यूपी में जयपुर रियासत की 135 बीघा जमीन! राजस्थान सरकार ने वापस मांगी

Saurabh Mishra | Sept 15, 2026, 16:29 IST
जयपुर रियासत की 135 बीघा जमीन
राजस्थान सरकार ने आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में जयपुर रियासत की संपत्तियां वापस मांगी हैं। आधार बना है 1952 का विलय समझौता। आगरा में 100 बीघा जमीन का मामला सबसे बड़ा है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • आगरा की 100 बीघा जमीन पर अब राजस्थान का दावा।
  • जयपुर रियासत की संपत्ति, 74 साल बाद फिर चर्चा में।
  • 1952 के समझौते ने खोला जमीन विवाद का नया अध्याय।
  • यूपी के चार शहरों में जयपुर रियासत की जमीन का मामला।
  • जयपुर हाउस की 350 प्लॉट वाली कॉलोनी पर अब सवाल।

ज्योति @जयपुर



उत्तर प्रदेश में जयपुर रियासत की पुरानी संपत्तियों को लेकर एक नया मामला सामने आया है। राजस्थान सरकार ने उत्तर प्रदेश के चार शहरों- आगरा, प्रयागराज, वाराणसी और मथुरा में मौजूद जयपुर रियासत की संपत्तियों को राजस्थान के नाम दर्ज कराने की मांग की है। इसके लिए राजस्थान सरकार की ओर से साल 1952 में हुए विलय समझौते का हवाला दिया गया है।



राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की ओर से भेजे गए पत्र के बाद उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से संपत्तियों की स्थिति और पुराने राजस्व अभिलेखों की रिपोर्ट मांगी है। यानी फिलहाल मामला रिकॉर्ड की जांच और संपत्तियों की स्थिति साफ करने के स्तर पर है।



यूपी में जयपुर रियासत की जमीन

सबसे महत्वपूर्ण मामला आगरा का है। राजस्थान सरकार की ओर से दिए गए ब्योरे में आगरा के जयपुर हाउस क्षेत्र में स्थित दो कोठियों के साथ करीब100 बीघा जमीनका जिक्र किया गया है। इसके अलावा सदाशिव मन:कामेश्वर मंदिर और सड़क की एक पट्टी का भी जिक्र किया गया है।



राजस्थान सरकार का तर्क है कि तत्कालीन जयपुर रियासत के भारत में विलय के दौरान हुए समझौते के तहत कुछ संपत्तियों के अधिकार राजस्थान राज्य को मिलने थे। इसी आधार पर इन संपत्तियों को राजस्थान के नाम दर्ज कराने की मांग की गई है।



राजस्थान सरकार ने यूपी से जमीन वापस मांगी

इस पूरे मामले का सबसे अहम आधार1952 का विलय समझौताबताया जा रहा। राजस्थान सरकार ने समझौते केआर्टिकल 6(2)-सीका हवाला दिया है। पत्र में कहा गया है कि राज्य में विलय के समय तय शर्तों के अनुसार पूर्व जयपुर रियासत की कुछ संपत्तियों के अधिकार राजस्थान राज्य को दिए जाने हैं।



अब इस दावे की वास्तविक स्थिति पुराने सरकारी रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।



आगरा के जयपुर हाउस में पहले कट चुके सैकड़ों प्लॉट

आगरा में मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि जयपुर हाउस की जमीन पर वर्षों पहले नगर महापालिका की ओर से कॉलोनी विकसित की जा चुकी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यहां करीब350 प्लॉट काटे गए थे, जिनमें से लगभग 110 प्लॉट सहकारी समिति के माध्यम से आवंटित किए गए थे।



ऐसे में अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन जमीनों का स्वामित्व राजस्थान सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है, उनका वर्तमान रिकॉर्ड क्या है और समय के साथ उनका हस्तांतरण किस तरह हुआ।इसी वजह से नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग पुराने दस्तावेजों की तलाश में जुटे हैं।



जयपुर रियासत की संपत्तियां सिर्फ आगरा में नहीं

राजस्थान सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों में मौजूद संपत्तियों का भी ब्योरा दिया गया है।



  • प्रयागराज:कटरा सवाई जयसिंह में 35.25 एकड़ जमीन
  • वाराणसी:मोहल्ला मान मंदिर में 44 मकान और मानमंदिर घाट
  • मथुरा:करीब 2.16 एकड़ जमीन में जसवंतगंज धर्मशाला और छह कोठरियां
  • आगरा:जयपुर हाउस में दो कोठियां, करीब 100 बीघा जमीन समेत अन्य संपत्तियों का उल्लेख

आगरा में आज भी मिलते हैं जयपुर रियासत के निशान

जयपुर रियासत की मौजूदगी के पुराने निशान आगरा में आज भी दिखाई देते हैं। लोहामंडी थाने के सामने खतैना रोड पर लगे एक संगमरमर के शिलापट्ट पर'महाराजा ऑफ जयपुर'का उल्लेख बताया गया है।इसके अलावा पुराने समय में जयपुर हाउस और प्रताप नगर के बीच ककैया ईंटों से बनी दीवार भी थी। समय के साथ इसका बड़ा हिस्सा खत्म हो चुका है, लेकिन इसके कुछ अवशेष अब भी दिखाई देते हैं।



सरकारी दफ्तरों से भी जुड़ा है जयपुर हाउस का इतिहास

जयपुर हाउस की जमीन का इतिहास आगरा के शहरी विकास से भी जुड़ा हुआ। रिपोर्ट के अनुसार यहां बाद में सरकारी कार्यालय और अन्य निर्माण हुए। मौजूदा एडीए कार्यालय की इमारत की वास्तुकला में राजस्थानी हवेली शैली का प्रभाव बताया जाता है, जबकि जीएसटी भवन में औपनिवेशिक स्थापत्य शैली दिखाई देती है।



अब आगे क्या होगा?

राजस्थान सरकार की मांग के बाद अभी सबसे अहम प्रक्रियापुराने रिकॉर्ड की जांचहै। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने संबंधित जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है। आगरा में नगर निगम, एडीए और राजस्व विभाग से भी दस्तावेज तलाशने को कहा गया।



इसलिए इसे अभी जमीन के तत्काल हस्तांतरण या राजस्थान सरकार को संपत्ति सौंपे जाने की अंतिम कार्रवाई मानना जल्दबाजी होगी। पहले यह पता लगाया जाएगा कि संबंधित संपत्तियों का मूल रिकॉर्ड क्या कहता है, उनका वर्तमान स्वामित्व किसके नाम है और 1952 के विलय समझौते की संबंधित शर्तें इन संपत्तियों पर किस तरह लागू होती हैं।



यानी आने वाले दिनों में पुराने राजस्व रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेज इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।



यह खबरें भी पढ़ें...



जयपुर निगम रिजल्ट: CM भजनलाल-डिप्टी CM ने बचाया गढ़, मंत्री राठौड़ के इलाके में बगावत भारी



जयपुर का अगला मेयर कौन? BJP में कर्णावट-कोठारी समेत 3 दावेदार जीते, ज्योति रेस से बाहर



जयपुर में BJP का मुस्लिम कार्ड फेल: कांग्रेस ही नहीं, निर्दलीयों ने भी रोकी राह



बांधवगढ़ में बाघों के साथ दिखेगा सालों पुराना इतिहास, बफर जोन में बनेगा देश का पहला म्यूजियम







Tags:
  • राजस्थान
  • जयपुर
  • उत्तर प्रदेश
  • नगर निगम
  • मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास