जेडीए की चिमनपुरा में सीलिंग कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद मास्टर प्लान लागू

Mukesh Sharma | Sept 21, 2026, 20:33 IST
जेडीए की चिमनपुरा
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद जेडीए ने चिमनपुरा में अवैध व्यावसायिक दुकानों को सील किया। विभिन्न अपीलीय मंचों से मिली अंतरिम राहतों की समीक्षा के बाद अब आगे ध्वस्तीकरण की कार्रवाई संभव है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश।
  • अंतरिम आदेशों और अपीलों का पेंच।
  • 90-B कार्रवाई और संभागीय आयुक्त की रोक।
  • भावी रणनीति और ध्वस्तीकरण की संभावना।

जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने जयपुर के मास्टर प्लान और भू-उपयोग के उल्लंघन पर चिमनपुरा में कथित रुप से अवैध दुकानों को सील कर दिया है। चिमनपुरा में मास्टर प्लान के विपरीत भू-उपयोग और व्यावसायिक निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है।



गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त,2026 के आदेश में जेडीए क्षेत्र में मास्टर प्लान के अनुसार निर्धारित भू-उपयोग के उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई थी। कोर्ट के सामने आया था कि जेडीए को सौंपी गई कृषि या खुली जमीन पर भी कथित तौर पर अतिक्रमण और व्यावसायिक निर्माण हुए।



कोर्ट ने यह भी नोट किया कि JDA की कार्रवाई के बाद संबंधित पक्ष अपीलीय ट्रिब्यूनल पहुंच गए। लंबे समय तक अंतरिम आदेशों के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों को दो सप्ताह में तय करने के निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी को निर्देश की पालना के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बताया है।



चिमनपुरा मामले में JDA की कार्रवाई के बाद संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग स्तरों पर राहत लिए जाने के दावे सामने आए हैं। JDA अपीलीय ट्रिब्यूनल के अलावा राजस्व मंडल और संभागीय आयुक्त स्तर पर भी आदेश होने की बात कही गई है।



इससे पहले जयपुर संभागीय आयुक्त वी. सरवाना ने 19 अगस्त को जेडीए जोन-दो के 16 सितंबर 2005 के 90-B आदेश पर अंतरिम रोक लगाई थी। इस मामले में राजदरबार पिंक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन भी शामिल है। अपीलकर्ताओं की ओर से मूल 90-B कार्रवाई में उचित नोटिस नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया था। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को तय है।



सुप्रीम कोर्ट के दखल से बढ़ा कार्रवाई पर बढ़ा दबाव

सुप्रीम कोर्ट मास्टर प्लान के विपरीत भू-उपयोग के मामले में कह चुका है कि यदि किसी जमीन का उपयोग किसी विशेष उद्देश्य के लिए निर्धारित है तो उसका दूसरे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नियमों के तहत ही होना चाहिए। कोर्ट के सामने जेडीए की ओर से कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ सीलिंग और तोड़ने की कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी भी रखी गई थी।



कोचिंग सेंटरों का भी है मामला

गौरतलब है कि जेडीए पर जयपुर की गोपालपुरा बाईपास रोड पर चल रहे कोचिंग सेंटरों पर भी कार्रवाई का दबाव है। जेडीए ने यहां कुछ कोचिंग सेंटर वाली बिल्डिंगों को सील भी किया है। यहां 10-बी कॉलोनी विकास समिति ने सुप्रीम कोर्ट में मास्टर प्लान उल्लंघन के मामले में अर्जी लगाई है। समिति का कहना है कि गोपालपुरा बाईपास रोड मास्टर प्लान के तहत व्यावसासिक है। जबकि कोचिंग सेंटर संस्थागत गतिविधि है। इसलिए यहां चलने वाले कोचिंग सेंटर अवैध हैं और इन्हें प्रतापनगर ​स्थित कोचिंग हब में शिफ्ट किया जाना चाहिए।



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