगवान विष्णु’ 10 लाख से शुरू हुई डील 3.10 लाख में तय, अष्टधातु का 21 इंच लंबा विग्रह बरामद, मूर्ति की प्राचीनता की जांच करेगा पुरातत्व विभाग

समझें क्या है पूरा मामला

राजस्थान पुलिस की CID-CB ने जयपुर में प्राचीन मूर्ति के नाम पर ठगी की कोशिश का खुलासा किया है। गलतागेट थाना इलाके में एक व्यक्ति भगवान की मूर्ति को सोने की बताकर बेचने पहुंचा तो पुलिसकर्मी ही ग्राहक बन गए। आरोपी ने शुरुआत में मूर्ति के 10 लाख रुपए मांगे। मोलभाव के बाद 3.10 लाख रुपए में सौदा तय हुआ और जैसे ही मूर्ति की डिलीवरी हुई, पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया।



पुलिस के मुताबिक आरोपी के पास से करीब 21 इंच लंबा अष्टधातु का विग्रह बरामद किया गया है। मूर्ति वास्तव में कितनी पुरानी है, इसमें कौन-सी धातुएं हैं और इसका कोई पुरातात्विक या ऐतिहासिक महत्व है या नहीं, इसकी जांच अब पुरातत्व विशेषज्ञों से कराई जाएगी।



मुखबिर से मिली सूचना, पुलिस खुद बन गई खरीदार

CID-CB की स्पेशल टीम के ASI दुष्यंत सिंह और हेड कांस्टेबल शाहिद अली को सूचना मिली थी कि शहजाद नाम के व्यक्ति के पास कथित तौर पर पुरानी सोने की मूर्ति है और वह इसे बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है।



टीम ने सूचना की तस्दीक करने के बाद जाल बिछाया। पुलिसकर्मियों ने बोगस ग्राहक बनकर संपर्क किया। पुलिस के अनुसार शुरुआत में मूर्ति की कीमत 10 लाख रुपए बताई गई। बातचीत और मोलभाव के बाद सौदा 3 लाख 10 हजार रुपए नकद में तय हुआ।



ऊपर-नीचे असली नोट, बीच में ‘मनोरंजन बैंक’ की गड्डियां

ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए पुलिस ने 3.10 लाख रुपए की बोगस रकम तैयार की। पुलिस के मुताबिक गड्डियों में ऊपर और नीचे असली नोट रखे गए थे, जबकि बीच में ‘भारतीय मनोरंजन बैंक’ के नोट लगाए गए थे।



गलतागेट थाना इलाके में आरोपी को रकम सौंप दी गई। मूर्ति देखने पर टीम को इसके सोने की नहीं होने का संदेह हुआ। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की।



सूरजपोल अनाज मंडी के सामने गलतागेट थाना पुलिस की मदद से अब्दुल कादिर निवासी सलेमपुर, करौली को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके पास से सौदे में दी गई रकम भी बरामद कर ली गई।



10 हजार रुपए में मूर्ति पहुंचाने आया था जयपुर

पुलिस के मुताबिक पूछताछ में अब्दुल कादिर ने बताया कि सौदा तय होने के बाद 8 सितंबर की रात शहजाद के कहने पर अब्दुल समद ने उसे मूर्ति की डिलीवरी देने के लिए जयपुर भेजा था। इसके बदले उसे 10 हजार रुपए मिलने थे।



अब पुलिस शहजाद और अब्दुल समद की भूमिका की जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि मूर्ति आखिर आई कहां से, इसे किसने हासिल किया और क्या प्राचीन वस्तुओं या नकली सोने की मूर्तियों के नाम पर ठगी करने वाला कोई बड़ा नेटवर्क इसके पीछे सक्रिय है।



मूर्ति का राज खोलेगी पुरातत्व विभाग की जांच

फिलहाल पुलिस ने बरामद विग्रह को अष्टधातु का बताया है, लेकिन इसकी वास्तविक धातु और उम्र की अंतिम पुष्टि विशेषज्ञ जांच के बाद होगी। पुरातत्व विभाग से यह भी पता लगाया जाएगा कि मूर्ति का कोई ऐतिहासिक या पुरातात्विक महत्व है या नहीं।



पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई कर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की आशंका को भी टाल दिया गया। हालांकि प्रेस नोट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस कथित साजिश के पीछे क्या ठोस आधार या घटनाक्रम था। इसलिए इस पहलू पर पुलिस की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी।



कार्रवाई DGP राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर ADG क्राइम बिपिन कुमार पाण्डेय के निर्देशन में की गई। CID-CB के उपनिरीक्षक शैलेन्द्र शर्मा ने ऑपरेशन का नेतृत्व किया, जबकि जयपुर उत्तर DCP करण शर्मा और गलतागेट थाना पुलिस ने कार्रवाई में सहयोग किया।



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