जयपुर मेट्रो फेज-2 को कैबिनेट से मिली हरी झंडी, 13 हजार करोड़ रुपये का है प्रोजेक्ट
News In Short
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो फेज-2 को दी मंजूरी, 13,000 करोड़ का होगा प्रोजेक्ट।
- फेज-2 में होगा 41 किलोमीटर लंबा उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर और 36 स्टेशन।
- मेट्रो एयरपोर्ट क्षेत्र में भूमिगत चलेगी जिससे यात्री ट्रैफिक जाम से बचेंगे।
- जयपुर मेट्रो के फेज-2 से यात्री संख्या में भारी वृद्धि की संभावना।
- परियोजना में केंद्र और राज्य की 50:50 हिस्सेदारी, 2031 तक होगा पूरा।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर के लिए अच्छी खबर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जयपुर मेट्रो फेज-2 को हरी झंडी दे दी है। यह नया उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक के सफर को आसान बनाएगा। इस प्रोजेक्ट पर 13,037.66 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
41 किलोमीटर लंबा सफर, एयरपोर्ट तक पहुंच
जयपुर मेट्रो का फेज-2 शहर की मुख्य लाइफलाइन टोंक रोड और सीकर रोड को जोड़ेगा। यह कॉरिडोर दक्षिण में प्रहलादपुरा से शुरू होकर उत्तर में टोडी मोड तक जाएगा। इसके जरिए सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, वीकेआई (VKIA), जयपुर एयरपोर्ट, टोंक रोड, एसएमएस (SMS) अस्पताल, एसएमएस (SMS) स्टेडियम,अंबाबड़ी और विद्याधर नगर जैसे प्रमुख केंद्र मेट्रो मैप पर आ जाएंगे। खास बात यह है कि एयरपोर्ट क्षेत्र में मेट्रो भूमिगत होगी, जिससे यात्रियों को फ्लाइट पकड़ने के लिए ट्रैफिक जाम से जूझना नहीं पड़ेगा।
केंद्र और राज्य की 50:50 भागीदारी
इस मेगा प्रोजेक्ट को राजस्थान मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMRCL) द्वारा लागू किया जाएगा। यह केंद्र और राजस्थान सरकार का संयुक्त उपक्रम होगा, जिसमें दोनों की 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सितंबर 2031 तक इसे पूरी तरह तैयार करना है।
60 हजार से बढ़कर लाखों में होगी यात्री संख्या
वर्तमान में जयपुर मेट्रो का फेज-1 (मानसरोवर से बड़ी चौपड़) मात्र 11.64 किलोमीटर का है, जिसमें रोजाना करीब 60,000 लोग सफर करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि फेज-2 के शुरू होते ही यह संख्या कई गुना बढ़ जाएगी।
फेज-1 और फेज-2 के आपस में जुड़ने से पूरा जयपुर एक एकीकृत मेट्रो नेटवर्क से जुड़ जाएगा। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और प्रदूषण में भारी गिरावट आएगी।
14% से ज्यादा का सोशल रिटर्न
सरकार का कहना है कि इस परियोजना का मूल्यांकन किया गया तो इसकी आर्थिक आंतरिक दर (EIRR) 14% से अधिक पाई गई है, जो यह दर्शाती है कि यह प्रोजेक्ट सामाजिक और आर्थिक रूप से जयपुर के लिए एक बड़ी 'जैकपॉट' साबित होगा। यह राजस्थान की नई TOD (Transit Oriented Development) नीति-2025 के अनुरूप है।
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