जैसलमेर: शाहगढ़ में केंद्र सरकार की कैराकल संरक्षण की योजना, दो को लगाए गए रेडियो कॉलर

Jageshwar prasad | Oct 05, 2026, 18:07 IST
जैसलमेर के शाहगढ़ क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीव कैराकल की मौजूदगी मिली है। केंद्र सरकार इसके संरक्षण के लिए योजना बना रही है।
केंद्र सरकार शाहगढ़ में कैराकल के संरक्षण के लिए योजनाओं पर काम कर रही है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव क्षेत्र में विकास के लिए नवंबर-दिसंबर में दौरा करेंगे। कैराकल की मौजूदगी से क्षेत्र की जैव विविधता और स्थानीय समुदायों की भागीदारी अहम है। संरक्षण नीति में पारंपरिक ज्ञान को शामिल करने की पहल से स्थानीय समुदायों को सशक्त किया जाएगा।

थार रेगिस्तान (Thar Desert) में दुर्लभ और संकटग्रस्त वन्यजीव कैराकल के संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार गंभीर नजर आ रही है। जिले के शाहगढ़ क्षेत्र में कैराकल की मौजूदगी के बाद इसके संरक्षण और अध्ययन के प्रयास किए जा रहे हैं।



केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने संकेत दिया कि शाहगढ़ क्षेत्र में कैराकल के संरक्षण के साथ क्षेत्रीय विकास को लेकर विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। इससे इस इलाके को नई पहचान मिल सकती है।



मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि वे नवंबर-दिसंबर में शाहगढ़ आएंगे। क्षेत्र को विकसित करने की कई योजनाओं पर काम जारी है। खास बात है कि इनमें थार की स्थानीय कम्युनिटीज को साथ लेकर आगे बढ़ने पर जोर रहेगा।



थार की स्थानीय समुदायों के पास हजारों वर्षों से क्षेत्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परंपराओं के साथ प्रकृति के साथ जुड़कर जीवन जीने का अनुभव और ज्ञान मौजूद है। इसी स्थानीय विजडम और परंपराओं को साथ लेकर संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ना होगा। इससे संरक्षण को जनभागीदारी का समर्थन मिलेगा।




क्यों अहम है कैराकल?

शाहगढ़ क्षेत्र में कैराकल की मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कैराकल दुर्लभ जंगली बिल्ली की प्रजाति है। इसकी संख्या लंबे समय से गिर रही है।



शाहगढ़ के सीमावर्ती और रेगिस्तानी क्षेत्र में कैराकल की गतिविधियां सामने आने के बाद वन विभाग और विशेषज्ञों ने इसके संरक्षण और व्यवहार को समझने के लिए निगरानी शुरू की। यह प्रजाति पहले इस इलाके में कम देखी जाती थी।




रेडियो कॉलर से हो रही निगरानी

अध्ययन के तहत क्षेत्र में पाए गए दो कैराकल को रेडियो कॉलर लगाए गए हैं। रेडियो कॉलर से इनकी आवाजाही, आवास क्षेत्र, व्यवहार और गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।



इससे वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों को कैराकल के प्राकृतिक पर्यावास और उनके संरक्षण की जरूरतों को समझने में मदद मिल रही है। मंत्री का शाहगढ़ दौरा इस अभियान को नई दिशा देगा। अगर स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ कैराकल संरक्षण की योजना तैयार होती है तो यह थार में वन्यजीव संरक्षण का नया मॉडल बनेगा।




स्थानीय लोगों की भूमिका

कैराकल संरक्षण (Caracal conservation) में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। उसके प्राकृतिक पर्यावास और आसपास के लोगों की भूमिका अहम है।



ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति से उनके सदियों पुराने जुड़ाव को संरक्षण नीति का हिस्सा बनाने की पहल जैसलमेर (Jaisalmer) के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे संरक्षण को मजबूती मिलेगी।




क्यों अहम है यह पहल?

थार रेगिस्तान की जैव विविधता अपने आप में अनोखी है। यहां कई दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। कैराकल इनमें से एक है। इसके संरक्षण से पूरे इकोसिस्टम को फायदा होगा।



स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलने से योजना को सफल बनाया जा सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। अब देखना जरूरी है कि यह योजना कैसे लागू होती है।

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