जयपुर PWD में ठेकेदारों ने गेट बंद कर किया प्रदर्शन, XEN जयप्रकाश यादव पर आरोप, अब तीन सदस्यीय कमेटी करेगी जांच
जयपुर में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच विवाद बढ़ गया है। लंबित बिलों के भुगतान और अधिकारियों की कार्यशैली से नाराज ठेकेदारों ने हसनपुरा स्थित PWD कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला लगाकर विरोध प्रदर्शन किया। इससे कार्यालय में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों को परेशानी उठानी पड़ी।
ठेकेदारों ने PWD सिटी डिवीजन प्रथम के अधिशासी अभियंता (XEN) जयप्रकाश यादव के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। विवाद बढ़ने के बाद PWD के मुख्य अभियंता मुकेश भाटी ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। अब जांच में यह स्पष्ट होगा कि ठेकेदारों के बिल किस वजह से अटके हैं और अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।
मुख्य गेट पर ताला लगाया, घंटों परेशान रहे कर्मचारी
मंगलवार को ठेकेदार PWD कार्यालय पहुंचे और मुख्य गेट बंद कर विरोध जताया। ठेकेदारों का आरोप है कि कई महीनों से उनके बिलों का भुगतान नहीं हो रहा है। बार-बार शिकायत और ज्ञापन देने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया।
प्रदर्शन के दौरान कार्यालय परिसर में खड़े वाहन बाहर नहीं निकल सके। मुख्य गेट पर वाहनों की कतार लग गई। कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को दो से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। बाद में कई कर्मचारी छोटे गेट से पैदल बाहर निकले और कैब से घर गए।
ठेकेदारों ने लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रवीण गुप्ता के खिलाफ भी नाराजगी जताई गई।
XEN जयप्रकाश यादव को हटाने की मांग क्यों?
ठेकेदारों ने PWD सिटी डिवीजन प्रथम के XEN जयप्रकाश यादव की कार्यशैली पर गंभीर असंतोष जताया है। उनके कामकाज को लेकर विभागीय स्तर पर शिकायतें सामने आई हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि भुगतान और विभागीय कामकाज से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। इसी वजह से उन्होंने जयप्रकाश यादव को हटाने की मांग उठाई।
जयप्रकाश यादव के खिलाफ लगे आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। बिलों के लंबित रहने के लिए वे व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित बिल किस स्तर पर अटके हुए हैं और उनके भुगतान में देरी की वास्तविक वजह क्या है।
ठेकेदार और महिला इंजीनियर के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप
इस विवाद में ठेकेदार पारस कुमार खंडेलवाल और कनिष्ठ अभियंता खुशबू यादव के बीच आरोप-प्रत्यारोप का मामला भी सामने आया है। दोनों पक्षों की शिकायतों के बाद विभाग ने मामले की जांच कराने का फैसला लिया है। जांच कमेटी लंबित बिलों के साथ अधिकारियों और ठेकेदारों की ओर से लगाए गए आरोपों की भी पड़ताल करेगी।
फिलहाल इन आरोपों की सत्यता स्पष्ट नहीं है। जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि विवाद में किसकी क्या भूमिका रही और विभागीय स्तर पर कोई लापरवाही हुई या नहीं।
तीन सदस्यीय कमेटी बनाई, सात दिन में मांगी रिपोर्ट
PWD के मुख्य अभियंता मुकेश भाटी ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी की अध्यक्षता अतिरिक्त मुख्य अभियंता आर.के. सिंह करेंगे। अधीक्षण अभियंता अजय ऐरोन और वेद प्रकाश उपाध्याय को सदस्य बनाया गया है।
कमेटी लंबित बिलों, ठेकेदारों की शिकायतों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। विभाग ने कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला लिया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारी प्रवीण गुप्ता पर भी भुगतान रोकने के आरोप
ठेकेदारों की नाराजगी केवल सिटी डिवीजन प्रथम तक सीमित नहीं है। PWD के वरिष्ठ अधिकारी प्रवीण गुप्ता के खिलाफ भी भुगतान की फाइलें अटकाने के आरोप सामने आए हैं।
प्रदर्शन के दौरान ठेकेदारों ने प्रवीण गुप्ता को हटाने की मांग की। उनका आरोप है कि भुगतान की फाइलें लंबे समय से अटकी हैं और बार-बार मांग उठाने के बाद भी भुगतान जारी नहीं किया जा रहा।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि जयप्रकाश यादव से जुड़े भुगतान विवाद और प्रवीण गुप्ता के खिलाफ लगाए गए आरोप एक ही फाइल या अलग-अलग मामलों से संबंधित हैं।
जयप्रकाश यादव से संपर्क की कोशिश, नहीं मिला जवाब
इस मामले में द सूत्र ने PWD सिटी डिवीजन प्रथम के अधिशासी अभियंता जयप्रकाश यादव से उनका पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बातचीत नहीं हो सकी।
इसके बाद उन्हें मैसेज भेजकर मामले पर प्रतिक्रिया मांगी गई। खबर तैयार किए जाने तक उनका जवाब नहीं मिला।
बिल किस स्तर पर अटके, जांच में सामने आएगी वजह
इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण सवाल लंबित भुगतान का है। ठेकेदारों का कहना है कि काम करने के बाद भी उन्हें समय पर पैसा नहीं मिल रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने ठेकेदारों के बिल लंबित हैं, भुगतान की राशि कितनी है और किस स्तर पर फाइलें रुकी हुई हैं।
यह भी जांच का विषय है कि भुगतान में देरी बजट की कमी, दस्तावेजों की जांच, तकनीकी आपत्तियों या किसी अन्य कारण से हुई है। अगर बिलों का भुगतान लंबे समय तक अटका रहता है तो ठेकेदारों के दूसरे निर्माण कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।