पीएम के शिलान्यास के बाद भी जयपुर मेट्रो के टेंडरों पर सवाल, अदाणी समूह की कंपनी 921 करोड़ के ठेके की दौड़ में सबसे आगे
जयपुर मेट्रो फेज-2 के करीब 13 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट की रफ्तार टेंडर प्रक्रिया में अटकती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शिलान्यास के करीब साढ़े तीन महीने बाद भी परियोजना के कई हिस्सों में निर्माण एजेंसियों का चयन पूरा नहीं हो पाया है। करीब 26 किलोमीटर के निर्माण कार्य की टेंडर प्रक्रिया अधूरी होने से प्रोजेक्ट की समयसीमा पर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर, जयपुर एयरपोर्ट के नीचे सुरंग बनाने के करीब 1,160 करोड़ रुपए के पैकेज में अदाणी समूह की कंपनी Cemindia Projects Limited ने 921.63 करोड़ रुपए की सबसे कम बोली लगाई है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि अलग-अलग पैकेजों की टेंडर प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और क्या इसका असर मेट्रो निर्माण की तय समयसीमा पर पड़ेगा?
41 किलोमीटर मेट्रो लाइन पर 13 हजार करोड़ खर्च करने की योजना
केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में जयपुर मेट्रो फेज-2 को मंजूरी दी थी। परियोजना की कुल लागत 13,037.66 करोड़ रुपए है। इसके तहत प्रहलादपुरा से टोडी मोड़ तक करीब 41 किलोमीटर लंबा नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर बनाया जाएगा। इसमें 36 स्टेशन प्रस्तावित हैं।
यह मेट्रो लाइन सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, जयपुर एयरपोर्ट, एसएमएस अस्पताल, टोंक रोड और विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को जोड़ेगी। केंद्र सरकार ने परियोजना को सितंबर 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
26 किलोमीटर हिस्से के टेंडर पर उठे सवाल
मेट्रो के करीब 26 किलोमीटर हिस्से की टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होने का मुद्दा सामने आया है। हालांकि राजस्थान मेट्रो के आधिकारिक टेंडर रिकॉर्ड के अनुसार 27 जून को 11 एलिवेटेड स्टेशनों और 29 जून को 12 एलिवेटेड स्टेशनों से जुड़े निर्माण पैकेजों की निविदाएं जारी की गई थीं।
इन पैकेजों में टेंडर जारी होने, तकनीकी और वित्तीय बोलियां खुलने तथा अंतिम ठेका आवंटित होने की स्थितियां अलग-अलग हैं। इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिन 26 किलोमीटर हिस्सों की प्रक्रिया अधूरी बताई जा रही है, उनमें कितने किलोमीटर के टेंडर जारी नहीं हुए और कितने हिस्सों में टेंडर जारी होने के बावजूद ठेका आवंटन बाकी है।
अदाणी समूह की कंपनी ने लगाई 921.63 करोड़ की सबसे कम बोली
जयपुर मेट्रो फेज-2 के अंडरग्राउंड पैकेज NCB 2C-02 की वित्तीय बोलियां 15 अक्टूबर को खोली गई थीं। इसमें अदाणी समूह की कंपनी Cemindia Projects Limited ने 921.63 करोड़ रुपए की सबसे कम बोली लगाई।
इस पैकेज की अनुमानित लागत 1,160.26 करोड़ रुपए बताई गई है। कंपनी की बोली अनुमानित लागत से करीब 238.63 करोड़ रुपए कम है। दूसरे नंबर पर J. Kumar Infraprojects रही, जिसने 923.95 करोड़ रुपए की बोली लगाई। दोनों कंपनियों की बोलियों में करीब 2.32 करोड़ रुपए का अंतर है।
जयपुर एयरपोर्ट के नीचे बनेगी मेट्रो सुरंग
इस पैकेज के तहत टोंक रोड पर पिंजरापोल गोशाला से बी-2 बाईपास की ओर अंडरग्राउंड मेट्रो निर्माण प्रस्तावित है। इसमें दो समानांतर सुरंगें, अंडरग्राउंड रैंप और सांगानेर थाना तथा जयपुर एयरपोर्ट के पास भूमिगत स्टेशन बनाए जाने हैं।
एयरपोर्ट के नीचे सुरंग निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम होगा। इसमें सुरक्षा मानकों, जमीन की स्थिति और मौजूदा ढांचों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना होगा।
मेट्रो अधिकारी ने कहा था- अंतिम ठेका आवंटन बाकी
जयपुर मेट्रो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की थी कि Cemindia Projects Limited सबसे कम बोलीदाता बनी है। अधिकारी के अनुसार 15 अक्टूबर को वित्तीय बोलियां खोली गई थीं और कंपनी को ठेका मिलने की संभावना है। हालांकि उस समय अंतिम आवंटन नहीं हुआ था।
टेंडर प्रक्रिया की अलग-अलग रफ्तार पर सवाल
मेट्रो फेज-2 के विभिन्न पैकेजों की निविदाएं अलग-अलग तारीखों पर जारी की गई हैं। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि किन पैकेजों की तकनीकी बोलियां खुल चुकी हैं, किनकी वित्तीय बोलियां लंबित हैं और कितनों के अंतिम वर्क ऑर्डर जारी हुए हैं।
जयपुर के लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
मेट्रो फेज-2 से जयपुर के औद्योगिक, आवासीय और व्यावसायिक इलाकों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन मिलने की उम्मीद है। लेकिन निर्माण शुरू होने और पूरा होने की समयसीमा में देरी होने पर लोगों को मेट्रो की सुविधा के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है।