जवाहर सर्किल के सब-वे की 20 दुकानें बनीं कबाड़घर: दो बार नीलामी फेल, अब बिजली पर ₹19.97 लाख का नया टेंडर

Raghvendra Singh Rathore | Oct 05, 2026, 19:31 IST
करोड़ों खर्च, दुकानें बंद
जवाहर सर्किल के ₹44.18 करोड़ के सिग्नल-फ्री प्रोजेक्ट में बने दो सब-वे की 20 दुकानें ढाई साल बाद भी बंद हैं। जेडीए दो बार दुकानों की नीलामी कर चुका है, लेकिन खरीदार नहीं मिले। द सूत्र की ग्राउंड पड़ताल में सब-वे में गंदगी, टूट-फूट और शराब की खाली बोतलें मिलीं।

जयपुर। जवाहर सर्किल को सिग्नल फ्री बनाने के साथ पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए सब-वे अब जेडीए की प्लानिंग और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रहे हैं। दो सब-वे में बनाई गई 20 दुकानें करीब ढाई साल बाद भी बंद हैं। जेडीए दो बार इनकी नीलामी की कोशिश कर चुका है, लेकिन दोनों बार खरीदार नहीं मिले। अब इन्हीं दुकानों में बिजली का काम कराने के लिए जेडीए ने 19.97 लाख रुपए का नया टेंडर निकाला है।



द सूत्र ने मौके पर जाकर दोनों सब-वे की स्थिति देखी। बंद दुकानों के आसपास गंदगी और कचरा पड़ा मिला। कई जगह सजावट का सामान टूट चुका है। दुकानों के शटर भी क्षतिग्रस्त दिखाई दिए। परिसर में शराब की खाली बोतलें पड़ी थीं और बदबू भी आ रही थी। जिस जगह को पैदल यात्रियों की सुविधा और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बनाया गया था, वहां अब बंद दुकानों और बदहाल रखरखाव की तस्वीर दिखाई देती है।



दो बार नीलामी, फिर भी नहीं मिले खरीदार

इन 20 दुकानों को शुरू करने के लिए जेडीए दो बार नीलामी की कोशिश कर चुका है, लेकिन दुकानें नहीं बिक सकीं। पहले भी जेडीए को जवाहर सर्किल अंडरपास की दुकानों को लीज पर देने में परेशानी होने की बात सामने आ चुकी है।



यहीं जेडीए की प्लानिंग पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। जब दुकानों का निर्माण किया गया था, तब यहां कारोबार की संभावना का आकलन किस आधार पर किया गया? दो बार नीलामी के बाद भी खरीदार क्यों नहीं आए? क्या दुकानों की कीमत ज्यादा थी, जरूरी सुविधाएं पूरी नहीं थीं या सब-वे में लोगों की आवाजाही इतनी कम है कि व्यापारियों ने यहां दुकान लेने में रुचि नहीं दिखाई?




₹44.18 करोड़ मंजूर, काम पूरा होने में लगा ज्यादा समय

जेडीए के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार जवाहर सर्किल को सिग्नल फ्री बनाने के पूरे प्रोजेक्ट के लिए 44.18 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। 13 जुलाई 2021 को प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी दी गई। 18 दिसंबर 2021 को शिलान्यास हुआ और 31 दिसंबर 2021 को 37.17 करोड़ रुपए का वर्क ऑर्डर जारी किया गया।



काम 9 जनवरी 2022 से शुरू होकर 8 जनवरी 2023 तक पूरा होना था। हालांकि प्रोजेक्ट का उद्घाटन 15 मार्च 2024 को हुआ। जेडीए ने अपने रिकॉर्ड में इसे सफलतापूर्वक पूरा प्रोजेक्ट बताया है।




ढाई साल बाद दुकानों में बिजली का काम

अब इस मामले में एक और सवाल खड़ा हो रहा है। सब-वे की 20 दुकानें अब तक बंद हैं और दो बार नीलामी भी विफल हो चुकी है। इसके बावजूद जेडीए अब इन दुकानों में बिजली के काम के लिए 19.97 लाख रुपए का टेंडर कर रहा है। सवाल यह है कि जब दुकानें शुरू ही नहीं हो पाईं तो अब इनमें बिजली का कौनसा काम कराया जाना है? साथ ही, अगर यह काम दुकानों के लिए जरूरी था तो मार्च 2024 में प्रोजेक्ट को पूरा घोषित करने से पहले इसे क्यों नहीं कराया गया?




कागज पर प्रोजेक्ट पूरा, मौके पर उठ रहे सवाल

जेडीए ने प्रोजेक्ट को पूरा घोषित कर दिया, लेकिन इसके एक हिस्से की मौजूदा स्थिति अलग कहानी बता रही है। 20 दुकानें बंद हैं। दो बार नीलामी फेल हो चुकी है। सब-वे में गंदगी और टूट-फूट दिखाई दे रही है। अब बंद दुकानों में बिजली का काम कराने के लिए करीब 20 लाख रुपए का नया टेंडर निकाला गया है।



ऐसे में सवाल सिर्फ दुकानों के बंद होने का नहीं है। सवाल यह है कि जनता के पैसे से बनाई गई संपत्ति का इस्तेमाल सुनिश्चित करने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है?




जेडीए अधिकारियों से नहीं मिला जवाब

द सूत्र ने इस मामले में जेडीए के संबंधित अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन JDA की और से कोई जवाब नहीं मिला।



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