जयपुर में 45 टंकियां तैयार, 2342 किलोमीटर पाइपलाइन बिछी, फिर भी तीन लाख लोगों को बीसलपुर के पानी का इंतजार
जयपुर के पृथ्वीराज नगर में बीसलपुर का पानी पहुंचाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर पाइपलाइन और पानी की टंकियां तैयार की जा चुकी हैं, लेकिन लाखों लोगों को अब भी इसका फायदा नहीं मिला है। निवारू रोड, हाथोज, बीर हाथोज, ब्योतावाला और पीथावास जैसे इलाकों में लोगों को नियमित सरकारी पेयजल आपूर्ति का इंतजार है। योजना के लिए 747.08 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे। इनमें से 407.60 करोड़ रुपए खर्च होने और 2342 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने के बाद भी बड़ी आबादी बीसलपुर की सप्लाई से नहीं जुड़ पाई है।
जलदाय विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पृथ्वीराज नगर खंड में अक्टूबर के आखिर तक करीब डेढ़ लाख लोगों को बीसलपुर का पानी मिल रहा था। परियोजना पूरी होने पर लगभग साढ़े चार लाख लोगों तक जलापूर्ति पहुंचाने का लक्ष्य है। यानी लक्षित आबादी के करीब तीन लाख लोग अभी इस सुविधा से वंचित हैं। यह स्थिति तब है, जब परियोजना के लिए प्रस्तावित 46 पानी की टंकियों में से 45 का निर्माण पूरा होने की जानकारी विभाग दे चुका है।
टंकियां बन गईं, लेकिन घरों तक नहीं पहुंचा पानी
इस योजना की सबसे बड़ी कमी पानी की टंकियों के निर्माण और उनसे घरों तक सप्लाई शुरू होने के बीच सामने आई है। राजस्थान सरकार ने परियोजना की प्रगति रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया कि 46 में से 30 टंकियों का निर्माण पूरा कर उनसे जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। इनसे करीब एक लाख की लक्षित आबादी को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराई जा रही थी।
इसके अलावा 15 अन्य टंकियों का निर्माण भी पूरा हो चुका था, लेकिन उनसे जुड़े वितरण नेटवर्क का काम बाकी था। पवनपुरी वेस्ट में अंतिम टंकी का निर्माण चल रहा था। यानी सरकारी रिकॉर्ड में 45 टंकियां तैयार होने के बावजूद सभी टंकियों से घरों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था चालू नहीं हो सकी थी। इसका असर उन इलाकों पर पड़ा है, जहां लोग लंबे समय से बीसलपुर की सप्लाई शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं।
निवारू रोड और कालवाड़ रोड के कुछ इलाकों में तीन दिन में एक बार पानी मिलने की समस्या भी सामने आ चुकी है। वहीं हाथोज, बीर हाथोज, ब्योतावाला और पीथावास में नए घरेलू जल कनेक्शन देने की प्रक्रिया अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक चल रही थी। हाथोज–निवारू रोड और सिरसी–हाथोज लिंक रोड के आसपास भी कई आवासीय कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं।
जिन क्षेत्रों में सरकारी सप्लाई नहीं पहुंची है, वहां लोगों को टैंकर, ट्यूबवेल और निजी जल स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में पाइपलाइन बिछाने और टंकी बनाने का काम पूरा होने के बावजूद लोगों की पानी की परेशानी खत्म नहीं हुई है।
अगस्त 2025 में पूरा होना था काम, अब फरवरी 2027 की तैयारी
परियोजना की समयसीमा में देरी भी जलदाय विभाग के अपने दस्तावेजों से सामने आई है। विभाग की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट 2024-25 के पृष्ठ संख्या आठ पर पृथ्वीराज नगर पेयजल परियोजना के इस चरण को 12 अगस्त 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य दर्ज है। उस समय परियोजना का 45 प्रतिशत काम पूरा हुआ था और 184.98 करोड़ रुपए खर्च हो चुके थे।
इसके बावजूद परियोजना निर्धारित समय पर पूरी नहीं हुई। इसके बाद सरकार ने दिसंबर 2026 तक लक्षित आबादी को चरणबद्ध तरीके से पानी पहुंचाने का लक्ष्य बताया। लेकिन अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में विभाग के एक इंजीनियर ने घरेलू कनेक्शन का काम फरवरी 2027 तक पूरा होने की उम्मीद जताई।
इस हिसाब से विभाग की पुरानी समयसीमा और घरेलू कनेक्शन पूरे होने के नए अनुमान में करीब डेढ़ साल का अंतर आ गया है। देरी की वजह और समयसीमा बढ़ाने के औपचारिक आदेश की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। खास बात यह है कि विभाग अब भी कुछ क्षेत्रों में नए कनेक्शन के आवेदन ले रहा है। आवेदन मंजूर होने के बाद ही इन घरों में सप्लाई शुरू होगी। यानी जिन कॉलोनियों के लिए पानी की टंकियां और पाइपलाइन तैयार की गई हैं, वहां जलापूर्ति की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।
करोड़ों के निर्माण के बाद भी पानी पहुंचाने की चुनौती बाकी
परियोजना के दूसरे चरण के लिए 4 जुलाई 2023 को 471.70 करोड़ रुपए का कार्यादेश जारी हुआ था। इसके तहत करीब 2700 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया है। अक्टूबर तक 2342 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने की जानकारी दी गई थी। इस हिसाब से करीब 358 किलोमीटर पाइपलाइन का काम भी बाकी था।
दूसरी ओर, नए कनेक्शन बढ़ने के साथ पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की चुनौती भी सामने आ रही है। जलदाय विभाग के वरिष्ठ इंजीनियर ने माना है कि अतिरिक्त कनेक्शनों के कारण गर्मियों में पानी की मांग का प्रबंधन मुश्किल हो सकता है। विभाग बीसलपुर के पानी में भूजल मिलाकर सप्लाई करने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है।
ऐसे में पृथ्वीराज नगर की योजना को केवल टंकियों और पाइपलाइन के निर्माण से पूरा नहीं माना जा सकता। विभाग को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तैयार टंकियों से नियमित सप्लाई शुरू हो, घरों को कनेक्शन मिले और पर्याप्त दबाव के साथ पानी पहुंचे। सरकार की प्रगति रिपोर्ट में निर्माण कार्य और खर्च के आंकड़े तो दर्ज हैं, लेकिन प्रत्येक टंकी से जुड़े चालू घरेलू कनेक्शन, कॉलोनीवार जलापूर्ति और नियमित सप्लाई का पूरा विवरण स्पष्ट नहीं है।
पृथ्वीराज नगर की पेयजल योजना में यही सबसे बड़ा अंतर सामने आया है। सरकार के रिकॉर्ड में करोड़ों रुपए का निर्माण कार्य आगे बढ़ चुका है, जबकि लाखों लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य अधूरा है। जब तक तैयार टंकियों से नियमित सप्लाई शुरू नहीं होती और बाकी घरों को कनेक्शन नहीं मिलते, तब तक परियोजना का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुंच पाएगा।