800 CCTV खंगाले, 50 से ज्यादा छापे मारे, 26 दिन बाद ऐसे पकड़े गए 36 मिनट में 4 करोड़ की घड़ियां चुराने वाले

Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 28, 2026, 10:25 IST
36 मिनट में 4 करोड़ की घड़ियां पार
राडो शोरूम चोरी के आरोपी गिरफ्तार
जयपुर में चोरों ने महज 36 मिनट में 4 करोड़ रुपए की 251 महंगी घड़ियां उड़ा दीं। वारदात इतनी शातिर तरीके से हुई कि पुलिस को आरोपियों तक पहुंचने में 26 दिन लग गए। इस दौरान पुलिस ने 800 से ज्यादा CCTV कैमरे खंगाले और करीब 3 हजार किलोमीटर तक सुराग तलाशे। आखिरकार बिहार के मोतिहारी से दो आरोपी पकड़े गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। जयपुर में मेडिकल जांच के दौरान एक आरोपी ने अस्पताल की दीवार कूदकर भागने की कोशिश की। इस चक्कर में उसका पैर फ्रैक्चर हो गया।

26 दिन बाद बिहार से पकड़े गए दोनों आरोपी

जयपुर पुलिस ने राडो घड़ी शोरूम में हुई बड़ी चोरी के मामले में अजय प्रसाद जायसवाल (41) और दिनेश पासवान (46) को गिरफ्तार किया है। दोनों बिहार के मोतिहारी जिले के घोड़ासहन इलाके के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों घोड़ासहन गैंग से जुड़े हैं।



मंगलवार को दोनों आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए जयपुरिया अस्पताल ले जाया गया था। इसी दौरान एक आरोपी ने मौका देखकर दीवार कूदकर भागने की कोशिश की। इस प्रयास में उसका पैर फ्रैक्चर हो गया। अस्पताल में इलाज के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उन्हें 6 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। अब पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है। जांच का मुख्य मकसद चोरी की गई घड़ियों को बरामद करना और वारदात में शामिल बाकी आरोपियों तक पहुंचना है।



1 अक्टूबर को राडो शोरूम का शटर तोड़कर की थी चोरी

यह वारदात 1 अक्टूबर को जयपुर में टोंक रोड पर ग्लास फैक्ट्री के पास स्थित राडो घड़ी के शोरूम में हुई थी। बदमाशों ने वारदात से पहले शोरूम की रेकी की थी। इसके बाद वे मौके पर पहुंचे और शटर तोड़कर अंदर घुस गए।



पुलिस के मुताबिक, बदमाशों ने करीब 36 मिनट के भीतर 251 घड़ियां चुरा लीं। इनकी कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए बताई गई है। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।



शोरूम मालिक ने बजाज नगर थाने में मामला दर्ज करवाया। चोरी की बड़ी रकम और आरोपियों के फरार होने के बाद पुलिस ने जांच के लिए विशेष टीमें बनाईं। बजाज नगर थाना पुलिस के साथ सीएसटी और डीएसटी जयपुर ईस्ट की टीमें भी जांच में जुट गईं।



800 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली

पुलिस ने वारदात के बाद सिर्फ शोरूम के आसपास के कैमरे ही नहीं देखे, बल्कि आरोपियों के भागने के संभावित रास्तों की भी जांच की। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।



इस तरह पुलिस ने 800 से ज्यादा कैमरों की फुटेज देखकर आरोपियों की गतिविधियों और उनके भागने के रास्तों का पता लगाने की कोशिश की। जांच के दौरान टीमों ने करीब 3 हजार किलोमीटर का सफर तय किया।



पुलिस जयपुर से आगे बढ़ते हुए कोटपूतली, गुरुग्राम, दिल्ली और गाजियाबाद समेत 50 से ज्यादा ठिकानों पर पहुंची। यहां आरोपियों के संभावित ठिकानों और उनके आने-जाने से जुड़े सुराग तलाशे गए।



नेपाल बॉर्डर तक रखी नजर

जांच के दौरान पुलिस ने नेपाल सीमा के पास बीरगंज और रक्सौल इलाके में भी निगरानी रखी। पुलिस को आशंका थी कि चोरी की घड़ियों को दूसरे इलाके में ले जाकर बेचा जा सकता है। इसी वजह से सीमा क्षेत्र में भी सुराग जुटाए गए।



जांच आगे बढ़ी तो पुलिस बिहार के मोतिहारी जिले के घोड़ासहन इलाके तक पहुंच गई। वहां आरोपियों की तस्वीरों के आधार पर पहचान की गई। इसके बाद पुलिस ने अजय प्रसाद जायसवाल और दिनेश पासवान को गिरफ्तार कर लिया।



पुलिस की जांच में इस वारदात में शामिल कुल 8 लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई है। इनमें सुबोध उर्फ विकास डूम, सुरेंद्र प्रसाद उर्फ बैला, अरुण शाह, श्याम बाबू उर्फ गुल्लीशाह, अजय प्रसाद जायसवाल, राजा मलाह उर्फ साहनी, राजकुमार मलाह और दिनेश पासवान शामिल हैं। फिलहाल इनमें से दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।



9 राज्यों में चोरी की वारदातों के सुराग

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह सिर्फ जयपुर में ही सक्रिय नहीं था। गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में महंगी घड़ियों, मोबाइल फोन और ज्वेलरी की दुकानों की पहले रेकी करते थे। इसके बाद वारदात को अंजाम देते थे।



पुलिस ने बताया कि चोरी के दौरान बदमाश दुकान के सामने पर्दा या बेडशीट लगा देते थे। इससे बाहर मौजूद लोगों को अंदर की गतिविधियां दिखाई नहीं देती थीं। इसके बाद शटर तोड़कर सामान चोरी किया जाता और आरोपी फरार हो जाते थे।



जांच में कोटा, मध्यप्रदेश के उज्जैन और रतलाम, गुजरात के वडोदरा, केरल के कोच्चि, दिल्ली, पश्चिम बंगाल के आसनसोल और अलीपुरद्वार, महाराष्ट्र के जलगांव, त्रिपुरा और झारखंड के धनबाद समेत कई शहरों में मोबाइल चोरी की वारदातों के सुराग मिलने की बात सामने आई है।



पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने देश के दूसरे शहरों और नेपाल में भी वारदातें की हो सकती हैं। हालांकि, इन सभी घटनाओं में गिरोह की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।



पुलिस रिमांड में खुल सकते हैं कई राज

दोनों आरोपियों को 6 दिन की पुलिस रिमांड मिलने के बाद अब पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की गई 251 घड़ियां कहां रखी गई हैं और उन्हें किसे बेचने की योजना थी।



इसके साथ ही गिरोह के बाकी सदस्यों की भूमिका, वारदात से पहले की रेकी और दूसरे शहरों में हुई चोरी की घटनाओं को लेकर भी पूछताछ की जा सकती है। इस मामले में दो गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि पुलिस जांच में सामने आए बाकी आरोपियों की तलाश कर रही है।



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