डंपिंग यार्ड में खुले में बिखरे गोवंश के शव, लोगों में भारी आक्रोश
News In Short
- जैसलमेर के डंपिंग यार्ड में गोवंश के शव खुले में बिखरे मिले, लोगों में आक्रोश।
- नगरपरिषद प्रशासन की लापरवाही सामने आने के बाद, ठेकेदार को नोटिस जारी।
- मृत पशुओं को उठाने का ठेका बाड़मेर के गोपाराम को 18 लाख रुपए में दिया गया था।
- नगरपरिषद ने कहा- संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ठेका निरस्त व धरोहर राशि जब्त की जाएगी।
- जेसीबी मशीन से गड्ढे खुदवाकर शवों को दफनाने का काम शुरू करवाया गया।
News In Detail
जैसलमेर के पास बड़ाबाग क्षेत्र स्थित नगरपरिषद के डंपिंग यार्ड में गोवंश के शवों को खुले में बिखरा छोड़ने का हृदय विदारक मामला सामने आया है। बड़ी संख्या में मृत गोवंश के शव अस्त-व्यस्त हालत में पड़े दिखाई दिए। इस दृश्य ने न केवल आमजन की भावनाओं को आहत किया, बल्कि नगरपरिषद प्रशासन, मृत पशु उठाने वाले ठेकेदार और संबंधित जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए।
स्थानीय बाशिंदों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नगरपरिषद की कार्यशैली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि एक ओर गोसंरक्षण और स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर मृत गोवंश के सम्मानजनक निस्तारण तक की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।
भीषण गर्मी में खुले में पड़े शवों से दुर्गंध फैलने और संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। स्थानीय लोगों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ अमानवीय संवेदनहीनता करार दिया है।
हरकत में आया प्रशासन, ठेकेदार को नोटिस
मामले के तूल पकड़ने के बाद नगरपरिषद प्रशासन हरकत में आया। परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढा ने मृत पशुओं के शव उठाने वाले ठेकेदार को नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार मृत पशुओं का समयबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए था, लेकिन इसमें गंभीर अनियमितता सामने आई है।
परिषद ने ठेकेदार को निर्देश दिए हैं कि वह नोटिस के संबंध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे तथा भविष्य में ऐसी लापरवाही न बरते। नगरपरिषद प्रशासन की तरफ से नोटिस जारी होने के बाद ठेकेदार की ओर से आनन-फानन में मशीनरी और वाहन मौके पर लगाए गए।
जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर शवों को दफनाया गया
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने और जन आक्रोश बढ़ने के बाद नगर परिषद की जन स्वास्थ्य शाखा और स्वच्छता निरीक्षक की टीम ठेकेदार के साथ तुरंत मौके पर पहुंची।
आयुक्त के निर्देश पर डंपिंग यार्ड में तुरंत जेसीबी मशीनें लगवाई गईं। जेसीबी के माध्यम से बड़े और गहरे गड्ढे खुदवाकर खुले में पड़े सभी गोवंश व अन्य मृत पशुओं के शवों को मिट्टी डलवाकर ससम्मान दफनाया गया, जिससे क्षेत्र में फैल रही बदबू और दूषित वातावरण से लोगों को राहत मिल सके।
जिला कलक्टर ने भी लिया संज्ञान
जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल ने बताया कि बड़ाबाग डंपिंग यार्ड में मृत गोवंश को खुले में फेंके जाने का मामला जानकारी में आने के बाद संबंधित अधिकारियों से बात की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस मामले में ठेकेदार की गलती रही है, उसे नोटिस जारी किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह संवेदनशील मामला है और नगरपरिषद अधिकारियों की भी मॉनिटरिंग में कमी रही है। उन्हें निर्देशित किया गया है कि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
ठेका निरस्त और धरोहर राशि जब्त करने की चेतावनी
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए मृत पशु उठाने, चमड़ा और हड्डियों के ठेके का कार्य बाड़मेर जिले के गोपाराम को लगभग 18 लाख रुपए में दिया गया है। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर जारी नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो ठेका रद्द कर धरोहर राशि जब्त कर ली जाएगी।
आयुक्त लजपाल सिंह सोढा ने कहा कि डंपिंग यार्ड में मृत पशुओं को खुले में फेंकने की लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि ठेकेदार का स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया गया तो ठेका निरस्त कर उसे ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई की जाएगी और धरोहर राशि जब्त होगी।
पशुपालन विभाग का क्या कहना है?
डंपिंग यार्ड में मृत मिले पशुओं के बारे में नगरपरिषद प्रशासन का कहना है कि सभी पशु स्वाभाविक रूप से मृत हुए हैं। यह केवल शहर के ही नहीं बल्कि गांव के भी मृत पशु हैं, इसलिए उनकी संख्या अधिक दिख रही है।
पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. उमेश वरगंटीवार का कहना है कि ये सभी पशु एक दिन के नहीं हैं। एक माह तक करीब चार-पांच पशु प्रति दिन लाए गए हैं। यहां लाए गए मृत पशुओं में जैसलमेर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भी पशु शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पशुओं में कोई बीमारी नहीं फैली है और गोवंश की मौतें प्राकृतिक व स्वाभाविक या अन्य शारीरिक समस्याओं से हुई हैं।
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