30 लाख देकर खुद फर्जी डिग्री से बना डॉक्टर, 18 डॉक्टरों के नकली रजिस्ट्रेशन कराए, SOG ने खोली पोल
राजस्थान के जालोर जिले के रानीवाड़ा स्थित भास्कर हॉस्पिटल के संचालक नानंजीराम चौधरी को लेकर एसओजी की जांच में गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच के मुताबिक, आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर मेडिकल डिग्रियां हासिल कीं और करीब 30 लाख रुपये देकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में रजिस्ट्रेशन करवाया। आरोप है कि इसके बाद उसने एफएमजी परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले 18 डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन कराने में भी भूमिका निभाई। मामले में एसओजी आगे की जांच कर रही है।
8वीं के बाद की डिग्रियां फर्जी होने का आरोप
जांच के अनुसार, नानंजीराम चौधरी ने आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बाद 2015 से अब तक हासिल किए गए उसके कई शैक्षणिक दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए। इनमें आंध्र प्रदेश बोर्ड की 10वीं और 12वीं की अंकतालिकाएं, कानपुर की रामा यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस डिग्री और मुंबई के एक संस्थान का डीजीओ डिप्लोमा प्रमाणपत्र शामिल बताए गए हैं। एसओजी इन दस्तावेजों और उनके आधार पर हुए मेडिकल रजिस्ट्रेशन की जांच कर रही है।
30 लाख रुपये देकर रजिस्ट्रेशन कराने का दावा
एसओजी की जांच में आरोप है कि नानंजीराम ने करीब 30 लाख रुपये देकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। इसके बाद वह कथित तौर पर दलाल के रूप में भी सक्रिय हो गया। उस पर एफएमजी परीक्षा पास नहीं करने वाले 18 डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन कराने का आरोप है। अब एसओजी इन डॉक्टरों के दस्तावेजों और रजिस्ट्रेशन की वैधता की पड़ताल कर रही है।
ओपीडी काउंटर पर पर्चियां काटने से अस्पताल संचालक बनने तक का सफर
दिए गए विवरण के अनुसार, नानंजीराम ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच रानीवाड़ा में एक निजी चिकित्सक के क्लिनिक पर ओपीडी काउंटर में पर्चियां काटने का काम किया। इसके बाद उसने कुछ समय रेडीमेड कपड़ों की दुकान पर काम किया।
- 2014: राजदेव हॉस्पिटल में ओपीडी काउंटर पर काम करने लगा।
- 2015: आरोप है कि उसने राजदेव हॉस्पिटल के मालिक से अस्पताल खरीद लिया।
- 2016: अस्पताल का नाम बदलकर भास्कर हॉस्पिटल कर दिया।
- 2019: अस्पताल में गुजरात के एक स्त्री रोग विशेषज्ञ को नियुक्त किया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, बाद में उसने रानीवाड़ा में 50 बेड का अस्पताल भी संचालित किया और गुजरात के दो डॉक्टरों को ठेके पर नौकरी दी।
2024 में दर्ज हुई थी पहली FIR
दिए गए विवरण के मुताबिक, राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरधर गोपाल ने 6 अक्टूबर 2024 को अशोक नगर थाने में आठ लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। बाद में मामले की जांच एसओजी को सौंप दी गई। जांच के दौरान नानंजीराम चौधरी का नाम सामने आया।
इस मामले में शांतनु कुमार चारण, दीपक चौधरी, देवेंद्र नेहरा, गीता कुमारी, महेश कुमार गुर्जर, सरीमूल मजूमदार, राम किशोर महावर और पंकज यादव के नाम भी सामने आए हैं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें पंकज यादव की गिरफ्तारी हुई थी।
अस्पताल के सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
एसओजी के एडीजी विशाल बंसल के मुताबिक, जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि अस्पताल ने सरकारी चिकित्सा योजनाओं का गलत लाभ तो नहीं उठाया। इसके लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जालोर से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।
CMHO डॉ. भैराराम जानी के अनुसार, अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों को नोटिस भेजे गए हैं। एसओजी ने अस्पताल के दस्तावेज भी मांगे हैं। इसके अलावा, जालोर के चार अस्पताल जांच के दायरे में बताए गए हैं।
आगे क्या?
एसओजी अब नानंजीराम चौधरी की शैक्षणिक डिग्रियों, मेडिकल रजिस्ट्रेशन, कथित तौर पर रजिस्ट्रेशन करवाए गए 18 डॉक्टरों और अस्पताल के कामकाज की जांच कर रही है। सरकारी चिकित्सा योजनाओं में किसी तरह की अनियमितता हुई या नहीं, यह दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट होगा।