JJM घोटाले में नया खुलासा, महेश जोशी के बेटे की फर्म बनी रिश्वत का माध्यम
समझें क्या है पूरा मामला
- जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी की चार्जशीट में नए खुलासे।
- फर्जी टेंडर के समय ही घाटे की फर्म में अचानक जमा हुए 50 लाख।
- महेश जोशी के खाते में बेटे की निष्क्रीय फर्म से लेन-देन भी हुआ।
- घोटाले में फर्जी सर्टिफिकेट से हुई थी 104 टेंडर की धोखाधड़ी।
- चार्जशीट में रोहित जोशी का नाम क्यों नहीं? जानकारों ने उठाए सवाल।
राजस्थान में जल जीवन मिशन घोटाले में ACB की चार्जशीट ने पूर्व मंत्री महेश जोशी और उनके बेटे रोहित जोशी तक सीधे पहुंचने वाली रुपयों की कड़ी उजागर की है।
चार्जशीट के मुताबिक जिस दौर में महेश जोशी जलदाय विभाग के मंत्री थे, उसी दौरान उनके बेटे रोहित जोशी की घाटे में चल रही निष्क्रिय फर्म के खाते में 50 लाख रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ।
पहले इसी फर्म से 30 लाख रुपए सीधे मंत्री पिता के निजी बैंक खाते में RTGS से ट्रांसफर किए गए थे। ACB ने इसे रिश्वत की रकम को वैध बनाने की कोशिश बताया है।
घाटे में, फिर भी लाखों आए
रोहित जोशी की फर्म मैसर्स सुमंगलम लैंडमार्क LLP 10 अक्टूबर 2021 से पार्टनरशिप एक्ट के तहत पंजीकृत है। फर्म का पता खुद महेश जोशी के जयपुर के सेन कॉलोनी स्थित घर का है। रियल एस्टेट और रेटिंग कारोबार के नाम पर बनी इस फर्म में रोहित जोशी की 80 फीसदी हिस्सेदारी है।
ACB की जांच में सामने आया कि फर्म लगातार घाटे में थी और उसमें कोई सक्रिय कारोबार नहीं चल रहा था। इसके बावजूद 7 अप्रैल से 5 जुलाई 2023 के बीच अलग-अलग संदिग्ध ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए करीब 50 लाख रुपए इस फर्म के खाते में जमा हुए। जांच में इनमें से किसी भी कंपनी का फर्म से कोई वैध कारोबारी रिश्ता नहीं मिला।
30 लाख सीधे पिता के खाते में
इससे पहले 24 फरवरी 2023 को इसी फर्म के खाते से 30 लाख रुपए RTGS (RTGS – Real Time Gross Settlement) के जरिए सीधे पूर्व मंत्री महेश जोशी के निजी बैंक खाते में ट्रांसफर किए जा चुके थे।
ACB का कहना है कि यह रकम जलदाय विभाग में ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले मिली रिश्वत थी जिसे लेयरिंग के जरिए वैध बनाने की कोशिश की गई।
महेश जोशी की ओर से कोर्ट में यह कहा गया है कि बेटे की फर्म में 50 लाख लोन के रूप में आए थे जो वापस लौटा दिए गए।
107 करोड़ का ठेका, जाली इरकॉन सर्टिफिकेट
इस घोटाले में दो ठेका कंपनियां केंद्र में हैं। मैसर्स श्री गणपति ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर महेश मित्तल) और मैसर्स श्री श्याम ट्यूबवेल कंपनी (प्रोपराइटर पदमचंद जैन)।
इन दोनों फर्मों ने इरकॉन इंटरनेशनल (Indian Railway Construction International) के जाली वर्क कम्प्लीशन सर्टिफिकेट और LOA (LOA – Letter of Award) के दम पर 237 में से 104 टेंडर हासिल कर लिए। इन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर दोनों को निविदाओं में योग्य मान लिया गया।
सर्टिफिकेट को असली साबित करने के लिए बोगस ईमेल आईडी तक बनाई गईं। पदमचंद जैन ने खुद इन नकली आईडी से विभाग को वेरिफिकेशन मेल भेजकर पूरे सिस्टम को गुमराह किया।
जिस दौरान फर्म के खाते में रकम पहुंच रही थी, उसी दौरान जलदाय विभाग जून 2023 के अंत तक इन आरोपी ठेका कंपनियों को 107 करोड़ रुपए का भुगतान जारी कर रहा था।
रोहित जोशी आरोपी क्यों नहीं?
चार्जशीट खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारों के मुताबिक ACB ने माना कि रोहित जोशी की फर्म में आया पैसा संदिग्ध है, उसका किसी जमाकर्ता से वैध कारोबारी रिश्ता नहीं था, और इसी फर्म से 30 लाख सीधे मंत्री पिता के खाते में पहुंचे।
इतना सब दर्ज होने के बाद भी चार्जशीट के आरोपियों की सूची में रोहित जोशी का नाम नहीं है। जिस खाते से रिश्वत को वैध बनाने की कोशिश हुई, उसका मालिक कठघरे से बाहर कैसे रहा, यह सवाल अनुत्तरित है।
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