जयपुर जिला परिषद चुनाव: 67 साल में 10 जिला प्रमुख, सिर्फ रामचरण बोहरा ही पहुंचे संसद तक
जयपुर जिला परिषद चुनाव पर सबकी नजर है। यह चुनाव ग्रामीण राजनीति में नए नेतृत्व की परीक्षा होंगे। जयपुर जिला परिषद के 67 साल के इतिहास में 10 जिला प्रमुख बन चुके हैं।
इन 10 जिला प्रमुख में राम चरण बोहरा ही ऐसे नेता है जो राजनीति में आगे बढ़ पाए है। बोहरा ही लोकसभा तक का रास्ता तय कर पाए। इसके अलावा पूर्व जिला प्रमुख हजारी लाल नागर ने विधानसभा चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
जिला प्रमुख से सांसद बने रामचरण बोहरा
रामचरण बोहरा फरवरी 1995 से फरवरी 2000 तक जयपुर जिला प्रमुख रहे। इसके बाद उन्होंने संसदीय राजनीति में कदम रखा। वे 2014 और 2019 में जयपुर शहर सीट से सांसद चुने गए।
बोहरा क्यों मानते हैं पंचायत को पाठशाला
बोहरा के मुताबिक, पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण नेतृत्व तैयार करने का अहम मंच हैं। यहां जनप्रतिनिधि गांवों की समस्याएं करीब से समझते हैं। वे विकास योजनाओं और बजट पर काम करते हैं। अधिकारियों के साथ तालमेल बनाना भी यहीं सीखा जाता है। बोहरा का कहना है कि यही अनुभव आगे की राजनीति में काम आता है।
2021 में क्रॉस वोटिंग ने पलटा खेल
2021 में कांग्रेस और भाजपा के बीच दिलचस्प मुकाबला हुआ था। रमा देवी चौपड़ा वार्ड 17 से कांग्रेस टिकट पर सदस्य चुनी गई थीं। जिला प्रमुख के चुनाव से पहले वे भाजपा खेमे में चली गईं। उस समय 51 सदस्यीय जिला परिषद में कांग्रेस के 27 सदस्य थे। यानी बहुमत कांग्रेस के पास था। फिर भी जिला प्रमुख की कुर्सी भाजपा के हाथ चली गई।
जिला परिषद क्रॉस वोटिंग पर कांग्रेस का एक्शन
इस घटनाक्रम ने जिला परिषद क्रॉस वोटिंग की भूमिका सबके सामने ला दी। कांग्रेस ने रमा देवी को छह साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। रमा देवी 6 सितंबर 2021 से जिला प्रमुख के पद पर हैं। मौजूदा कार्यकाल में वे निवर्तमान जिला प्रमुख हैं।
जयपुर जिला परिषद चुनाव में किसकी परीक्षा?
आगामी जयपुर जिला परिषद चुनाव में 2021 का मामला फिर उठ सकता है। कांग्रेस के सामने पिछली हार के बाद स्थिति मजबूत करने की चुनौती होगी। भाजपा के लिए ग्रामीण इलाकों में समर्थन बनाए रखना अहम रहेगा।
1959 में नागौर से शुरू हुआ पंचायती राज
राजस्थान पंचायती राज की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को नागौर से हुई थी। इसी साल राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम लागू हुआ। बाद में 73वें संविधान संशोधन के अनुरूप नया कानून आया। यह राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 था।
गांवों के विकास के लिए अहम है जिला परिषद
जिला परिषद गांव के विकास के लिए अहम रोल अदा करती है। यह गांवों तक योजनाएं पहुंचाती है और उन पर निगरानी रखती है। सड़क, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य इसके प्रमुख क्षेत्र हैं। कृषि और रोजगार से जुड़ी योजनाएं भी इसके दायरे में आती हैं।
परिषद पंचायत समितियों के कामकाज की समीक्षा भी करती है। विकास कार्यों की प्राथमिकताएं यही तय करती है। बजट और संसाधनों के उपयोग पर इसकी नजर रहती है। गांवों की समस्याएं सरकार तक पहुंचाना भी इसका काम है।
सड़क, पानी और रोजगार पर उठेंगे सवाल
इस बार सिर्फ सियासी समीकरण ही नहीं गिने जाएंगे। विकास कार्यों का हिसाब भी मांगा जा सकता है। ग्रामीण सड़कें, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल बड़े मुद्दे बन सकते हैं। रोजगार योजनाओं का लाभ भी मतदाताओं की कसौटी पर होगा।
क्या जिला प्रमुख के कार्यकाल का हिसाब मिलेगा?
कार्यकाल में कितने विकास कार्य पूरे हुए? सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक कितना पहुंचा? ग्रामीण समस्याओं पर कितनी कार्रवाई हुई? ये सवाल भी चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
राजस्थान पंचायत चुनाव चार चरणों में कराया जा रहा है। इसलिए जिला परिषद की सियासत पर पूरे कार्यक्रम में नजर रहेगी। जयपुर जिला परिषद का इतिहास साफ है। यह पद आगे बढ़ने की सीढ़ी रहा है। अब देखना होगा कि विकास, स्थानीय मुद्दे और समीकरण क्या रंग दिखाते हैं।
FAQs
- जयपुर जिला परिषद चुनाव कब और कैसे होंगे?
जयपुर जिला परिषद चुनाव चार चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। चुनाव की तारीखें और विस्तृत कार्यक्रम अभी तक घोषित नहीं किए गए हैं। - जयपुर जिला परिषद का प्रमुख कार्य क्या है?
जयपुर जिला परिषद गाँवों के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाती है, जैसे सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार की योजनाओं का कार्यान्वयन और निगरानी। - जयपुर जिला परिषद चुनाव में पिछली बार क्रॉस वोटिंग से क्या हुआ था?
2021 में क्रॉस वोटिंग के कारण कांग्रेस को अपेक्षित बहुमत के बावजूद जिला प्रमुख की कुर्सी भाजपा के पास गंवानी पड़ी थी, जिससे चुनावी रणनीतियों में बदलाव आया।