नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए लामबंदी, हारे उम्मीदवारों की सिफारिश का कांग्रेस में विरोध
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के नगर निकाय चुनाव के लिए 27 अगस्त से नामांकन शुरू होंगे।
- भाजपा को जयपुर में पार्षद के लिए 2800 आवेदन मिले, कांग्रेस में भी दावेदारों की फौज।
- कांग्रेस में लगातार दो चुनाव हार चुके पूर्व प्रत्याशियों की सिफारिशों से टिकट देने का विरोध।
- भाजपा में पूर्व जिलाध्यक्ष और प्रदेश स्तर के नेता दावेदारी में हैं, जबकि कांग्रेस में प्रमुख चेहरों की कमी।
- मेयर पद पर बड़े नेताओं के साथ वैश्य समाज ने भी लॉबिंग शुरू कर दी है।
रा जस्थान में नगर निकाय चुनाव का बिगुल बज चुका। गुरुवार, 27 अगस्त से नामांकन शुरू हो जाएंगे, लेकिन जयपुर नगर निगम में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट बंटवारे की है। पार्षद पद के लिए टिकट मांगने वालों की लंबी कतार है। मेयर का सीधा चुनाव नहीं होने की वजह से भीतरखाने अभी से ही दोनों पार्टियों के नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है।
जयपुर की राजनीति में नगर निगम चुनाव इसलिए भी अहम है, क्योंकि राजधानी का निगम राज्य की सियासत पर भी असर डालता है। ऐसे में दोनों दलों के लिए टिकट बंटवारा किसी चुनौती से कम नहीं।
कांग्रेस में हारे प्रत्याशियों की सिफारिश पर सवाल
कांग्रेस में इस बार उन नेताओं की सिफारिशों का विरोध हो रहा, जो लगातार दो विधानसभा चुनाव हार चुके। पार्टी के अंदर यह तर्क दिया जा रहा है कि ऐसे नेताओं की सिफारिश पर नगर निगम के टिकट नहीं दिए जाने चाहिए। हालांकि, 2023 का विधानसभा चुनाव हारने वाले कुछ प्रभावशाली पूर्व मंत्री और नेता ऐसे हैं, जिन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने टिकट पर अंतिम फैसला करने की जिम्मेदारी जिला अध्यक्षों और जिला प्रभारियों को दी है। ये पदाधिकारी विधायकों, विधायक प्रत्याशियों और दूसरे वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद नाम तय करेंगे।
जयपुर में भाजपा के सामने भी टिकट की बड़ी चुनौती
जयपुर में भाजपा का लंबे समय से दबदबा रहा है। यही वजह है कि पार्टी में टिकट मांगने वालों की संख्या भी ज्यादा है। भाजपा को पूरे राजस्थान से करीब 50 हजार आवेदन मिले हैं। अकेले जयपुर में करीब 2800 लोगों ने पार्षद के टिकट के लिए आवेदन किया है।
कांग्रेस में प्रदेश भर से करीब 40 हजार आवेदन आए हैं। जयपुर में भी ये संख्या दो हजार से भी ऊपर है। कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता स्वर्णिम चतुर्वेदी के मुताबिक, आवेदनों की छंटनी के बाद निकाय वार संख्या साफ होगी।
विधायकों को भी सता रहा राजनीतिक चुनौती का डर
टिकट बंटवारे में एक और पहलू काफी अहम है। भाजपा और कांग्रेस के मौजूदा और पूर्व विधायक ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं से सावधान हैं, जो आगे चलकर उनकी विधानसभा सीट के लिए चुनौती बन सकते। ऐसे प्रभावशाली नेताओं को नगर निगम चुनाव में टिकट मिलने से उनकी राजनीतिक जमीन मजबूत हो सकती, इसलिए दोनों दलों में ऐसे चेहरों को टिकट देने या रोकने को लेकर खींचतान की संभावना है।
महापौर के लिए वैश्य समाज की लॉबिंग
जयपुर में मेयर पद को लेकर वैश्य समाज ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। समाज के कुछ प्रमुख लोगों की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। बैठक में यह रणनीति बनी कि बोर्ड भाजपा का बने या कांग्रेस का, मेयर वैश्य समाज से बनाने की कोशिश की जाएगी। इसके लिए दोनों राजनीतिक दलों में संपर्क साधने की जिम्मेदारी कुछ लोगों को दी गई है। यानी टिकटों का फैसला होने से पहले ही महापौर पद को लेकर सामाजिक और राजनीतिक लॉबिंग शुरू हो गई है।
भाजपा में मेयर के लिए कई बड़े चेहरे
भाजपा में जयपुर मेयर पद के दावेदारों की संख्या फिलहाल ज्यादा दिखाई दे रही। जयपुर शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन, शैलेन्द्र भार्गव और सुनील कोठारी ने टिकट के लिए आवेदन किया है। सुनील कोठारी प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत का नाम भी मेयर की दौड़ में बताया जा रहा। इसके अलावा शहर भाजपा के जिला महामंत्री राजेश ताम्बी सहित रघुनाथ नरेड़ी, विमल अग्रवाल, मनीष पारीक, केदार शर्मा, जितेंद्र श्रीमाली और अनुराग खेतान जैसे वरिष्ठ नेताओं ने भी टिकट मांगा है।
कांग्रेस में महापौर के लिए चेहरे कम
कांग्रेस की बात करें तो अभी मेयर पद के लिए प्रमुख चेहरों की संख्या कम नजर आ रही। पूर्व पार्षद गिर्राज खंडेलवाल का नाम इस प्रमुखता से सामने आया है। हालांकि पार्टी में टिकटों का अंतिम फैसला होने के बाद ही यह साफ होगा कि मेयर पद की दौड़ में कौन-कौन शामिल होगा।
पार्षद के टिकट बंटने के बाद होगी तस्वीर साफ
भाजपा और कांग्रेस दोनों में दावेदारों की भीड़ है और हर गुट अपने पसंदीदा चेहरे को टिकट दिलाने की कोशिश में जुटा है। कांग्रेस में हारे नेताओं की सिफारिशों का विरोध, विधायकों की राजनीतिक चिंता, भाजपा में बड़ी संख्या में टिकट दावेदार और वैश्य समाज की मेयर पद को लेकर लॉबिंग ने जयपुर नगर निगम चुनाव को दिलचस्प बना दिया है।
अब असली तस्वीर टिकट बंटने के बाद सामने आएगी। कौन पार्षद का टिकट हासिल करता है और किसे मेयर की दौड़ में उतारा जाता है, इसी से जयपुर की अगली सियासी तस्वीर तय होगी।
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