झुंझुनू बाईपास अलाइनमेंट लीक, भू-माफियाओं ने डकारी 8 हजार बीघा जमीन, 4000 करोड़ का खेल

Jageshwar prasad | May 04, 2026, 13:51 IST
Photograph: (the sootr)
झुंझुनू में बाईपास अलाइनमेंट लीक होने से 4,000 करोड़ रुपये का जमीन घोटाला सामने आया है। पीडब्ल्यूडी एक्सईएन और कंसलटेंट ने नियमों को ताक पर रखकर माफियाओं के साथ मिलकर 8,000 बीघा जमीन खरीदी। सरकारी पाबंदी के बावजूद अवैध रूप से रजिस्ट्री और नामांतरण किए गए।

News In Short

  • अलाइनमेंट लीक होने के कारण माफियाओं ने बाईपास के पास 8,000 बीघा जमीन खरीदी।
  • इस महाघोटाले की अनुमानित बाजार कीमत 4,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • पीडब्ल्यूडी एक्सईएन राकेश कुमार ने परिजनों के नाम पर 419.5 बीघा जमीन ली।
  • डीपीआर बनाने वाली कंपनी के डायरेक्टर याकूब अली ने भी 447.4 बीघा जमीन ली।
  • नोटिफिकेशन के बाद भी प्रतिबंधित खसरों की अवैध रजिस्ट्री और नामांतरण जारी रहे।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक बड़ा जमीन घोटाला सामने आयाहै, यहां सरकारी सिस्टम की मिलीभगत से प्रस्तावित बाईपास रोड अलाइनमेंट (नक्शा) आधिकारिक घोषणा से पहले ही लीक कर दिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस लीक का फायदा उठाकर भू-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों ने बाईपास के आसपास की करीब 8 हजार बीघा जमीन औने-पौने दामों पर खरीद ली, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत 4,000 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है।



लीक अलाइनमेंट और भ्रष्टाचार

यह पूरा मामला 22 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित बाईपास से जुड़ा है, जो सीकर-झुंझुनू रोड (NH-8) को झुंझुनू-चिड़ावा रोड (NH-11) से जोड़ता है। जांच में सामने आया है कि अलाइनमेंट फाइनल होने से पहले ही ड्राफ्ट माफियाओं तक पहुंच गया था। इस खेल की शुरुआत जुलाई 2024 में बजट घोषणा के महज एक महीने बाद ही हो गई थी।



अप्रैल 2025 में गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद जमीन की खरीद-फरोख्त में और तेजी आई। चौंकाने वाली बात यह है कि उन खसरों (जमीन के टुकड़ों) की भी रजिस्ट्री और नामांतरण धड़ल्ले से किए गए, जहां से सड़क निकलना प्रस्तावित है, जबकि नियम के अनुसार नोटिफिकेशन के बाद ऐसी गतिविधियों पर पाबंदी होती है।



पीडब्ल्यूडी अधिकारी और कंसलटेंट की संलिप्तता

इस घोटाले में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार करने वाली कंपनी की भूमिका मुख्य रूप से सामने आई है:



एक्सईएन राकेश कुमार: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा 33 लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर करीब 419.5 बीघा जमीन खरीदी। उन्होंने जय पहाड़ी, बगड़, बाकरा, कुलोद खुर्द और काली पहाड़ी जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया।



कंसलटेंट याकूब अली: बाईपास की डीपीआर तैयार करने वाली कंपनी झुंझुनू इंजीनियर्स के डायरेक्टर याकूब अली ने अपने बेटे जहीर खान और अन्य नामों से 447.4 बीघा जमीन खरीदी। इन्होंने बगड़, राजीव नगर, रघुनाथपुरा और उदावास जैसे प्राइम लोकेशन पर जमीनें हथिया लीं।



कुल मिलाकर इन दोनों ने ही मिलकर 867 बीघा जमीन पर कब्जा जमाया, जिसका सीधा लाभ अलाइनमेंट की गुप्त जानकारी होने के कारण मिला।



प्राइम लोकेशन और भविष्य का मुनाफा

रिपोर्ट के मुताबिक, भू-माफियाओं ने उन खेतों को विशेष रूप से खरीदा जिनके बीच से बाईपास निकलना है, ताकि सड़क बनने के बाद शेष जमीन सड़क के दोनों किनारों पर आ जाए और उसकी कीमत कई गुना बढ़ जाए। ऐसी करीब 1 हजार बीघा जमीन खरीदी गई है, जबकि बाकी 7 हजार बीघा जमीन लिंक रोड के जरिए बाईपास से जुड़ेगी, जिससे उनकी लोकेशन प्राइम हो जाएगी। वर्तमान में यहां जमीन का भाव 1 करोड़ रुपए प्रति बीघा है।



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