यूडी टैक्स जमा नहीं करने पर रमाडा और मैरियट होटल सील, कुछ ही समय बाद फिर खोला
News In Short
- जयपुर नगर निगम ने यूडी टैक्स न जमा करने पर दो बड़े होटलों पर कार्रवाई की।
- जयपुर में होटल मैरियट और होटल रमाडा की संपत्तियां सील कर दी गईं।
- मैरियट होटल पर 5.97 करोड़ और रमाडा होटल पर 1.36 करोड़ का बकाया।
- वर्ष 2007 से लंबित टैक्स जमा होने के बाद संपत्तियां फिर से खोल दी गईं।
- जयपुर में बकाया यूडी टैक्स के लिए बहुत कारोबारियों को दिए गए हैं नोटिस।
News In Detail
राजस्थान में जयपुर नगर निगम ने यूडी टैक्स जमा नहीं करने पर शहर के दो प्रमुख होटल मैरियट और रमाडा समूहों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। दोनों होटल के कुछ हिस्से जेडीए सील कर दिए थे। इस मामले के 2 घंटे बाद होटल मैनेजमेंट ने बकाया टैक्स जमा करा दिया। टैक्स जमा होने के बाद निगम ने सील की गई संपत्तियों को खोल दिया।
पहले मैरियट को किया सील
जयपुर में मालवीय नगर जोन के तहत सोमवार को नगर निगम की रेवेन्यू टीम जवाहर सर्किल के पास स्थित होटल मैरियट पहुंची। इस होटल पर 5.97 करोड़ रुपये का बकाया टैक्स था। टीम ने होटल के बाहर स्थित लग्जरी कार शोरूम और एक रेस्टोरेंट को सील कर दिया।
फिर होटल रमाडा पर एक्शन
इसी प्रकार नगर निगम की टीम ने राजापार्क स्थित होटल रमाडा पर भी एक्शन किया। इस होटल पर 1.36 करोड़ रुपये का यूडी टैक्स बकाया था। इसके कारण निगम ने होटल की कुछ संपत्तियों को सील कर दिया।
टैक्स जमा होने पर खुली सील संपत्ति
मालवीय नगर जोन के उपायुक्त मुकुट सिंह ने बताया कि होटल मैरियट और होटल रमाडा के प्रबंधन ने लगभग 2 घंटे बाद निगम कार्यालय पहुंचकर बकाया टैक्स जमा किया। इसके बाद इन दोनों होटल ग्रुप की सील की गई संपत्तियों को फिर से खोल दिया गया।
19 साल पुराना बकाया टैक्स
राजस्व अधिकारी पवन मीणा के अनुसार मैरियट होटल के बाहर स्थित कार शोरूम और रेस्टोरेंट का टैक्स 2007 से बकाया था। बार-बार नोटिस भेजने के बावजूद होटल प्रबंधन ने टैक्स नहीं जमा किया। जब संपत्तियों को सील किया गया तब जाकर टैक्स का भुगतान किया गया।
इसी प्रकार होटल रमाडा के मामले में भी लंबे समय से टैक्स को लेकर विवाद था। होटल प्रबंधन का कहना था कि टैक्स औद्योगिक दरों पर लिया जाए, जबकि नगर निगम ने इसे कॉमर्शियल दर पर लिया था। इस होटल का टैक्स भी 2007 से बकाया था।
यह है यूडी टैक्स
यूडी टैक्स वह टैक्स है, जो नगरीय निकाय क्षेत्रों में स्थित अचल संपत्तियों पर हर साल वसूला जाता है। यह टैक्स नगर निगम के रेवेन्यू का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके द्वारा प्राप्त राशि से सड़क, सीवरेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं का रख-रखाव और विकास किया जाता है।
आवासीय भूखंडों से यह टैक्स 300 वर्गमीटर से बड़े भूखंडों पर लिया जाता है, जबकि कॉमर्शियल संपत्तियों जैसे होटल, शिक्षण संस्थान, कोचिंग सेंटर, हॉस्पिटल और अन्य संस्थाओं से इसे अलग-अलग दरों पर लिया जाता है।
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