2200 करोड़ की जमीन पर चला पीला पंजा, 42 बीघा पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद हटाया अतिक्रमण
News In Short
- जयपुर में हाउसिंग बोर्ड ने 42 बीघा जमीन पर बुलडोजर से कब्जा किया।
- भूमाफियाओं ने जमीन पर अवैध कॉलोनी बना दी थी।
- कई कच्चे-पक्के मकान और बाउंड्रीवाल तोड़े गए।
- राजस्थान हाई कोर्ट ने कब्जा लेने का आदेश दिया।
- 2019 में कॉलोनी के लिए एनओसी देने से हाउसिंग बोर्ड ने इनकार किया था।
News In Detail
जयपुर में बीटू बाइपास से द्रव्यवती नदी तक 2200 करोड़ रुपए कीमत की 42 बीघा सरकारी जमीन पर हाउसिंग बोर्ड ने अतिक्रमण हटा दिया। बोर्ड की टीम ने कई बाउंड्रीवाल और कच्चे-पक्के मकान तोड़े और जमीन खाली करवाकर कब्जे के साइनेज लगाए।
भूमाफियाओं की अवैध कॉलोनी
जमीन पर भूमाफियाओं ने पहले कॉलोनी बसा दी थी और कागजों में भूखंड बेच दिए। इसमें कई रसूखदार लोगों को भूखंड कौड़ियों के दाम में बेच दिए गए।
हाईकोर्ट ने दी मंजूरी
16 अप्रैल को बोर्ड प्रशासन ने पहली कार्रवाई की थी, लेकिन विरोध और ऊपरी स्तर पर दखल के कारण कार्रवाई बीच में रोक दी गई थी। कुछ कॉलोनी निवासी ने राजस्थान हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाल ही में हाईकोर्ट ने स्टे को खारिज कर दिया और बोर्ड प्रशासन को कब्जा लेने का आदेश दिया।
जमीन अधिग्रहण की पृष्ठभूमि
हाउसिंग बोर्ड ने इस जमीन का अधिग्रहण 1989 में शुरू किया था। 1991 में प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन कब्जा नहीं लिया गया। इस बीच भूमाफियाओं ने जवाहरपुरी भवन निर्माण सहकारी समिति के पट्टे के आधार पर कॉलोनी बसा दी।
2019 में एनओसी देने से इनकार
साल 2019 में कॉलोनी के नियमन के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने एनओसी (NOC) मांगी। तब आवासन मंडल (Housing Board) के आयुक्त ने एनओसी देने से इनकार किया। मंडल ने कहा कि जमीन पर आधा भी निर्माण नहीं हुआ है, इसलिए नियमन नहीं किया जा सकता। सोसाइटी के खिलाफ FIR दर्ज की गई और मामला एसीबी (ACB) को भेजा गया।
FAQs
जयपुर में हाउसिंग बोर्ड ने जमीन पर कब्जा क्यों किया?
भूमि पर भूमाफियाओं ने अवैध कॉलोनी बसाई थी और भूखंड बेच दिए थे। हाईकोर्ट ने बोर्ड को कब्जा करने का आदेश दिया।
जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?
हाउसिंग बोर्ड ने जमीन अधिग्रहण 1989 में शुरू किया था और 1991 में प्रक्रिया पूरी हुई, लेकिन कब्जा नहीं लिया गया।
2019 में एनओसी (NOC) क्यों नहीं दी गई थी?
कॉलोनी पर 50% निर्माण भी नहीं था। इसलिए आवासन मंडल ने एनओसी (NOC) देने से इनकार किया और सोसाइटी के खिलाफ FIR दर्ज कर एसीबी (ACB) को मामला भेजा।
ये भी पढे़:-
गोल्ड मेडल पर स्टूडेंट का नाम छपा, दीक्षांत समारोह में दूसरे को दिया, हाई कोर्ट पहुंचा छात्र
सरकार ने किया प्रशासन में बड़ा बदलाव, 8 जिला प्रभारी सचिव का फेरबदल
बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों के खिलाफ पुलिस लेगी सख्त एक्शन, वाहन होगा जब्त