जयपुर निगम रिजल्ट: CM भजनलाल-डिप्टी CM ने बचाया गढ़, मंत्री राठौड़ के इलाके में बगावत भारी
जयपुर नगर निगम के नतीजों ने भाजपा को शहर की सत्ता सौंपने के साथ मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम, मंत्रियों और विधायकों का सियासी रिपोर्ट कार्ड भी सामने रख दिया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में भाजपा का दबदबा बरकरार रहा। डिप्टी सीएम दीया कुमारी के विद्याधर नगर में भी भाजपा सबसे आगे रही, हालांकि बागियों ने पार्टी की चिंता बढ़ाई।
वहीं, उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के झोटवाड़ा में भाजपा उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी। कांग्रेस के गढ़ आदर्श नगर में रफीक खान अपनी पकड़ बचाने में कामयाब रहे, जबकि हवामहल में भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य के लिए नतीजे राहत लेकर आए।
जयपुर नगर निगम में भाजपा को मिला बहुमत
जयपुर नगर निगम के 150 वार्ड में भाजपा ने 78 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया। कांग्रेस के खाते में 53 वार्ड आए हैं। इस तरह शहर में भाजपा का बोर्ड बनना तय है।
पूरे शहर के नतीजों से अलग विधानसभा क्षेत्रवार परिणाम कई सियासी संदेश भी दे रहे। कहीं मंत्री अपना गढ़ बचाने में सफल रहे तो कहीं पार्टी के बागियों ने दिग्गजों की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए। कुछ क्षेत्रों में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला लगभग बराबरी पर रहा।
सांगानेर में BJP का दबदबा, CM के करीबी उम्मीदवार की हार
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विधानसभा क्षेत्र सांगानेर में भाजपा ने अपना दबदबा बनाए रखा। यहां नगर निगम के 20 वार्ड हैं। इनमें भाजपा ने 15 और कांग्रेस ने 5 में जीत हासिल की। यानी सांगानेर में तीन चौथाई वार्ड भाजपा के खाते में आए। यह प्रदर्शन मुख्यमंत्री के लिए राहत भरा है।
सांगानेर लंबे समय से भाजपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता रहा है और निकाय चुनाव में भी यह तस्वीर नहीं बदली। हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल को यहां एक झटका भी लगा। वार्ड 49 में भाजपा का वह प्रत्याशी चुनाव हार गया, जिसे मुख्यमंत्री का सबसे करीबी माना जा रहा था। इसके बावजूद पूरे विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े भाजपा के पक्ष में रहे।
विद्याधर नगर में डिप्टी सीएम दीया कुमारी का असर दिखा
डिप्टी सीएम दीया कुमारी के विद्याधर नगर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई। उपलब्ध नतीजों के अनुसार भाजपा ने 12 और कांग्रेस ने 4 वार्ड जीते हैं। चार निर्दलीय भी चुनाव जीते हैं।
खास बात यह है कि जीतने वाले निर्दलीयों में भाजपा के बागी भी शामिल हैं। इसलिए नतीजे दीया कुमारी के लिए दो संदेश देते हैं। पहला, क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक बढ़त कायम है। दूसरा, पार्टी के भीतर टिकट को लेकर पैदा हुए असंतोष को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
झोटवाड़ा में मंत्री राज्यवर्धन राठौड़ नहीं दिखा पाए करिश्मा
उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के नतीजे भाजपा के लिए मिले-जुले रहे। यहां उपलब्ध परिणामों में भाजपा को 6 और कांग्रेस को 3 वार्ड मिले हैं। चार निर्दलीय भी जीतने में सफल रहे।
निर्दलीयों की मजबूत मौजूदगी ने भाजपा की चिंता बढ़ाई है। चुनाव के दौरान टिकट वितरण और बागियों को लेकर यहां पार्टी के भीतर असंतोष सामने आया था। नतीजों में उसका असर भी दिखाई दिया। हालांकि, कांग्रेस इस स्थिति का पूरा फायदा नहीं उठा पाई। वह केवल तीन वार्ड जीत सकी। ऐसे में झोटवाड़ा का परिणाम भाजपा के लिए बड़ी जीत नहीं है तो कांग्रेस के लिए भी उत्साहित करने वाला नहीं कहा जा सकता।
सिविल लाइंस में बराबरी, गोपाल शर्मा के लिए संकेत
सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर रही। यहां उपलब्ध नतीजों में दोनों दलों ने 7-7 वार्ड जीते। यह क्षेत्र भाजपा विधायक गोपाल शर्मा का है। सत्ता में होने के बावजूद भाजपा यहां कांग्रेस पर बढ़त नहीं बना सकी। कांग्रेस ने लगभग बराबरी का मुकाबला कर यह संकेत दिया है कि सिविल लाइंस में उसका आधार कायम है।
विधानसभा क्षेत्र के ये नतीजे भाजपा के लिए सतर्क करने वाले हैं। पार्टी को यहां संगठन और स्थानीय समीकरणों पर दोबारा काम करना पड़ सकता है।
किशनपोल में भी BJP-कांग्रेस बराबर
किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में भी मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। कांग्रेस विधायक अमीन कागजी यहां से लगातार दूसरी बार विधायक हैं। उपलब्ध नतीजों में भाजपा और कांग्रेस ने 5-5 वार्ड जीते, जबकि एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।
इस क्षेत्र में टिकट वितरण भी चुनाव के दौरान चर्चा में रहा। पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल की हार भाजपा के लिए बड़ा झटका रही। खंडेलवाल को मेयर पद के संभावित चेहरों में देखा जा रहा था, लेकिन पार्षद चुनाव में हार के साथ उनकी दावेदारी भी खत्म हो गई।
आदर्श नगर में कांग्रेस मजबूत
आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र ने कांग्रेस को बड़ी राहत दी। कांग्रेस ने 9 वार्ड में जीत हासिल की, जबकि भाजपा को 4 सीटें मिलीं। एक निर्दलीय भी चुनाव जीता है। यह कांग्रेस विधायक रफीक खान का क्षेत्र है। वे लगातार दूसरी बार यहां से विधायक हैं। निकाय चुनाव के नतीजे बताते हैं कि क्षेत्र में कांग्रेस और रफीक खान की पकड़ अभी मजबूत बनी हुई है।
दूसरी ओर भाजपा के लिए आदर्श नगर चिंता का क्षेत्र बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर पार्टी के अंदर मतभेद और मजबूत सर्वमान्य नेतृत्व की कमी उसके प्रदर्शन पर असर डालती दिखाई दी।
हवामहल में बालमुकुंदाचार्य को बढ़त
हवामहल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई। यहां उपलब्ध नतीजों में भाजपा ने 7, कांग्रेस ने 4 और निर्दलीयों ने 3 वार्ड जीते। हवामहल से भाजपा के बालमुकुंदाचार्य पहली बार विधायक हैं। विधानसभा चुनाव के बाद नगर निगम चुनाव में भी भाजपा का आगे रहना उनके लिए राजनीतिक रूप से अहम है।
इसके उलट कांग्रेस को यहां बगावत का नुकसान उठाना पड़ा। टिकट वितरण के बाद पार्टी में नाराजगी सामने आई थी। जीतने वाले निर्दलीयों में कांग्रेस के बागी भी शामिल हैं। ऐसे में ये नतीजे शहर कांग्रेस संगठन के लिए भी मंथन का विषय हैं।
आमेर के तीन वार्डों में तीन अलग नतीजे
आमेर विधानसभा क्षेत्र का छोटा हिस्सा जयपुर नगर निगम में आता है। यहां निगम के तीन वार्ड हैं। इनमें एक भाजपा, एक कांग्रेस और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की। तीनों वार्डों का अलग-अलग खेमे में जाना बताता है कि यहां किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा।
जयपुर नगर निगम में 78 वार्ड जीतने के बाद भाजपा का बोर्ड बनना तय है। लेकिन विधानसभा क्षेत्रवार नतीजों को देखें तो तस्वीर एक जैसी नहीं है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के सांगानेर में भाजपा ने मजबूत प्रदर्शन किया। मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के झोटवाड़ा में भाजपा अपेक्षित करिश्मा नहीं दिखा सकी।
सिविल लाइंस और किशनपोल में भाजपा-कांग्रेस के बीच लगभग बराबरी का मुकाबला रहा। आदर्श नगर में कांग्रेस ने अपना किला मजबूत रखा तो हवामहल में भाजपा ने बढ़त बनाकर बालमुकुंदाचार्य को राहत दी।
इस तरह जयपुर की सत्ता भले भाजपा के हाथ आ गई हो, लेकिन नतीजों ने शहर के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में दिग्गज नेताओं की राजनीतिक ताकत और कमजोरियां दोनों सामने रख दी हैं। आने वाले चुनावों से पहले दोनों पार्टियों के लिए यही इन नतीजों का सबसे बड़ा सियासी संदेश है।
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