नीट पेपर लीक: एक ही परिवार के 5 बच्चों का सरकारी कॉलेजों में सिलेक्शन, जानिए पूरी कहानी
News In Short
- जयपुर के विकास बिंवाल ने NEET 2025 का पेपर 25 लाख में खरीदा था।
- इसी पेपर से पांचों भाई-बहनों का सरकारी मेडिकल कॉलेज में चयन हुआ।
- सीबीआई की जांच में पता चला कि NEET 2026 का पेपर भी खरीदा गया।
- पेपर खरीद में पिता मांगीलाल और चाचा दिनेश बिंवाल शामिल थे।
- आरोपियों को 7 दिन की CBI रिमांड पर भेजा गया।
News In Detail
राजस्थान में जयपुर के जमवारामगढ़ इलाके के बिंवाल परिवार ने NEET 2025 में भी पेपर खरीदा था। सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि विकास बिंवाल ने पिछले साल (2025) में हरियाणा के गुरुग्राम में रह रहे अपने दोस्त यश यादव से 25 लाख रुपए में नीट का पेपर खरीदा था।
इस पेपर की बदौलत विकास और उसके चार अन्य भाई-बहनों ने न केवल अच्छे स्कोर से परीक्षा पास की, बल्कि आज वे अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं। राजस्थान में NEET-2026 पेपर लीक मामले की जांच में खुलासा हुआ है कि मांगीलाल और दिनेश बिंवाल नाम के दो भाई इस पूरे खेल के मास्टरमाइंड थे। विकास मांगी का बेटा है।
पेपर लीक में ऐसे सक्रिय रहा बिंवाल परिवार
बिंवाल परिवार नीट (NEET) 2026 पेपर लीक से जुड़े विवाद के केंद्र में है। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार महाराष्ट्र में नासिक के शुभम खैरनार ने यश यादव के साथ प्रश्न पत्र साझा किया था। फिर वहां से यह बिवाल परिवार तक पहुंचा।
आरोप है कि बिंवाल परिवार 2024 और 2025 की नीट परीक्षाओं में भी अनुचित गतिविधियों में शामिल था। मांगीलाल के दो बच्चे (विकास सहित) और दिवंगत घनश्याम की दो बेटियों ने पिछले साल (2025) नीट पास की थी। वे वर्तमान में राजस्थान के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे हैं। इनके परिवार के एक अन्य बच्चे का भी सरकारी कॉलेज में सलेक्शन हुआ।
स्कोरकार्ड का अंतर: कोचिंग टेस्ट बनाम नीट-25 रिजल्ट
सीबीआई की जांच में जब इन बच्चों के कोचिंग टेस्ट और असली नीट रिजल्ट की तुलना हुई, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। सीबीआई जांच में इन भाई-बहनों के शैक्षणिक रिकॉर्ड और नीट स्कोर के बीच भारी अंतर पाया गया है:
पड़ोस की छत से घर में घुसी CBI टीम
गुरुवार को सीबीआई की टीम जब जांच के लिए जमवारामगढ़ स्थित दिनेश बिंवाल के आवास पर पहुंची, तो परिजनों ने दरवाजे बंद कर लिए। इसके बाद टीम को पड़ोस के घर के रास्ते अंदर दाखिल होना पड़ा।
टीम ने आरोपी के फार्म हाउस पर खड़ी दो लग्जरी गाड़ियों की तलाशी ली। शक है कि पेपर लीक से हुई काली कमाई का निवेश इन संपत्तियों और गाड़ियों में किया गया है। इसके साथ ही घर से कई चेक बुक, पासबुक, एटीएम कार्ड और नीट सीरीज के पेपर बरामद हुए हैं।
फिलहाल दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने शुभम खैरनार, यश यादव, मांगीलाल, विकास और दिनेश को 7 दिन की रिमांड पर भेज दिया है।
ग्रेस से पास छात्र भी बनने वाला था डॉक्टर
इस साल (नीट-2026) के लिए दिनेश बिंवाल के बेटे ऋषि बिंवाल के लिए पेपर खरीदा गया था। ऋषि का रिकॉर्ड चौंकाने वाला है। उसने 10वीं में मात्र 43.67% और 12वीं में ग्रेस मार्क्स से पास होकर केवल 50% अंक हासिल किए। जांच एजेंसी का मानना है कि यदि समय पर गिरफ्तारी नहीं होती, तो ऋषि भी अच्छी रैंक लाकर किसी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर बनने की राह पर होता।
फेसबुक पर बधाई संदेश
बिंवाल परिवार अपने बच्चों के एमबीबीएस में सलेक्शन को लेकर गर्व महसूस करता रहा है। दिनेश बिवाल ने 6 नवंबर, 2025 को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा था- यह मेरे परिवार के लिए बड़े गर्व की बात है कि हमारे 5 बच्चों का चयन सरकारी मेडिकल कॉलेज (MBBS) के लिए हुआ है। सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।
कॉलेजों से नदारद हैं बच्चे
पेपर लीक में दोनों भाइयों की गिरफ्तारी के बाद बिंवाल परिवार के सभी बच्चे अपने मेडिकल कॉलेजों से नदारद हैं। इनमें विकास बिंवाल को सीबीआई गिरफ्तार कर चुकी है।
अन्य चार बच्चे प्रगति, गुंजन, सानिया और पलक घटना के बाद से भूमिगत हैं। ये बच्चे कहां हैं, इसे लेकर बिंवाल परिवार की महिलाएं भी कुछ नहीं बोल रही हैं। उनका कहना है कि उन्हें नहीं पता, ये अपने कॉलेज में हैं या किसी रिश्तेदार के यहां चले गए हैं।
नीट की वो काली डील
