जयपुर मेयर की कुर्सी पर भाजपा में घमासान, तीन पूर्व मेयर बिना पार्षद बने दावेदार

Mukesh Sharma | Aug 27, 2026, 17:49 IST
जयपुर निकाय चुनाव: बिना पार्षद का पर्चा भरे मेयर बनने की होड़
जयपुर नगर निकाय चुनाव के बीच भाजपा में मेयर पद को लेकर दावेदारी तेज हो गई। पार्टी के तीन पूर्व मेयर मोहनलाल गुप्ता, अशोक परनामी और अशोक लाहौटी बिना पार्षद का चुनाव लड़े ही महापौर बनने की तैयारी में जुटे हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जयपुर निकाय चुनाव में बिना पार्षद का पर्चा भरे मेयर बनने की होड़।
  • 2019 का नगरपालिका कानून संशोधन बना पूर्व मेयरों का बड़ा सहारा।
  • मोहनलाल गुप्ता, अशोक परनामी और अशोक लाहौटी फिर से रेस में शामिल।
  • भाजपा के भीतर विरोध, पार्षदों में से ही चुना जाए नया मेयर।
  • अभिमन्यु सिंह राजवी और पुनीत कर्णावत भी जयपुर मेयर की दौड़ में।

जयपुर नगर निकाय चुनाव में पार्षद के टिकट के साथ ही महापौर की कुर्सी को लेकर भाजपा में सियासी खेल शुरू हो गया। खास बात यह है कि मेयर बनने की तैयारी कर रहे तीन बड़े चेहरे ऐसे हैं, जो खुद पार्षद का चुनाव लड़ने के बजाय सीधे मेयर पद की दौड़ में उतरना चाहते।



इनमें जयपुर के पूर्व महापौर और विधायक रह चुके मोहनलाल गुप्ता, अशोक परनामी और अशोक लाहोटी शामिल हैं। तीनों ने अपनी सियासी सक्रियता बढ़ा दी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क शुरू कर दिया।



तीन पूर्व मेयर फिर महापौर की दौड़ में शामिल

तीनों नेताओं का जयपुर नगर निगम की राजनीति में पुराना अनुभव है। मोहनलाल गुप्ता 1994 में जयपुर नगर निगम के पहले महापौर बने थे। इसके बाद वे किशनपोल से तीन बार विधायक रहे। 2018 में चुनाव हारने के बाद 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया था।



अशोक परनामी 2004 से 2008 तक जयपुर के मेयर रहे। इसके बाद आदर्श नगर से 2 बार विधायक बने और 2014 से 2018 तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। वहीं, अशोक लाहोटी दिसंबर 2016 से दिसंबर 2018 तक जयपुर के मेयर रहे। 2018 में सांगानेर से विधायक बनने के बाद उन्होंने मेयर पद छोड़ दिया था।



तीनों फिलहाल विधायक नहीं हैं। 2023 में भाजपा ने किसी को भी विधानसभा टिकट नहीं दिया था। ऐसे में मेयर पद की दावेदारी को उनकी राजनीतिक वापसी की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा।



बिना पार्षद बने कैसे बन सकते हैं मेयर?

भाजपा के इन तीनों नेताओं की दावेदारी के पीछे 2019 में बदला गया नियम आधार बना हुआ। 16 अक्टूबर 2019 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने राजस्थान नगरपालिका अधिनियम में संशोधन किया था।



इसके बाद ऐसा प्रावधान हुआ कि कोई व्यक्ति पार्षद का चुनाव जीते बिना भी निकाय अध्यक्ष या महापौर बन सकता। यही संशोधन अब भाजपा के इन नेताओं की दावेदारी का आधार बन रहा।



भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क में पूर्व महापौर

सूत्रों के अनुसार तीनों नेताओं ने जयपुर के वरिष्ठ भाजपा नेताओं से संपर्क बढ़ाया है। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ विधायक कालीचरण सर्राफ से भी बातचीत की गई है।



अशोक लाहोटी और पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत के अलावा सरकारी सेवा से वीआरएस लेने वाले राजकुमार शर्मा ने भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की है। हालांकि अभी भाजपा ने मेयर पद के लिए किसी नाम पर फैसला नहीं किया।



भाजपा में ही हो रहा विरोध, पार्षद में से मेयर बनाने की मांग

दूसरी तरफ पार्टी के भीतर इस पूरी कवायद को लेकर सुगबुगाहट भी शुरू हो गई है। भाजपा के कई पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों का कहना है कि मेयर का चुनाव पार्षदों में से ही होना चाहिए।



उनका तर्क है कि भाजपा ने 2019 में हुए इस संशोधन का विरोध किया था। अब राज्य में भाजपा की सरकार है तो इस व्यवस्था को वापस लिया जाना चाहिए।



हालांकि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम बदलना संभव नहीं है। ऐसे में पार्टी के भीतर मांग उठ रही है कि मौजूदा नियम का इस्तेमाल गैर-पार्षद को मेयर बनाने के लिए नहीं किया जाए।



भाजपा से मेयर पद की रेस में कई और चेहरे

भाजपा में सिर्फ तीन पूर्व मेयर ही दावेदार नहीं हैं। पूर्व डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत, पूर्व पार्षद जितेंद्र श्रीमाली, जयपुर शहर भाजपा के पूर्व अध्यक्ष संजय जैन, शैलेंद्र भार्गव और सुनील कोठारी भी दौड़ में बताए जा रहे।



इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति रहे दिवंगत भैरोंसिंह शेखावत के नाती तथा पूर्व मंत्री नरपत सिंह राजवी के बेटे अभिमन्यु सिंह राजवी भी पार्षद का चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगर वे चुनाव जीतते हैं तो मेयर पद पर दावा कर सकते हैं।



असली तस्वीर टिकट के बाद साफ होगी

फिलहाल भाजपा में मेयर पद के लिए कई नाम सामने आ चुके हैं। एक तरफ पूर्व मेयर सीधे कुर्सी पर नजर लगाए हुए, तो दूसरी तरफ कई नेता पार्षद का चुनाव जीतकर मेयर बनने की तैयारी कर रहे हैं।



ऐसे में जयपुर में भाजपा के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पार्टी किसी पुराने दिग्गज को बिना पार्षद बनाए मेयर की कुर्सी देगी या फिर पार्षदों में से ही नया चेहरा चुनेगी? इसका जवाब भाजपा के टिकट और महापौर पद के फैसले के बाद ही सामने आएगा।



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