देश के लिए 3 युद्ध लड़ने वाले सैनिक के साथ धोखाधड़ी, माफियाओं से लड़ रहे है जंग
समझें क्या है पूरा मामला
- जैसलमेर में रिटायर्ड कैप्टन चुन्नीलाल की जमीन पर फर्जी कब्जे का मामला सामने आया।
- तीन युद्ध लड़ चुके कैप्टन की 25 बीघा जमीन फर्जी दस्तावेजों से हड़पने का आरोप।
- बेटे की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।
- फर्जी हस्ताक्षर, आधार कार्ड और दस्तावेजों से रजिस्ट्री कराने का आरोप।
- पुलिस रजिस्ट्री, पहचान दस्तावेज और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
जैसलमेर के मोहनगढ़ में रिटायर्ड कैप्टन चुन्नीलाल की जमीन पर फर्जी दस्तावेजों से कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने तीन युद्धों में देश की सेवा की थी। 24 साल पहले उन्हें यह जमीन आवंटित हुई थी। बेटे की शिकायत पर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है।
देश की सीमाओं पर तीन जंग लड़ने वाले सेवानिवृत्त कैप्टन चुन्नीलाल अब अपनी ही जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। रिटायर्ड कैप्टन ने 1962, 1965 और 1971 के युद्ध में दुश्मनों का सामना किया था।
चुन्नीलाल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रहने वाले हैं। करीब 24 साल पहले जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ क्षेत्र में उन्हें कृषि भूमि आवंटित हुई थी।
उनका आरोप है कि इस कृषि भूमि की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री कराकर म्यूटेशन भी करा दिया गया। बेटे हनुमान सिंह की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पड़ोसी को सौंपी थी जमीन की निगरानी
सरकार ने 2002 में मोहनगढ़ में उन्हें 25 बीघा कृषि भूमि आवंटित की थी। उस समय पानी और अन्य सुविधाओं की कमी के कारण वे वापस हिमाचल चले गए।
उन्होंने जमीन की निगरानी का जिम्मा पड़ोस के ही एक किसान को सौंप दिया था। जमीन लंबे समय तक खाली पड़ी रही। हाल ही में उन्होंने अपनी जमीन की जानकारी लेने के लिए एक व्यक्ति को भेजा था।
तब पता चला कि जमीन का कब्जा किसी अन्य व्यक्ति के नाम हो चुका है। यह जानकारी मिलने के बाद चुन्नीलाल खुद मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी जुटाई, तब पूरा मामला खुलकर सामने आया।
नकली हस्ताक्षर और आधार कार्ड से हुआ फर्जीवाड़ा
मोहनलाल, धन्नाराम, करणाराम और ओमप्रकाश के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार पिछले महीने 16 जून को किसी अन्य व्यक्ति को कैप्टन चुन्नीलाल बताकर उप-पंजीयक कार्यालय में पेश किया गया।
आरोप है कि फर्जी फोटो, नकली हस्ताक्षर और आधार कार्ड सहित फर्जी दस्तावेज भी जमा कराए गए। इसके बाद 22 जून को मोहनगढ़ उपनिवेशन तहसील में जमीन का म्यूटेशन भी दर्ज हो गया।
कैप्टन चुन्नीलाल ने जताई पीड़ा
कैप्टन चुन्नीलाल ने कहा कि उन्होंने तीन युद्धों में देश की सेवा की, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि एक दिन अपनी ही जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों और पुलिस के चक्कर लगाने पड़ेंगे।
उनका कहना है कि अगर रजिस्ट्री के दौरान पहचान और दस्तावेजों का सही सत्यापन किया जाता, तो यह कथित फर्जीवाड़ा संभव नहीं होता।और लोगों की जमीनें भी निशाने पर होने की आशंका
कोतवाली थाना अधिकारी ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस – Bharatiya Nyaya Sanhita) की धारा 318(4), 336(3), 338, 340 और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मोहनगढ़ क्षेत्र की कई कृषि जमीनों का रिकॉर्ड अब भी ऑफलाइन है। आशंका है कि कुछ सक्रिय लोग ऐसे भूखंडों को निशाना बना रहे हैं, जिनके मालिक लंबे समय से बाहर रह रहे हैं।
ऐसे मामलों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। अब पुलिस रजिस्ट्री, पहचान संबंधी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि इस कथित फर्जी रजिस्ट्री के पीछे कौन लोग हैं।
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