जल जीवन मिशन: इंजीनियर के 30 से ज्यादा बैंक खाते, तनख्वाह से 253 फीसदी ज्यादा प्रॉपर्टी

Ashish Bhardwaj | Oct 10, 2026, 12:45 IST
अनिल कच्छावा के पास 30 से ज्यादा बैंक खाते
अनिल कच्छावा के बैंक खातों की संख्या 30 से अधिक है, और उन्होंने करोड़ों की एफडी भी जमा की है। एसीबी ने उनकी संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच शुरू कर दी है। जल जीवन मिशन के नाम पर रिश्वत की मांग करने के चलते उन्हें रंगे हाथ पकड़ा गया। उन्होंने 50 लाख का लोन लिया था, जिसे उन्होंने नौ महीने में चुका भी दिया।

जल जीवन मिशन (जेजेएम) में सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर (एसई) अनिल कच्छावा की बैंक डिटेल्स ने जांच में जुटे ACB अधिकारियों को भी चौंका दिया है। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर अनिल कच्छावा पर अब आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज हुआ है। एसीबी की जांच में उनके और परिवार से जुड़े 30 से ज्यादा बैंक खाते मिले हैं। करोड़ों की एफडी और कई संपत्तियों का भी पता चला है।



30 से ज्यादा बैंक खाते, करोड़ों की एफडी

एसीबी (ACB – Anti Corruption Bureau) के मुताबिक कच्छावा, उनकी पत्नी और परिजनों के नाम 30 से ज्यादा बैंक खाते हैं। इन खातों में जमा रकम का भी पता चला है। परिवार के नाम 2 करोड़ रुपए से ज्यादा की एफडी (FD – Fixed Deposit) भी मिली है।



37 साल की नौकरी में 5.84 करोड़

जांच एजेंसी के अनुसार कच्छावा के पास आय से 253 प्रतिशत ज्यादा संपत्ति है। करीब 37 साल की नौकरी में उनकी कुल संपत्ति लगभग 5.84 करोड़ रुपए आंकी गई है। एसीबी राजस्थान (ACB Rajasthan) अब बैंक खातों, संपत्तियों और परिवार की आय से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है।



5 लाख मांगे, 2 लाख लेते पकड़े

मामला जल जीवन मिशन में हुए काम के बिल पास करने से जुड़ा है। जलदाय विभाग ने 2021-22 में एक कंपनी से काम करवाया था। आरोप है कि अनिल कच्छावा (Anil Kachhawa) ने भुगतान के बिल लंबे समय तक अटकाए रखे। बिल पास करने के बदले उन्होंने 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी।



3 लाख पर बनी थी बात

शिकायत मिलने पर एसीबी ने दिसंबर 2024 में कार्रवाई की योजना बनाई। आरोप है कि बातचीत में कच्छावा 3 लाख रुपए लेने पर राजी हो गए। 17 दिसंबर 2024 को वे 2 लाख रुपए की पहली किस्त लेते रंगे हाथ पकड़े गए। तब वे डूंगरपुर में तैनात थे।



कोटा के घर से 9.22 लाख नकद

गिरफ्तारी के बाद एसीबी ने कोटा के मकान और डूंगरपुर में उनके ठहरने की जगह पर तलाशी ली। कोटा के घर से 9.22 लाख रुपए नकद मिले। कई अहम दस्तावेज भी बरामद हुए। नकदी के स्रोत पर कच्छावा और उनकी पत्नी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद बैंक खातों और संपत्तियों की विस्तृत एसीबी जांच शुरू हुई।



5.84 करोड़ की संपत्ति, कोटा प्लॉट

जांच में कोटा के राजीव गांधी नगर में एक प्लॉट के दस्तावेज मिले। यह प्लॉट 2,840.64 वर्गफीट का है। इस कोटा प्लॉट की कीमत करीब 1.12 करोड़ रुपए बताई गई है। आरके पुरम में करीब 6 लाख रुपए के एक और प्लॉट का ब्योरा भी सामने आया।



50 लाख का लोन 9 महीने में चुकाया

जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू 50 लाख रुपए का लोन है। एसीबी के मुताबिक कच्छावा ने फरवरी 2020 में कोटा की बैंक ऑफ इंडिया शाखा से यह लोन लिया था। नवंबर 2020 में उन्होंने इसे ब्याज सहित एकमुश्त चुका दिया।



बैंक में कुल 51,40,204 रुपए जमा कराए गए। इसमें 1,40,204 रुपए ब्याज के थे। आम तौर पर ऐसा लोन चुकाने में कई साल लगते हैं। सोचिए, करीब नौ महीने में 51 लाख रुपए एक साथ कहां से आए? एसीबी अब इस लेनदेन को उनकी आय और निवेश से मिलाकर देख रही है।



पत्नी और मां की आय पर सवाल

एसीबी सूत्रों के मुताबिक बैंक खातों और एफडी पर पूछताछ में पत्नी ने अपनी कमाई का आधार बताया। उन्होंने कहा कि उनकी आय ब्यूटी पार्लर के कोर्स से है।




ब्यूटी पार्लर कोर्स का दावा

हालांकि जांच में इस कोर्स से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले। कच्छावा ने अपनी मां की आमदनी और कोटा के मकान के किराए को भी निवेश का स्रोत बताया। एसीबी ने मां के बैंक खाते जांचे और मकान के आकार व इस्तेमाल की जानकारी भी देखी। एजेंसी के मुताबिक बताई गई आय से इतने निवेश की पुष्टि नहीं हुई।




आगे क्या होगा

आय से अधिक संपत्ति का केस दर्ज होने के बाद जांच आगे बढ़ रही है। संपत्तियों का अंतिम आकलन अभी बाकी है। आय के वैध स्रोत और दूसरे लेनदेन की भी पड़ताल होगी। अगर आप सरकारी सेवा में हैं, तो यह मामला बताता है कि हर लेनदेन का हिसाब कभी भी मांगा जा सकता है।



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