असली खेल शुरू हुआ 4-5 साल पहले, जब बिंवाल परिवार सीकर शिफ्ट हुआ। कहने को तो बच्चे वहां नीट की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पर्दे के पीछे दिनेश और मांगीलाल का संपर्क पेपर माफियाओं से हो चुका था।
जांच में सामने आया कि मांगीलाल के बेटे विकास बिंवाल ने ही अपने पिता की मुलाकात गुरुग्राम के पेपर माफिया यश यादव से करवाई थी। यहीं से डॉक्टर फैक्ट्री का ब्लूप्रिंट तैयार हुआ। साल 2025 में 25 लाख रुपए में नीट का पेपर खरीदा गया। नतीजा यह हुआ कि विकास, प्रगति, गुंजन, सानिया और पलक—इन पांचों भाई-बहनों ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पा लिया।
बिंवाल परिवार ने खड़ी की अकूत संपत्ति
सीबीआई अब उन संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है जो पिछले दो सालों में इस परिवार ने बनाए हैं। यह मामला साफ तौर पर दिखाता है कि नीट जैसी बड़ी परीक्षा की सुरक्षा में सेंधमारी एक साल से नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही थी।
पिछले 4-5 साल से दोनों भाई अपना अधिकांश समय सीकर में बिता रहे थे, जहां उनके बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। बताया जाता है कि पेपर माफियाओं से उनके संपर्क सीकर प्रवास के दौरान ही हुए।
चरवाहे से 'किंगपिन' बनने का सफर
कहानी शुरू होती है साल 2005 के आसपास जयपुर के जमवारामगढ़ इलाके से। यहां मांगीलाल और दिनेश बिंवाल का परिवार बेहद साधारण जीवन जीता था। उनके दिन भेड़-बकरियां चराने और खेतों में बीतते थे। वक्त बदला तो भाइयों ने बकरों का व्यापार और मीट की दुकान शुरू की। लेकिन उनकी महत्वाकांक्षाएं मीट की दुकान तक सीमित नहीं थीं।
धीरे-धीरे उन्होंने प्रॉपर्टी के धंधे में कदम रखा और देखते ही देखते विकास नगर जैसी कॉलोनियां काट दीं। पैसा आया तो रसूख बढ़ा और रसूख बढ़ा तो सूदखोरी का एक बड़ा नेटवर्क तैयार हो गया। जो भाई कभी पगडंडियों पर चलते थे, उनके फार्महाउस के बाहर अब 4-5 लग्जरी गाड़ियां खड़ी होने लगीं।
राजनीतिक संबंधों की जांच
परिवार के राजनीतिक संबंधों की भी जांच की जा रही है। जमवारामगढ़ से भाजपा विधायक महेंद्र पाल मीणा ने जनवरी में फेसबुक पर मांगीलाल बिंवाल को जन्मदिन की बधाई दी थी।
दिनेश बिंवाल खुद को भाजपा युवा मोर्चा का नेता बताता था। उसने क्षेत्र में कई होर्डिंग्स लगवाए थे, जिनमें विधायक मीणा के साथ उसकी तस्वीरें थीं।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आरोप लगाया, दिनेश बिवाल भाजपा का पदाधिकारी है। क्या इसीलिए राजस्थान की भाजपा सरकार ने नीट पेपर लीक को दबाने की कोशिश की और कोई एफआईआर दर्ज नहीं की?
हालांकि, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
भाजपा नेताओं संग तस्वीरें अब वायरल
भाजपा युवा मोर्चा जयपुर देहात में जिला मंत्री रहे दिनेश के फेसबुक पर 6200 से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। वह रसूख बढ़ाने के लिए भाजपा के बड़े नेताओं संग फोटो डालकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता था, ताकि सामाजिक, राजनीतिक क्षेत्र के अलावा अफसरों पर अपनी पकड़ मजबूत कर सके।
आरोपी दिनेश बिवाल ने क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए फोटो पॉलिटिक्स का भरपूर सहारा लिया। वह राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर प्रभावशाली लोगों के साथ तस्वीरें साझा कर खुद को रसूखदार साबित करता था। वहीं, मांगीलाल पर्दे के पीछे रहकर व्यापार संभालता था। फिलहाल, सीबीआई की हिरासत में दोनों भाइयों से कड़ी पूछताछ जारी है, जिससे कई और बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद है।
गिरफ्तारी के बाद पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, मंत्री किरोड़ी लाल मीणा, राज्यवर्धन सिंह, सतीश पूनिया, मदन दिलावर, महेंद्रपाल मीणा सहित कई दिग्गजों के साथ दिनेश की तस्वीरें सोशल मीडिया पर कांग्रेस कार्यकर्ता जमकर वायरल कर रहे हैं। चर्चा इस बात की भी है कि विधायक ने 9 मई को दिनेश को 'छोटा भाई' लिखते हुए एनिवर्सरी की बधाई दी थी, जिसे मामला तूल पकड़ते ही हटा दिया है।
मां बोली: बेटे के खिलाफ साजिश
मांगीलाल की मां प्रभु देवी ने आरोप लगाया कि उनके बेटों के खिलाफ साजिश की गई है। उनका कहना था कि लोग उनके बच्चों से जलते हैं क्योंकि वे अच्छे छात्रों में से हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके बेटे पेपर लीक करते, तो वे इस तरह के फार्महाउस में नहीं रहते और इस तरह की समस्याओं में नहीं फंसते।
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