जयपुर में बने चार हजार 500 गहनों से दमकेंगे श्रीराम, सीता और रावण: तीन साल में तैयार हुई ज्वैलरी
रामायण के किरदारों के लिए खास डिजाइन
5 नवंबर को रिलीज होने वाली फिल्म रामायण में जयपुर की कुंदन, मीनाकारी, जड़ाऊ और पारंपरिक ज्वैलरी देखने को मिलेगी। फिल्म के आधिकारिक ज्वैलरी पार्टनर ट्राइब आम्रपाली ने अयोध्या, मिथिला और लंका की अलग-अलग पहचान को ध्यान में रखते हुए आभूषण तैयार किए हैं।
इन गहनों में भारतीय आभूषण परंपरा, मंदिर कला और प्राचीन मूर्तिकला का इस्तेमाल किया गया है। हर किरदार की पहचान और उसके व्यक्तित्व के हिसाब से ज्वैलरी डिजाइन की गई है।
तीन साल में तैयार हुए 4500 से ज्यादा गहने
भगवान राम, माता सीता और रावण के लिए 4,500 से ज्यादा आभूषण तैयार किए गए हैं। कंपनी के क्रिएटिव हेड तरंग अरोड़ा के नेतृत्व में डिजाइन टीम ने इस काम को पूरा किया।
5 डिजाइनरों और 45 कुशल कारीगरों की टीम ने 18 महीने रिसर्च और डिजाइनिंग में लगाए। इसके बाद 18 महीने तक आभूषण बनाने का काम चला। यानी पूरी ज्वैलरी तैयार करने में करीब 3 साल लगे।
सीता के 18, राम के 5 और रावण के 28 लुक
माता सीता की सुंदरता और सौम्यता को ध्यान में रखते हुए उनके लिए ज्वैलरी के 18 अलग-अलग लुक तैयार किए गए हैं। भगवान राम के गुरुकुल काल, विवाह प्रस्ताव, विवाह समारोह और राज्याभिषेक जैसे प्रसंगों के लिए 5 रूप डिजाइन किए गए हैं। वहीं रावण के जीवन और व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं को दिखाने के लिए 28 ज्वैलरी लुक तैयार किए गए हैं।
मंदिरों की कला और नौ रत्नों का इस्तेमाल
इन आभूषणों में श्रीलंका और दक्षिण भारत के मंदिरों की नक्काशी से प्रेरणा ली गई है। गहनों में सिंह, बैल और सर्प जैसी आकृतियों के साथ यंत्र, ग्रहों की कक्षाओं और नौ रत्नों का भी इस्तेमाल किया गया है। इस तरह फिल्म के किरदारों की ज्वैलरी को केवल सजावट नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक और कलात्मक पहचान से जोड़ने की कोशिश की गई है।
मुंबई में फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग
हाउस ऑफ आम्रपाली के संस्थापक राजीव अरोड़ा के मुताबिक, 3 नवंबर को मुंबई में फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित होगी। इसमें ट्राइब आम्रपाली के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।
यह खबर क्यों जरूरी है?
जयपुर की पारंपरिक ज्वैलरी कला अब बड़े फिल्म प्रोजेक्ट के जरिए देशभर में दिखाई देगी। इससे शहर के कुंदन, मीनाकारी और जड़ाऊ आभूषणों की पहचान को नई जगह मिलेगी। साथ ही स्थानीय डिजाइनरों और कारीगरों के काम को भी बड़े पर्दे पर पहचान मिलेगी।
आगे क्या?
अब फिल्म के रिलीज होने के साथ दर्शक बड़े पर्दे पर जयपुर की पारंपरिक ज्वैलरी कला देख सकेंगे। खास तौर पर श्रीराम, माता सीता और रावण के अलग-अलग लुक में इस्तेमाल किए गए आभूषण चर्चा का विषय बन सकते हैं।