विरासत को बचाने राजस्थान हाईकोर्ट का दखल, जयपुर के वर्ल्ड हेरिटेज स्टेटस पर संकट
जयपुर के ऐतिहासिक चारदीवारी क्षेत्र में बेतहाशा अवैध निर्माणों, बिना अनुमति हो रही तोड़फोड़ और प्रशासनिक लापरवाही के कारण विश्व धरोहर के अस्तित्व पर गहराते संकट को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। समाचार पत्रों में प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने गुलाबी नगर की वैश्विक पहचान के मुद्दे पर प्रसंज्ञान लेकर स्व:प्रेरित जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश दिया है।
अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि दिसंबर 2026 से पहले प्रभावी और समयबद्ध सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो जयपुर अपने इस प्रतिष्ठित यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट के टैग को गंवा सकता है।
कोर्ट ने कहा है कि साल 2019 में जयपुर की अनूठी शहरी नियोजन, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत के लिए इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया था। लेकिन,सात वर्षों के भीतर स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। कोर्ट ने वैश्विक धरोहर के विनाश के लिए मुख्य कारण भी बताए हैं:—
अवैध निर्माण व ऐतिहासिक संपत्तियों का विनाश
चारदीवारी के कोर और बफर जोन में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण,अनधिकृत बदलाव और अतिक्रमण हो रहे हैं। पारंपरिक हवेलियों और ऐतिहासिक परिसरों को नियमों को ताक पर रखकर तोड़ा जा रहा है और उनकी जगह आधुनिक बेमेल व्यावसायिक इमारतें खड़ी की जा रही हैं।
2020 के नियमों का निष्प्रभावी क्रियान्वयन
विरासत के संरक्षण के लिए जयपुर (चारदीवारी क्षेत्र) हेरिटेज संरक्षण और सुरक्षा नियम-2020 लागू किए थे। लेकिन,इनका जमीनी स्तर पर पालन कराने में संबंधित विभाग पूरी तरह फेल रहे हैं।
हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट की अनदेखी
बिना किसी विशेषज्ञ मूल्यांकन या हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट के धड़ल्ले से निर्माण मंजूरियां दी जा रही हैं। विभिन्न सरकारी निकायों के बीच समन्वय की भारी कमी है।
यूनेस्को (UNESCO) की चेतावनियां
जुलाई 2025 में पेरिस में आयोजित विश्व धरोहर समिति की 47वीं बैठक में यूनेस्को ने चारदीवारी में ऐतिहासिक मकानों को ढहाने और हेरिटेज सेल में स्थायी कर्मचारियों की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी।
दुनिया के अन्य शहरों से सबक
कोर्ट ने चार ऐसे अंतरराष्ट्रीय स्थलों का उल्लेख किया जिन्हें अनियंत्रित निर्माण और विरासत खोने के कारण यूनेस्को सूची से हटाया गया या खतरे की सूची में डाला गया है। यह अरबियन ओरिक्स अभयारण्य,ड्रेसडेन एल्बे वैली (जर्मनी), जॉर्जिया के ऐतिहासिक स्मारक (म्त्स्खेता), और लिवरपूल (यूके)।
यूनेस्को टैग छिनने से अर्थव्यवस्था और संस्कृति को लगेगा गहरा झटका
कोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा खोने से जयपुर की अर्थव्यवस्था,वैश्विक प्रतिष्ठा और सांस्कृतिक गौरव को अभूतपूर्व झटका लगेगा।
कोर्ट ने चेतावनी दी कि धरोहर का यह दर्जा केवल एक मानद उपाधि नहीं है,बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देता है और भारी राजस्व व रोजगार उत्पन्न करता है।
तत्काल नहीं चेते हो झेलने होंगे दुष्परिणाम
अनियंत्रित शहरी फैलाव और निर्माणों के कारण ड्रेसडेन एल्बे वैली,अरबियन ओरिक्स अभयारण्य और लिवरपूल जैसे वैश्विक उदाहरणों का हवाला देते हुए कोर्ट ने आगाह किया कि यदि दिसंबर 2026 से पहले प्रभावी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए,तो जयपुर को भी ऐसे ही दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
विरासत का संरक्षण संविधानिक जनादेश है,विकल्प नहीं
