जयपुर में फर्जी बैंक खातों के मामले में 2 आरोपी गिरफ्तार, 12.59 करोड़ की ठगी के मामले दर्ज
जयपुर में फर्जी खातों को साइबर ठगों को देने का मामला सामने आया है। मामले की शुरुआत एक संदिग्ध बैंक खाते की जांच से हुई। मानसरोवर पुलिस को एक म्यूल अकाउंट की जानकारी मिली थी। इसके बाद पुलिस ने खाते से जुड़ी जानकारी जुटाई। पुलिस के अनुसार जांच 27 सितंबर को आगे बढ़ी। यह कार्रवाई ऑपरेशन म्यूल हंटर के तहत की गई। संदिग्ध खातों की जानकारी संबंधित पोर्टल पर जांची जा रही थी।
इसी दौरान राजस्थान स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक का खाता सामने आया।यह खाता मानसरोवर शाखा में संचालित हो रहा था। खाता सचिन सिंह के नाम पर दर्ज था। जांच में पुलिस को खाते के इस्तेमाल की जानकारी मिली। पुलिस के अनुसार सचिन ने खाता सोनू को दिया था। इसके बाद पुलिस ने दोनों युवकों की जांच शुरू की।
मोबाइल से मिले कई सबूत
पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच की। मोबाइल में कई बैंक खातों की जानकारी मिली। इनमें अलग-अलग बैंकों से जुड़े दस्तावेजों के फोटो थे।
पुलिस के अनुसार पासबुक के फोटो भी मिले। इसके अलावा चेकबुक और एटीएम कार्ड के फोटो मिले। सिम कार्ड से जुड़ी जानकारी भी मोबाइल में मिली।
इसके बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया। संदिग्ध बैंक खातों की साइबर पोर्टल पर जांच की गई। जांच में अलग-अलग राज्यों की शिकायतें सामने आईं।पुलिस के अनुसार कुल 34 शिकायतें दर्ज मिलीं। इन शिकायतों में 12,59,20,628 रुपए की राशि दर्ज है। इन शिकायतों और खातों के बीच संबंध की जांच हुई।
दो युवकों पर क्या आरोप
पुलिस ने मामले में सचिन सिंह को गिरफ्तार किया है। सचिन की उम्र 23 साल बताई गई है। वह मूल रूप से आगरा जिले का रहने वाला है। सचिन फतेहपुर सीकरी थाना क्षेत्र के डागर गांव से है।फिलहाल वह मानसरोवर के वरुण पथ पर रहता था। दूसरा आरोपी सोनू मोटवानी है। उसकी उम्र 26 साल बताई गई है।
सोनू मानसरोवर के स्वर्ण पथ का निवासी बताया गया है। पुलिस के अनुसार दोनों की भूमिका अलग-अलग थी। सचिन पर अपने नाम से खाते खुलवाने का आरोप है। इन खातों को आगे उपलब्ध कराने की बात सामने आई। सोनू पर खातों को साइबर ठगों तक पहुंचाने का आरोप है। पुलिस अब इस नेटवर्क की आगे जांच कर रही है।
खाते किराए पर देने का खेल
पुलिस की पूछताछ में बड़ा नेटवर्क सामने आया। आरोपियों ने अपने नाम से खाते खुलवाए थे। कुछ खाते उनके साथियों के नाम से भी थे। पुलिस के अनुसार ये खाते किराए पर दिए जाते थे। इसके बाद खाते साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते थे। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम भेजने में होता है। रकम आने के बाद उसे आगे ट्रांसफर किया जाता है। खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों की भूमिका भी अहम होती है। पुलिस अब इस पूरी कड़ी की जांच कर रही है।
34 शिकायतों ने बढ़ाई जांच
जांच में सामने आई 34 शिकायतें महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। इन शिकायतों का संबंध अलग-अलग राज्यों से बताया गया है। कुल रकम 12.59 करोड़ रुपए से ज्यादा बताई गई है।
हालांकि यह पूरी रकम आरोपियों ने ठगी की है। ऐसा निष्कर्ष जांच पूरी होने से पहले नहीं निकाला जा सकता। पुलिस फिलहाल खातों और शिकायतों के बीच संबंध जांच रही है। यह भी देखा जा रहा है कि खाते कब इस्तेमाल हुए। किसने रकम भेजी और किसने रकम निकाली। किन लोगों ने इन खातों को आगे उपलब्ध कराया।
नेटवर्क की तलाश जारी
मानसरोवर पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। अब पुलिस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश करेगी। बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि कितने खाते थे। इन खातों से कितनी रकम का लेनदेन हुआ। किन राज्यों में दर्ज शिकायतों से इनका संबंध है।
साइबर अपराध में ऐसे खातों का इस्तेमाल चुनौती बनता है। खाताधारक और वास्तविक ठग अलग-अलग हो सकते हैं। इस वजह से जांच में डिजिटल लेनदेन अहम होता है। पुलिस अब मोबाइल और बैंक रिकॉर्ड की पड़ताल करेगी।इसके आधार पर अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश होगी।