जयपुर में पकड़ गए 36 अवैध विदेशी नागरिक, सरकार ने किया डिपोर्ट

Ashish Bhardwaj | Aug 29, 2026, 11:15 IST
अवैध विदेशी नागरिक
राजस्थान के जयपुर में पिछले 7 महीने में वीजा खत्म होने के बावजूद अवैध रूप से रह रहे 36 विदेशी नागरिक पकड़े गए। सभी को डिपोर्ट कर दिया गया है। मामले में एजेंट नेटवर्क की जांच जारी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर में 36 अवैध विदेशी नागरिक पकड़े गए।
  • इनमें थाईलैंड की 19 युवतियां शामिल हैं।
  • युगांडा और तंजानिया की युवतियां भी मिलीं।
  • कुछ विदेशी स्पा सेंटरों में काम कर रहे थे।
  • सभी को कानूनी प्रक्रिया के तहत डिपोर्ट किया गया।

जयपुर में पिछले 7 महीने के दौरान वीजा खत्म होने के बावजूद अवैध रूप से रह रहे 36 विदेशी नागरिक पकड़ में आए हैं। इनमें थाईलैंड की 19 युवतियां और युगांडा, तंजानिया सहित अन्य देशों की 14 युवतियां शामिल हैं। तीन युवक केन्या के भी पकड़े गए। इन्हें होटलों और स्पा सेंटर्स पर छापेमारी के दौरान पकड़ा गया। सभी को कानूनी प्रक्रिया के तहत डिपोर्ट कर दिया गया है।



टूरिस्ट वीजा पर आए, फिर नहीं लौटे

विदेशी पंजीकरण अधिकारी (FRO – Foreigners Registional Office) धर्मेंद्र सागर के मुताबिक जनवरी से जुलाई के बीच 35 ऐसे विदेशी नागरिक जयपुर एयरपोर्ट पर उतरे थे, जिनके पास टूरिस्ट वीजा था। वीजा खत्म होने के बाद इनमें से कोई भी अपने देश नहीं लौटा। विदेश मंत्रालय से मिली सूची के आधार पर स्थानीय पुलिस और इंटेलिजेंस की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया गया। कई होटलों और स्पा सेंटर्स पर दबिश देकर इन्हें पकड़ा गया।



12 साल तक छिपकर रही युवती

जांच में सामने आया कि युगांडा की एक युवती पिछले 12 साल से भारत में छिपकर रह रही थी। वह दिसंबर 2013 में टूरिस्ट वीजा पर जयपुर आई थी। इसके बाद वह जयपुर से चंडीगढ़, बेंगलुरु और हैदराबाद सहित कई राज्यों में जाकर अवैध मसाज सेंटरों और होटलों में काम करती रही।



थाई महिला के बयान से खुला नया एंगल

जुलाई में जयपुर के निर्माण नगर स्थित एक होटल से एक थाई महिला को पकड़ा गया। वह मार्च में टूरिस्ट वीजा पर जयपुर आई थी। उसका वीजा जून 2026 तक वैध था, लेकिन वह पिछले डेढ़ महीने से छिपकर रह रही थी। पूछताछ में महिला ने बताया कि वह स्थानीय लोगों की मदद से एक स्पा में काम कर रही थी, जो उसके वीजा की शर्तों के खिलाफ था।



कुछ पर केस, कुछ पर देह व्यापार की आशंका

धर्मेंद्र सागर ने बताया कि पकड़े गए कुछ विदेशी नागरिकों के खिलाफ पहले से मामले दर्ज थे। जैसे केन्या के एक युवक पर चोरी का केस दर्ज था। ऐसे मामलों में कोर्ट के आदेश पर वीजा बढ़ाकर उस व्यक्ति को रोका जाता है और केस निपटने के बाद डिपोर्ट किया जाता है।



विदेश मंत्रालय ऐसे नागरिकों को ब्लैकलिस्ट कर देता है। कार्रवाई के दौरान पकड़ी गईं कुछ युवतियों के देह व्यापार में शामिल होने की आशंका भी जताई गई, हालांकि पीटा एक्ट (PITA – Prevention of Immoral Traffic Act) में हुए संशोधन के चलते ऐसी युवतियों पर सीधे कानूनी कार्रवाई नहीं होती। इनके खिलाफ कार्रवाई सिर्फ वीजा नियमों के उल्लंघन के आधार पर होती है, जिसके तहत इन्हें डिपोर्ट किया जाता है।



आते ही एजेंट ले लेते हैं पासपोर्ट-वीजा

धर्मेंद्र सागर के मुताबिक पकड़ी गईं विदेशी युवतियों की पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। इनमें से ज्यादातर ट्रैवल एजेंट के जरिए टूरिस्ट या ई-वीजा पर भारत आती हैं। विदेशी ट्रैवल एजेंट भारतीय एजेंटों से पैसों की डील करते हैं। भारत आने के बाद स्थानीय एजेंट इनका पासपोर्ट अपने पास रख लेते हैं, ताकि पूरा नियंत्रण उनके हाथ में रहे। इसके बाद इन्हें स्पा और अन्य गतिविधियों में लगा दिया जाता है। जांच एजेंसियों के मुताबिक जब तक तय कमाई का लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता, एजेंट पासपोर्ट वापस नहीं करते।



स्पा-मसाज सेंटर में नौकरी के नाम पर बुलावा

एफआरओ धर्मेंद्र सागर के अनुसार एजेंट ज्यादातर थाईलैंड से युवतियों को स्पा और मसाज सेंटरों में नौकरी का झांसा देकर भारत बुलाते हैं। इनमें से कई युवतियां वीजा खत्म होने के बाद भी ज्यादा पैसा कमाने के लालच में अवैध रूप से जयपुर में रुक जाती हैं। विदेश मंत्रालय की सूचना और पहले पकड़ी गई युवतियों से हुई पूछताछ के आधार पर ऐसे नेटवर्क का पता चलता है, जिसके बाद टीम दबिश देकर कार्रवाई करती है।



वीजा खत्म होते ही बंद हो जाती है ई-सिम

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी आसानी से पकड़ में क्यों नहीं आते। इस पर धर्मेंद्र सागर बताते हैं कि टूरिस्ट या ई-वीजा पर आने वाले हर विदेशी नागरिक को एयरपोर्ट पर एक ई-सिम दी जाती है। यह सिम वीजा की अंतिम तारीख तक ही चलती है। वीजा अवधि खत्म होते ही सिम अपने आप बंद हो जाती है। इसके बाद इन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ विदेशी नागरिक स्थानीय लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर सिम खरीद लेते हैं और उसी सिम के जरिए आपस में संपर्क बनाए रखते हैं।



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