कोर्ट ने कहा है कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल एक नीतिगत मामला नहीं है बल्कि,एक अनिवार्य संविधानिक कर्तव्य है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 और अनुच्छेद 51A(f) राज्य को ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा करने के लिए बाध्य करते हैं और नागरिकों को देश की समृद्ध सामासिक संस्कृति का सम्मान करने का निर्देश देते हैं।
एक बार नष्ट हुआ तो नहीं बनेगा दुबारा
कोर्ट ने माना कि प्रशासनिक उदासीनता सीधे तौर पर सार्वजनिक विश्वास के सिद्धांत और अनुच्छेद 21 के तहत सांस्कृतिक विरासत के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है।
एक बार नष्ट हो चुकी ऐतिहासिक स्थापत्य कला को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। इसलिए जयपुर और देश की पहचान की रक्षा के लिए मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू करना और जवाबदेही तय करना बेहद जरुरी है।
इनसे मांगा है जवाब
1.राज्य सरकार (मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, जयपुर के माध्यम से)
2.प्रमुख शासन सचिव,नगरीय विकास एवं आवासन (UDH) विभाग, जयपुर
3.निदेशक,स्वायत्त शासन विभाग (LSG), जयपुर
4.निदेशक,पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर
5.आयुक्त,जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA), जयपुर
6.आयुक्त,नगर निगम ग्रेटर, जयपुर
7.आयुक्त,नगर निगम हेरिटेज, जयपुर
8.हेरिटेज सेल,नगर निगम जयपुर (लालकोठी, टोंक रोड, जयपुर)
9.अतिरिक्त मुख्य सचिव,कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग, जयपुर
10.सचिव,देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार, जयपुर
अदालती निर्देश
दो सप्ताह में सर्वे रिपोर्ट
जेडीए (JDA) और दोनों नगर निगमों (ग्रेटर व हेरिटेज) को निर्देश दिया गया है कि वे चारदीवारी क्षेत्र में हुए सभी अवैध व अनियंत्रित निर्माणों का तुरंत सर्वे करें और दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
चार सप्ताह में 11 बिंदुओं पर देना होगा हलफनामा
- वर्तमान में लागू कानूनी ढांचे और उनकी निगरानी की स्थिति।
- निर्माण स्वीकृतियां देने से पहले किए गए हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट या विशेषज्ञ मूल्यांकन का रिकॉर्ड।
- हेरिटेज जोन में चल रही व पूर्ण हो चुकी निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी की प्रक्रिया और मापदंड।
- खतरे में पड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों के चिह्नीकरण व मैपिंग का स्टेटस।
- पिछले 5 वर्षों में हुए अवैध निर्माणों और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई (सीलिंग, तोड़फोड़, प्रॉसिक्यूशन) का ब्योरा।
- विभिन्न विभागों (निगम, जेडीए, पुरातत्व विभाग) के बीच आपसी समन्वय की व्यवस्था।
- बफर जोन, ऊंचाई सीमा और जोनिंग नियमों के पालन की स्थिति।
- विकास और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की योजना।
- जनता और विशेषज्ञों की आपत्तियों और सुझावों पर की गई कार्रवाई का ब्योरा।
- संरक्षण नियमों को लागू करने में हुई प्रशासनिक विफलता के कारण।
- दोषी या लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उन पर की गई कार्रवाई का विवरण।
सोशल ऑडिट का सुझाव
मध्य प्रदेश नगर निगम अधिनियम का उदाहरण देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को सुझाव दिया कि शहरी नियोजन और विरासत संरक्षण में आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सोशल ऑडिट का वैधानिक प्रावधान करने पर विचार किया जाए।
जनता से सुझाव की अपील
अदालत ने इस मामले में एडवोकेट संदीप पाठक, युवराज सामंत,मधुसूदन सिंह राजपुरोहित और अनिरुद्ध माथुर को न्याय मित्र नियुक्त किया है।