दिवाली से पहले जयपुर नगर निगम में 11 हजार शिकायतें लंबित, 1087 स्ट्रीट लाइट खराब, सफाई के दावों पर सवाल
जयपुर में दिवाली की तैयारियों के बीच नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ शहर को साफ-सुथरा और रोशनी से जगमगाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, दूसरी तरफ नगर निगम के पास आमजन की 11,106 शिकायतें लंबित होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 1,087 शिकायतें खराब स्ट्रीट लाइट की हैं। त्योहार के समय भी शहर के कई इलाकों में सफाई, सीवर, नालियों और सड़कों से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।
सफाई, सीवर और सड़कों की 6999 शिकायतें
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नगर निगम में लंबित 11,106 शिकायतों में से 6,999 सफाई, सीवरेज, नालियों और सड़कों से संबंधित हैं। कुल लंबित शिकायतों का करीब 63 प्रतिशत हिस्सा इन बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा है। स्ट्रीट लाइट और अवैध निर्माण से संबंधित 2,190 शिकायतें लंबित बताई गई हैं। इनमें 1,087 शिकायतें खराब स्ट्रीट लाइट की हैं। करीब 620 स्ट्रीट लाइट संबंधी शिकायतें नगर निगम के पार्ट-2 क्षेत्र की बताई गई हैं।
आमेर-हवामहल, किशनपोल और आदर्श नगर जोन में स्ट्रीट लाइट की शिकायतें अधिक होने की जानकारी सामने आई है। दिवाली के समय बाजारों और आवासीय इलाकों में रोशनी की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ऐसे में लंबित शिकायतें निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए थे दिवाली से पहले व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें दिवाली से पहले सफाई, सड़क, बिजली, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज और नालियों से जुड़े जरूरी काम पूरे करने के निर्देश दिए गए थे। मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से नियमित निरीक्षण करने और अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर समस्याओं का जल्द समाधान कराने को भी कहा था।
इसके बाद जयपुर नगर निगम ने विशेष सफाई अभियान शुरू किया। इसके बावजूद हजारों शिकायतें लंबित होने से सवाल उठ रहा है कि इन निर्देशों के बाद कितनी समस्याओं का समाधान हुआ और कितने लोगों को अभी इंतजार करना पड़ रहा है।
महापौर ने जोन में जाकर की समीक्षा, अधिकारियों को रोजाना मॉनिटरिंग के निर्देश
दिवाली से पहले महापौर सुनील कोठारी ने नगर निगम के अलग-अलग जोन में जाकर व्यवस्थाओं की समीक्षा की थी। आदर्श नगर जोन में उन्होंने अधिकारियों, कर्मचारियों और सफाईकर्मियों के साथ तीन घंटे से अधिक समय तक बैठक की। इसमें सफाई, स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों की समीक्षा की गई।
इससे पहले मुरलीपुरा जोन की बैठक में हूपर, खराब स्ट्रीट लाइट, सीवर, अतिक्रमण और पशु प्रबंधन की समस्याएं सामने आई थीं। महापौर ने अधिकारियों को रोजाना मॉनिटरिंग कर शिकायतों का निस्तारण करने के निर्देश दिए थे। सवाल यह है कि इन बैठकों और निर्देशों के बाद कितनी शिकायतें दूर हुईं और कितनी अभी लंबित हैं।
3000 अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती में भी हुई देरी
दिवाली की तैयारियों के लिए नगर निगम ने वार्डों में अतिरिक्त सफाईकर्मी लगाने की योजना बनाई थी। प्रत्येक वार्ड में 20 अतिरिक्त कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए अलग-अलग टेंडर जारी किए गए थे। करीब 3,000 अतिरिक्त सफाईकर्मियों की तैनाती में देरी सामने आई थी। उस समय कुछ टेंडर खुल चुके थे, जबकि कुछ की प्रक्रिया बाकी थी।
महापौर सुनील कोठारी ने टेंडर प्रक्रिया में देरी की बात स्वीकार की थी। उन्होंने बताया था कि करीब 60 से 70 प्रतिशत जोन में काम पूरा हो चुका है। शेष व्यवस्थाओं के लिए आयुक्त से चर्चा करने की बात कही थी।
शिकायत बंद होने का मतलब समस्या दूर होना भी है क्या?
जयपुर नगर निगम के ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर शिकायत की स्थिति देखने की व्यवस्था है। इसमें शिकायत की तारीख, वार्ड, जोन, संबंधित अधिकारी, शिकायत की स्थिति, बंद करने की तारीख और सत्यापन संबंधी विवरण दर्ज करने के कॉलम हैं। हालांकि, पोर्टल पर शिकायत बंद दिखने का मतलब यह नहीं माना जा सकता कि हर मामले में समस्या वास्तव में दूर हो गई है।
इसके लिए शिकायतकर्ता से पुष्टि और मौके की स्थिति का मिलान जरूरी है। नगर निगम की शिकायत निस्तारण प्रक्रिया में यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि शिकायत बंद करने से पहले समाधान का सत्यापन किस स्तर पर किया जाता है।
दिवाली से पहले निगम के सामने बड़ी चुनौती
नगर निगम ने दिवाली पर प्रमुख बाजारों, चौराहों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर सफाई और रोशनी की व्यवस्था बेहतर करने की योजना बनाई है। करीब 10 हजार नई लाइटें लगाने की तैयारी की जानकारी भी सामने आई थी। लेकिन नई लाइटें लगाने के साथ पहले से खराब लाइटों की मरम्मत भी जरूरी है। इसी तरह विशेष सफाई अभियान के साथ नियमित कचरा उठाने, नालियों की सफाई और सीवरेज की शिकायतों का समाधान करना भी आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि दिवाली से पहले नगर निगम कितनी लंबित शिकायतें दूर कर पाएगा और कितने इलाकों में लोगों को त्योहार के दौरान भी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।