हाईकोर्ट का फर्जी आदेश पेश करने पर सूरजगढ़ विधायक पुत्र पर FIR के निर्देश, कोर्ट ने बताया न्याय प्रणाली पर हमला
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान खुला फर्जी आदेश का मामला
झुंझुनूं में पंचायतीराज चुनाव के दौरान उम्मीदवारी से जुड़ा यह विवाद अब राजस्थान हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मामले में सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार के बेटे जयप्रकाश ने याचिका दायर की थी।
27 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद शर्मा की पीठ में याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता अमित ने सूरजगढ़ के रिटर्निंग ऑफिसर यानी RO का 16 अक्टूबर का पत्र अदालत में पेश किया।
इसके साथ ही वॉट्सऐप पर भेजे गए उस आदेश की प्रतियां भी रखी गईं, जिसे हाईकोर्ट का आदेश बताया जा रहा था। अदालत ने जब अपने रिकॉर्ड की जांच की तो पता चला कि 16 अक्टूबर को हाईकोर्ट की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया था।
यहीं से मामला गंभीर हो गया। अदालत के सामने सवाल खड़ा हो गया कि अगर ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ था, तो फिर उसे हाईकोर्ट का आदेश बताकर कैसे पेश किया गया?
जज ने कहा- यह न्याय प्रणाली पर हमला
सुनवाई के दौरान जस्टिस आनंद शर्मा ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता का यह आचरण न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि अत्यंत गंभीर भी है।
अदालत ने इस तरह के फर्जी आदेश को न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर मामला माना। किसी अदालत के नाम पर फर्जी आदेश पेश करना केवल दस्तावेज से जुड़ी गड़बड़ी नहीं है, बल्कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
इसी गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार को तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अब इस रिपोर्ट से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कथित फर्जी आदेश कैसे तैयार हुआ और इसे किस तरह अदालत के सामने पेश किया गया।
झुंझुनूं कलेक्टर ने FIR दर्ज कराने के दिए निर्देश
हाईकोर्ट में मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। झुंझुनूं कलेक्टर ने सूरजगढ़ के एसडीएम और रिटर्निंग ऑफिसर को आरोपी जयप्रकाश के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
इस निर्देश के बाद अब मामले में पुलिस कार्रवाई का रास्ता खुल गया है। FIR दर्ज होने पर पुलिस कथित फर्जी आदेश, उसके इस्तेमाल और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर सकेगी।
मामले में सबसे अहम बात यह है कि कथित आदेश को चुनाव में उम्मीदवारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। ऐसे में जांच में यह भी देखा जाएगा कि इस दस्तावेज का चुनावी प्रक्रिया पर क्या असर पड़ सकता था। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की आगे की कार्रवाई के बाद ही होगी।
वकील ने भी साथ छोड़ा, खुद केस दर्ज कराने की बात कही
इस मामले में एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है। खबर के मुताबिक, जयप्रकाश के वकील ने उनका साथ छोड़ दिया है। वकील का कहना है कि वह भी इस मामले में फंस गए हैं और अब खुद केस दर्ज कराएंगे।
यह घटनाक्रम मामले को और गंभीर बना रहा है। अब जांच में यह भी अहम होगा कि कथित फर्जी आदेश किसने तैयार किया, उसे किसने वॉट्सऐप पर भेजा और उसे अदालत या चुनावी प्रक्रिया में पेश करने की जिम्मेदारी किसकी थी।
वकील के इस रुख से साफ है कि मामले में दस्तावेज की सत्यता और उसे पेश करने की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, वकील की ओर से केस दर्ज कराने की बात कही गई है, लेकिन उसके आगे की स्थिति उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
16 अक्टूबर के आदेश पर क्यों उठे सवाल?
इस पूरे विवाद की जड़ 16 अक्टूबर की तारीख से जुड़ी है। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता ने सूरजगढ़ RO का 16 अक्टूबर का पत्र और वॉट्सऐप पर भेजे गए कथित हाईकोर्ट आदेश की प्रतियां पेश की थीं।
जब हाईकोर्ट ने अपने रिकॉर्ड से मिलान किया तो पता चला कि उस तारीख को ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ था। यानी जिस दस्तावेज को अदालत का आदेश बताया जा रहा था, उसका रिकॉर्ड हाईकोर्ट में मौजूद नहीं था।
इसी वजह से अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया और रजिस्ट्रार को जांच के निर्देश दिए। अब जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि दस्तावेज कहां तैयार हुआ और उसे किस आधार पर असली आदेश बताकर इस्तेमाल किया गया।
अब पुलिस और हाईकोर्ट की जांच पर नजर
मामले में अब दो स्तर पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी। एक तरफ हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को तीन दिन में जांच रिपोर्ट पेश करनी है। दूसरी तरफ जिला प्रशासन के निर्देश के बाद पुलिस में FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़नी है।
हाईकोर्ट की जांच से कथित फर्जी आदेश की सच्चाई और उसके स्रोत का पता लगाने में मदद मिलेगी। वहीं पुलिस दस्तावेज तैयार करने, भेजने और इस्तेमाल करने से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को होनी है। ऐसे में अब सभी की नजर हाईकोर्ट की जांच रिपोर्ट और पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर रहेगी।
आगे क्या?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है फर्जी आदेश किसने तैयार किया और उसे हाईकोर्ट का असली आदेश बताकर किस तरह इस्तेमाल किया गया। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। वहीं झुंझुनूं कलेक्टर ने सूरजगढ़ SDM को FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं। फिलहाल जयप्रकाश पर लगे आरोपों की जांच होनी बाकी है और उनकी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होगा।