जयपुर मेट्रो की पहली लाइन पूरी होने में लगेंगे 13 साल, अब 2028 की डेडलाइन, यूनेस्को की आपत्ति के बाद बदला रूट
मेट्रो की पहली लाइन का विस्तार पूरा होने के लिए अब मार्च-अप्रैल 2028 की डेडलाइन तय की गई है। जयपुर में पहली मेट्रो 3 जून 2015 को मानसरोवर से चांदपोल के बीच चली थी। इसके बाद सितंबर 2020 में बड़ी चौपड़ तक विस्तार हुआ। अब बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक काम पूरा होने का इंतजार है। इस बीच परकोटे में मेट्रो का रूट भी बदल दिया गया है। पहले रामगंज चौपड़ पर स्टेशन बनना था, लेकिन अब इसे योजना से हटा दिया गया है। यूनेस्को ने भी हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट पूरा हुए बिना मेट्रो प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ने को लेकर सवाल उठाए थे।
मेट्रो की पहली लाइन पूरी करने का लक्ष्य मार्च-अप्रैल 2028
जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (JMRC) के सीएमडी वैभव गालरिया के मुताबिक, मानसरोवर से 200 फीट बाइपास क्रॉसिंग तक मेट्रो सेवा जून 2027 तक शुरू करने का लक्ष्य है। वहीं, बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक विस्तार का काम पूरा होने में करीब दो साल और लग सकते हैं।
उन्होंने बताया कि परकोटे में रामगंज चौपड़ पर प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन को योजना से हटा दिया गया है। अब गलता गेट और ट्रांसपोर्ट नगर में दिल्ली रोड पर स्टेशन बनाए जाएंगे। उनके मुताबिक, भूमिगत रूट होने से ऐतिहासिक विरासत पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं कम हुई हैं।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने गलता गेट स्टेशन की प्रस्तावित जगह का निरीक्षण किया। इस दौरान गलता गेट और बड़ी चौपड़ के बीच सुरंग बनाने के लिए टनल बोरिंग मशीन का काम शुरू किया गया। मुख्य सचिव के मुताबिक करीब 3.5 किलोमीटर लंबी सुरंग की खुदाई अगले पांच से छह महीने में पूरी होने की उम्मीद है। हालांकि, इसके बाद भी स्टेशन, ट्रैक और दूसरी तकनीकी व्यवस्थाओं का काम पूरा करना होगा।
पहले रामगंज चौपड़ पर बनना था स्टेशन, अब योजना बदली
जयपुर मेट्रो के फेज-1C में पहले बड़ी चौपड़ से रामगंज चौपड़ होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो ले जाने की योजना थी। जून 2026 में JMRC ने रूट में बदलाव की जानकारी दी। संशोधित योजना में रामगंज चौपड़ स्टेशन को हटा दिया गया। अब गलता गेट के पास भूमिगत स्टेशन और ट्रांसपोर्ट नगर में एलिवेटेड स्टेशन प्रस्तावित है।
JMRC के मुताबिक परकोटे में सड़क के ऊपर निर्माण करने के बजाय भूमिगत रास्ता अपनाने से ऐतिहासिक इमारतों पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सकेगा।लेकिन इस बदलाव के बाद एक सवाल सामने आया है। पुराने रूट के लिए तैयार डिजाइन, सर्वे और दूसरी प्रक्रियाओं पर कितना खर्च हुआ? क्या बदले हुए रूट के कारण प्रोजेक्ट की लागत या समय-सीमा प्रभावित हुई? इन सवालों पर JMRC का विस्तृत वित्तीय ब्यौरा सामने आना बाकी है।
यूनेस्को ने हेरिटेज असेसमेंट पर उठाए थे सवाल
जयपुर का परकोटा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यहां किसी बड़े निर्माण से ऐतिहासिक इमारतों और शहर की विरासत पर पड़ने वाले असर का आकलन महत्वपूर्ण है। यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति ने 2025 के अपने निर्णय में जयपुर मेट्रो सहित कुछ परियोजनाओं का हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट पूरा हुए बिना काम जारी रहने पर गंभीर चिंता जताई थी।
समिति ने संबंधित परियोजनाओं की जानकारी और आकलन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। साथ ही परियोजनाओं के क्रियान्वयन से पहले हेरिटेज असेसमेंट की समीक्षा सुनिश्चित करने की बात कही थी। अब सवाल है कि संशोधित मेट्रो रूट का हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट किस चरण में है और संबंधित एजेंसियों से कौन-कौन सी मंजूरियां मिली हैं।
2022-23 में 993.51 करोड़ रुपए आंकी गई थी लागत
राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा 2022-23 में बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर तक मेट्रो फेज-1C की अनुमानित लागत 993.51 करोड़ रुपए दर्ज की गई थी। इसके बाद रूट में बदलाव हुआ और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। ऐसे में पुरानी और संशोधित लागत की तुलना महत्वपूर्ण हो गई है।
फरवरी 2024 में JMRC ने रामगंज चौपड़ वाले प्रस्तावित रूट के लिए हेरिटेज कंसल्टेंसी का टेंडर भी निकाला था। इस काम की अनुमानित लागत एक करोड़ रुपए रखी गई थी।
यात्रियों को कब मिलेगी पूरी मेट्रो लाइन की सुविधा?
जयपुर में पहली मेट्रो सेवा जून 2015 में शुरू हुई थी। सितंबर 2020 में चांदपोल से बड़ी चौपड़ तक इसका विस्तार किया गया। अब मानसरोवर से पश्चिम दिशा और बड़ी चौपड़ से ट्रांसपोर्ट नगर की ओर विस्तार का काम चल रहा है। दोनों हिस्से चालू होने के बाद शहर के अधिक इलाकों को मेट्रो से सीधी कनेक्टिविटी मिल सकेगी। सरकार ने मार्च-अप्रैल 2028 का लक्ष्य रखा है।