पिंक सिटी में 'गुलाबी हाथी' का बवाल, विदेशी आर्टिस्ट की क्रिएटिविटी या बेजुबान पर क्रूरता?

Ashish Bhardwaj | Mar 30, 2026, 17:40 IST
Photograph: (the sootr)
जयपुर में गुलाबी रंग से रंगे हाथी के फोटोशूट ने विवाद खड़ा कर दिया। रूसी फोटोग्राफर इसे कला बता रही हैं, जबकि पशु प्रेमी इसे क्रूरता मान रहे हैं। प्रशासन ने अनुमति न होने पर जांच शुरू कर दी है।

News In Short

  • जयपुर में गुलाबी रंग में रंगे हाथी की तस्वीरों ने खड़ा किया विवाद।
  • रूस की फोटोग्राफर जूलिया ने जयपुर में हाथी को रंगकर कराया था फोटोशूट।
  • तस्वीरों के वायरल होने पर कला बनाम पशु क्रूरता की बहस हुई शुरू।
  • हाथी मालिक ने कहा कि फोटोशूट के तुरंत बाद धो दिया गया था रंग।
  • फोटोशूट की कोई अनुमति नहीं, वाइल्डलाइफ विभाग की जांच शुरू।

News In Detail

Jaipur: अपनी गुलाबी रंगत के लिए मशहूर 'पिंक सिटी' में एक असली हाथी को गुलाबी रंग में रंगने की तस्वीरों ने नई बहस छेड़ दी है। रूस की ट्रैवलिंग आर्ट फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा द्वारा किए गए इस फोटोशूट की तस्वीरें जैसे ही इंटरनेट पर वायरल हुईं, प्रशंसा से ज्यादा विरोध के स्वर तेज हो गए। मामला अब प्रशासन और वाइल्डलाइफ वार्डन की जांच की दहलीज तक जा पहुंचा है।



6 हफ्ते की तैयारी और 'पिंक' विजन

रूसी फोटोग्राफर जूलिया का कहना है कि उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए जयपुर में डेढ़ महीना बिताया। यहाँ की संस्कृति और हाथियों के प्रति प्रेम को देखकर उन्हें एक ऐसे आर्ट का विचार आया जो राजस्थान की पहचान को नए तरीके से पेश करे। जूलिया के मुताबिक, एक मॉडल और सही लोकेशन ढूंढने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी, क्योंकि लोग इस अनूठे कॉन्सेप्ट के लिए आसानी से तैयार नहीं हो रहे थे।



कला बनाम पशु क्रूरता

फोटोज सामने आते ही लोगों की राय दो हिस्सों में बंट गई। एक तरफ कुछ लोगों ने इसे बेहतरीन फोटोग्राफी और रंगों का अद्भुत तालमेल बताया। वहीं दूसरी तरफ पशु प्रेमियों और एक्टिविस्ट्स ने इसे 'एनिमल क्रुएलिटी' (पशु क्रूरता) करार दिया। यूजर्स का तर्क है कि सिर्फ कुछ फोटो के लिए बेजुबान को रसायनों से रंगना गलत है। कई लोगों ने सलाह दी कि यही काम AI या फोटो एडिटिंग से भी किया जा सकता था।



'चंचल' का शूट और बचाव में तर्क

विवाद बढ़ता देख हाथी गांव विकास समिति के अध्यक्ष बल्लू खान और हाथी मालिक शादिक ने सफाई पेश की। हथिनी का नाम ‘चंचल’ था, जो लगभग 65 साल की थी। चंचल को पहले से ही सवारी या किसी काम में नहीं लिया जाता था। विदेशी फोटोग्राफर के अनुरोध पर केवल 10 मिनट के लिए फोटोशूट किया गया। हाथी पर सिर्फ कच्चा गुलाल लगाया गया, जिसे तुरंत पानी से साफ कर दिया गया।



यह भी जानकारी सामने आई है कि इस फोटोशूट का हिस्सा रही हथिनी 'चंचल' का इस साल फरवरी में निधन हो चुका है। यानी जब यह विवाद छिड़ा, तब तक वह हथिनी जीवित नहीं थी।



प्रशासन हुआ सख्त, शुरू होगी जांच

हालांकि फोटोग्राफर का दावा है कि उन्होंने ऑर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल किया, लेकिन वाइल्डलाइफ विभाग इसे हल्के में नहीं ले रहा है। वाइल्डलाइफ वार्डन अरुण प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि उनके पास इस तरह के किसी फोटोशूट की कोई आधिकारिक अनुमति या जानकारी नहीं थी। विभाग अब इस मामले की गंभीरता से जांच करवा रहा है कि क्या फोटोशूट के दौरान वन्यजीव नियमों का उल्लंघन हुआ है?



ये भी पढे़:-

मैंने कहा बेटों को सत्ता से दूर रखो, यह नहीं कहा कि राजनीति से दूर रखो, गहलोत ने भजनलाल पर फिर साधा निशाना



श्वेतांबरी और विक्रम भट्ट के बैंक खाते फिर होंगे चालू, कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में ये दिए आदेश



उदयपुर फाइल्स: एआई वीडियो के आरोपों पर चार्जशीट ने बढ़ाई उलझन, नहीं मिला कोई जिक्र



सरकारी स्कूल में पढ़े, सरकारी शिक्षक बने, फिर पहले ही प्रयास में बन गए आईएएस डॉ. जितेंद्र कुमार



Tags:
  • जयपुर
  • वाइल्डलाइफ
  • फोटोशूट
  • पशु क्रूरता
  • रूस की फोटोग्राफर