कचरे के ढेर के बीच पढ़ने को मजबूर मासूम बच्चे, द सूत्र की ग्राउंड रिपोर्ट

Ashish Bhardwaj | Aug 24, 2026, 16:47 IST
जवाहर नगर कच्ची बस्ती
राजस्थान में जयपुर के जवाहर नगर कच्ची बस्ती स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल कचरे और जर्जर भवन के बीच चल रहा है। एक ही कमरे में कक्षा 1 से 5 तक के 32 बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

जयपुर के सरकारी स्कूल की बदहाली द सूत्र की पड़ताल में सामने आई।


32 बच्चे एक जर्जर कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं।


स्कूल परिसर के आसपास कचरे का अंबार मिला।


बारिश में रास्ता पानी से भर जाता है, सुविधाएं भी नदारद।


राजस्थान विधानसभा से 6 किमी दूर स्कूल की हालत पर सवाल।



दा सूत्र की टीम राजस्थान विधानसभा से महज 6 किलोमीटर दूर एक सरकारी स्कूल पहुंची। यह स्कूल जवाहर नगर कच्ची बस्ती टीला नंबर 5 में स्थित है। स्कूल के बाहर का नजारा ही उसकी बदहाली बयां कर रहा था। स्कूल परिसर के चारों तरफ कचरे का ढेर लगा मिला। कक्षा 1 से 5 तक के 32 बच्चे एक ही जर्जर कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं।



मीडिया एंट्री बैन के बीच पहुंची टीम

राजस्थान सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में मीडिया और बाहरी लोगों की एंट्री, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसी वजह से दा सूत्र की टीम स्कूल के अंदर नहीं जा सकी।



हालांकि बाहर से दिखने वाला नजारा ही स्कूल की बदहाली और प्रशासनिक नाकामियों को खुलकर बयां कर रहा था। टीम ने स्कूल के टीचर और प्रिंसिपल से बात करने की कोशिश की। लेकिन उन्होंने कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया।



कच्ची बस्ती जवाहार नगर


गंदगी को लेकर भी नहीं मिला जवाब

टीम ने स्कूल परिसर के आसपास फैली गंदगी को लेकर भी स्कूल प्रबंधन से सवाल किया। इसके बावजूद प्रबंधन की ओर से कोई जवाब नहीं मिला और न ही कोई जानकारी साझा की गई। इससे स्कूल की वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल और गहरे हो गए।



बीमारियों का घर बनता स्कूल

स्कूल के चारों तरफ कचरे का अंबार लगा हुआ है। आसपास की बस्ती के लोग पूरे इलाके का कचरा स्कूल के पास खुले में डाल देते हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि सरकार की तरफ से न तो कोई कचरा पात्र लगाया गया है और न ही कोई तय जगह बनाई गई है।



पूरा स्कूल कचरे के बीच में घिरा नजर आता है, जिससे भारी दुर्गंध उठती रहती है। इस तरह के माहौल में पढ़ने वाले बच्चों की सेहत पर इसका गहरा असर पड़ने की आशंका है।



हादसे के साये में चल रही पढ़ाई

पहली से पांचवीं कक्षा तक चलने वाले इस स्कूल के दो पुराने कमरे पूरी तरह खंडहर में बदल चुके हैं। इन कमरों में न छत बची है, न जमीन और न ही दीवारें सही हालत में हैं।



अब पूरा स्कूल एक जर्जर कमरे में चल रहा है। इसी एक कमरे में कक्षा 1 से 5 तक के 32 बच्चे एक साथ पढ़ने को मजबूर हैं। कमरे की दीवारों में गहरी दरारें हैं और प्लास्टर जगह-जगह उखड़ चुका है। सालों से यहां रंगाई-पुताई तक नहीं हुई है, जिससे यह इमारत कभी भी हादसे का शिकार हो सकती है।



बारिश में तालाब बन जाता है रास्ता

स्कूल की बुनियादी सुविधाएं भी पूरी तरह नदारद मिलीं। ऊपर क्लासरूम तक जाने वाला रास्ता हल्की बारिश में ही घुटनों तक पानी से भर जाता है। इस वजह से कई बार स्कूल में अघोषित छुट्टी करनी पड़ती है।



छात्राओं के इस स्कूल में कहीं भी शौचालय नजर नहीं आया। इसके अलावा मिड-डे मील की रसोई भी हमेशा बंद पड़ी मिली।



राजधानी के बीचों-बीच यह हाल

यह स्कूल राजधानी जयपुर के बीचों-बीच स्थित है, फिर भी इसकी हालत बेहद खराब मिली। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों की स्थिति कितनी गंभीर हो सकती है।



सरकार की ओर से स्कूलों में मीडिया एंट्री पर लगाई गई रोक को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि यह कदम व्यवस्था सुधारने के बजाय खामियों को छिपाने की कोशिश जैसा नजर आता है। यह विश्लेषण द सूत्र की टीम का अपना आकलन है, इसे सरकार के आधिकारिक रुख के तौर पर न देखा जाए।



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