जयपुर अग्निकांड में 2 अधिकारी सस्पेंड, मंत्री खर्रा बोले- अभी और होगी कार्रवाई
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर के सेठी कॉम्प्लेक्स में 17 सितंबर को भीषण आग लगी थी।
- सरकार ने लापरवाही के आरोप में दो अधिकारियों को किया सस्पेंड।
- मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आगे भी कार्रवाई के संकेत दिए।
- अग्निकांड की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई।
- कमेटी को सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
जयपुर के पुरोहित जी का कटला स्थित सेठी कॉम्प्लेक्स में आग लगी थी। यह घटना 17 सितंबर को हुई थी। आग के बाद अग्निशमन व्यवस्था और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे। राजस्थान सरकार ने मामले में दो अधिकारियों को निलंबित किया है। इनमें नगर निगम जयपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा शामिल हैं। सहायक अग्निशमन अधिकारी कुलदीप माणतवाल पर भी कार्रवाई हुई।
स्वायत्त शासन विभाग ने निलंबन के आदेश जारी किए। विभाग की कार्रवाई प्रथम दृष्ट्या सामने आई जिम्मेदारियों के आधार पर हुई है। मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है।
मंत्री खर्रा ने जयपुर अग्निकांड पर क्या कहा?
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि कार्रवाई केवल दो अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगी। मंत्री के अनुसार, जांच कमेटी फायर सिस्टम और अधिकारियों की भूमिका देखेगी। जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस बयान के बाद मामले में आगे की जांच पर ध्यान बढ़ गया है। फिलहाल, अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद होगी।
फायर सिस्टम पर उठे सवाल
जयपुर अग्निकांड के बाद फायर सिस्टम की कार्यक्षमता पर सवाल सामने आए। मंत्री ने भी इस व्यवस्था की जांच की बात कही। उन्होंने बताया कि लंबी दूरी से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की व्यवस्था जांच में शामिल है। इसमें यह देखा जाएगा कि पर्याप्त पानी का दबाव बन रहा था या नहीं।
मंत्री के अनुसार, केवल फायर सिस्टम लगाना पर्याप्त नहीं है। आपात स्थिति में उसका प्रभावी ढंग से काम करना भी जरूरी। इस जांच से फायर सिस्टम की वास्तविक कार्यक्षमता का पता लगाया जाएगा। हालांकि, सिस्टम की विफलता का अंतिम कारण जांच के बाद स्पष्ट होगा।
स्मार्ट सिटी के काम भी जांच के दायरे में
जयपुर में स्मार्ट सिटी से जुड़े कामों पर भी सवाल उठे हैं। मंत्री खर्रा ने इन कामों को जांच के दायरे में शामिल किए जाने की पुष्टि की। जांच में उन व्यवस्थाओं को देखा जाएगा, जो मौके पर मौजूद होनी चाहिए थीं। यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित जिम्मेदारियों का पालन हुआ या नहीं।
स्वायत्त शासन मंत्री ने कहा कि सामने आई कमियों को केवल एक भवन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इससे जांच का दायरा संबंधित व्यवस्थाओं तक बढ़ता है। हालांकि, स्मार्ट सिटी के किस विशेष काम में कमी मिली, इसकी विस्तृत जानकारी रिपोर्ट में सामने आनी बाकी है।
रूफटॉप निर्माण पर भी जांच
सेठी कॉम्प्लेक्स में रूफटॉप निर्माण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। मंत्री ने बताया कि संबंधित फाइल की जांच चल रही है। इसमें फायर से जुड़ी आवश्यक अनुमति और व्यवस्थाओं को देखा जाएगा। साथ ही, किस स्तर पर अनुमति दी गई, इसकी भी पड़ताल होगी।
जांच में जिम्मेदारी तय करने से जुड़े पहलुओं को शामिल किया गया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किन अधिकारियों या विभागों की भूमिका सामने आएगी। इसलिए रूफटॉप निर्माण से जुड़े आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकलेगा।
छह फीट के रास्ते का मुद्दा
अग्निकांड से जुड़ी बातचीत में छह फीट के रास्ते का मुद्दा भी उठा। मंत्री ने इसे गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि लोगों को पहले समझाइश देकर अतिक्रमण हटाने को कहा जाएगा। इसके बाद अभियान चलाने की बात भी कही गई। इससे घटनास्थल के आसपास रास्तों और अतिक्रमण की स्थिति पर ध्यान गया है। हालांकि, अतिक्रमण की पूरी स्थिति और कार्रवाई का विवरण अभी सामने नहीं आया है।
सात दिन में आएगी जांच रिपोर्ट
जयपुर अग्निकांड की जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी की अध्यक्षता निदेशालय स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त निदेशक करेंगे।कमेटी में निदेशालय के मुख्य अभियंता भी सदस्य हैं। नगर निगम उदयपुर के मुख्य अग्निशमन अधिकारी को भी सदस्य बनाया गया है।
कमेटी आग लगने के कारणों की जांच करेगी। इसके साथ अधिकारियों की भूमिका और संभावित लापरवाही भी देखी जाएगी। कमेटी को सात दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट से घटना के कारणों और जिम्मेदारियों से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं।
घटना के बाद बढ़ा राजनीतिक दबाव
कटला अग्निकांड के बाद राजनीतिक गतिविधियां भी देखने को मिलीं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत घटनास्थल पर पहुंचे थे। इसके बाद जयपुर प्रभारी और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल पहुंचे। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी घटनास्थल का दौरा किया। इन दौरों के बाद मामले ने राजनीतिक रूप भी लिया। इसके बाद विभाग की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया सामने आई।
स्वायत्त शासन विभाग के सचिव रवि जैन ने निलंबन की कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि कमेटी आग के कारणों और अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल दो अग्निशमन अधिकारियों का निलंबन हो चुका है। उच्चस्तरीय कमेटी जांच के लिए गठित है। कमेटी की रिपोर्ट से आग के कारणों और संभावित लापरवाही की जानकारी मिल सकती है। इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होने की संभावना है।
मंत्री खर्रा ने अन्य जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई का संकेत दिया है। हालांकि, नए नामों और कार्रवाई की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। इस मामले में फायर सिस्टम, निर्माण अनुमति और रास्तों की व्यवस्था अहम जांच बिंदु हैं। इन सभी पहलुओं पर रिपोर्ट का इंतजार रहेगा।
FAQ
- जयपुर अग्निकांड में कितने अधिकारी निलंबित हुए?
दो अग्निशमन अधिकारियों को निलंबित किया गया है। इनमें मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा और सहायक अग्निशमन अधिकारी कुलदीप माणतवाल शामिल हैं। - जयपुर अग्निकांड की जांच रिपोर्ट कब आएगी?
उच्चस्तरीय जांच कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में आग के कारणों और अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी। - क्या अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने आगे कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अन्य जिम्मेदारियों का निर्धारण जांच के बाद होगा।
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