जयपुर में पुलिसकर्मी ने दोस्तों को फंसाने के लिए रची साजिश; शराब पार्टी के बहाने सरकारी क्वार्टर बुलाया
जयपुर में पुलिस की स्पेशल टीम से जुड़े एक हेड कॉन्स्टेबल पर अपने ही दोस्तों को झूठे हथियार मामले में फंसाने का आरोप लगा है। आरोप है कि उसने पुरानी कहासुनी का बदला लेने के लिए दोस्तों को शराब पार्टी के बहाने सरकारी क्वार्टर पर बुलाया। वहां पहले से रखे हथियार दिखाकर पुलिस को सूचना दी और तीन दोस्तों को गिरफ्तार करवा दिया। लेकिन पकड़े गए युवकों के मोबाइल की जांच हुई तो पूरे मामले की कहानी बदल गई। शिकायत और शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने कार्रवाई करने वाले हेड कॉन्स्टेबल रोहिताश समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
रात 2 बजे पुलिस को दी हथियारों की सूचना
डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा के मुताबिक, सोमवार रात करीब 2 बजे हेड कॉन्स्टेबल रोहिताश ने शास्त्री नगर थाना पुलिस को सूचना दी कि उसने इलाके में कुछ लोगों को अवैध हथियारों के साथ पकड़ा है।
सूचना मिलने पर थाने से एएसआई को मौके पर भेजा गया। रोहिताश के सरकारी क्वार्टर में मृदुल सोनी, मनीष मीणा, अभिषेक सिंह राठौड़ और फुरकान मौजूद थे। वहां दो हथियार भी रखे हुए थे।
पुलिस के पहुंचने पर रोहिताश ने फुरकान को मुखबिर बताया और उसे वहां से जाने दिया। बाकी तीन युवकों को थाने ले जाया गया। हथियारों से जुड़े मामले में कार्रवाई पूरी होते-होते सुबह करीब 4 बज गए।
मोबाइल चेक किए तो खुलने लगी पूरी कहानी
तीनों युवकों को पकड़ने के बाद पुलिस ने उनसे पूछताछ की और उनके मोबाइल फोन की जांच की। इसी दौरान सामने आया कि रोहिताश ने ही उन्हें फोन करके शराब पार्टी के बहाने सरकारी क्वार्टर पर बुलाया था।
आरोप है कि वहां हथियार पहले से रखे गए थे और बाद में उन्हीं के आधार पर दोस्तों को गिरफ्तार करवा दिया गया। मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद जांच कराई गई।
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मंगलवार शाम हेड कॉन्स्टेबल रोहिताश और उसके तीन साथियों फुरकान, मनीष मीणा तथा अभिषेक सिंह राठौड़ को गिरफ्तार कर लिया।
सोने की चेन, घड़ी और रुपए रखने का भी आरोप
इस मामले में पकड़े गए युवकों ने रोहिताश पर दूसरे आरोप भी लगाए हैं। आरोप है कि मृदुल सोनी की सोने की चेन, घड़ी और स्पीकर अपने पास रख लिए गए थे। यह भी आरोप लगाया गया कि पैसों के लिए दबाव बनाया जा रहा था और मना करने पर हथियारों के मामले में फंसाया गया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।
जिनसे हथियार लिए, उन्हीं को फंसाने का आरोप
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि रोहिताश ने कुछ समय पहले अभिषेक सिंह राठौड़, मनीष मीणा और फुरकान से हथियार लिए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, अभिषेक के पास पिछले पांच साल से एक पिस्टल और दो कारतूस थे।
आरोप है कि रोहिताश ने अभिषेक से एक पिस्टल और मनीष से दूसरी पिस्टल मंगवाकर अपने पास रख ली थी। इनमें से एक हथियार शास्त्री नगर स्थित सरकारी क्वार्टर में और दूसरा मुरलीपुरा स्थित उसके घर पर रखा गया था।
बताया गया है कि सोमवार रात रोहिताश ने फुरकान को अपने घर भेजकर हथियार मंगवाया। इसके बाद उन्हीं हथियारों के साथ अपने दोस्तों को पकड़वाने की साजिश रचने का आरोप है। पुलिस हथियारों की खरीद, उन्हें लाने और रखने से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है।
पुरानी कहासुनी के बाद बदला लेने का आरोप
जांच में सामने आया कि रोहिताश और उसके साथी लंबे समय से एक-दूसरे को जानते थे। वे अक्सर साथ बैठते और पार्टी करते थे। कुछ समय पहले शराब पार्टी के दौरान पिस्टल को लेकर उनके बीच कहासुनी हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, साथियों ने बाद में माफी भी मांग ली थी। इसके बावजूद आरोप है कि रोहिताश ने उन्हें पार्टी के बहाने बुलाया और हथियारों के मामले में फंसा दिया।
मामले की पोल खुलने के बाद पुलिस ने मृदुल की रिहाई के लिए धारा 179 के तहत अदालत में अर्जी लगाने की बात कही है। वहीं, रोहिताश और उसके तीन साथियों को इसी मामले में गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस कमिश्नर ने स्पेशल टीमों को चेताया
स्पेशल टीम से जुड़े हेड कॉन्स्टेबल की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल ने सभी स्पेशल टीमों को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों से मिलीभगत सामने आने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में सेवा से बर्खास्त करने तक का कदम उठाया जा सकता है।
कमिश्नर ने चारों जिलों के डीसीपी समेत संबंधित अधिकारियों को अपनी टीमों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
आगे क्या?
पुलिस अब गिरफ्तार चारों लोगों से पूछताछ कर रही है। जांच में हथियारों के स्रोत, उन्हें सरकारी क्वार्टर तक लाने, दोस्तों को फंसाने के आरोप और कथित तौर पर सामान रखने से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। विभागीय जांच में यह भी देखा जाएगा कि पुलिसकर्मी ने अपने पद का दुरुपयोग किया या नहीं।