जॉब स्कैम का शिकार हो रहे बेरोजगार, 93% लोगों को मिले फर्जी ऑफर
समझें क्या है पूरा मामला
- 93 प्रतिशत लोगों को मिले फर्जी या संदिग्ध जॉब ऑफर।
- असली और नकली नौकरी में फर्क करना हुआ मुश्किल।
- सिर्फ शक के कारण 75 प्रतिशत ने छोड़ा सही मौका भी।
- जेन-जी और कम अनुभव वालों पर सबसे ज्यादा असर।
- एक्सपर्ट बोले, भर्ती में भरोसा लौटाना सबसे बड़ी जरूरत।
साइबर ठगों के निशाने पर अब बेरोजगार युवा भी आ गए हैं। नौकरी तलाशने वालों को ठग अपने जाल में फंसा रहे हैं। इससे असली और फर्जी नौकरी में फर्क करना मुश्किल हो गया है।
भर्ती मंच इनडीड (Indeed) के सर्वे में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सबसे ज्यादा असर जेन-जी और कम अनुभव वाले पेशेवरों पर पड़ा है।
सर्वे में क्या सामने आया?
नौकरी का झांसा देकर ठगी कासर्वे इनडीड ने राजस्थान सहित 1,161 भारतीय कर्मचारियों पर किया था। इसमें सामने आया कि 93 फीसदी लोगों को कभी न कभी फर्जी या संदिग्ध नौकरी का ऑफर मिला। वहीं 51 फीसदी लोग यह तय ही नहीं कर पाए कि नौकरी देने वाला असली है या ठग।
इसी शक के चलते 75 फीसदी लोगों ने नौकरी का अवसर छोड़ दिया। हैरानी की बात यह है कि कई मामलों में वह अवसर वास्तव में सही था। इस तरह फर्जी ऑफर के डर से असली मौके भी हाथ से निकल रहे हैं।
जेन-जी पर सबसे ज्यादा असर
सर्वे के अनुसार सबसे ज्यादा जोखिम जेन-जी और दो वर्ष से कम अनुभव वाले पेशेवरों पर है। करियर की शुरुआत करने वाले उम्मीदवार अक्सर ऑनलाइन जॉब पोर्टल और सोशल मीडिया पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। इससे ठगों को उन्हें निशाना बनाना आसान हो जाता है।
52 फीसदी लोगों ने संदेह के कारण असली अवसर गंवाने की बात कही। 51 फीसदी ने तनाव और चिंता महसूस करने की बात बताई। वहीं 46 फीसदी ने कंपनियों पर भरोसा कम होने और इतने ही लोगों ने आर्थिक नुकसान होने की बात कही।
मानसिक और सामाजिक नुकसान सबसे बड़ा
इनडीड के टैलेंट स्ट्रैटेजी एडवाइजर रोहन सिल्वेस्टर के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में सबसे बड़ी जरूरत भरोसे की है। उनका कहना है कि कंपनियों को आधिकारिक माध्यमों से भर्ती की जानकारी देनी चाहिए। रिक्रूटर्स की पहचान भी स्पष्ट रखनी जरूरी है, ताकि उम्मीदवार सुरक्षित महसूस करें।
फर्जी प्रस्तावों के चलते 31 फीसदी लोगों ने कंपनियों और नियोक्ताओं पर भरोसा कम होने की बात कही। 19 फीसदी लोग तनाव और चिंता में रहे। वहीं 14 फीसदी ने ठगी के डर से बाद में असली नौकरी के मौके भी छोड़ दिए। सिल्वेस्टर के अनुसार नौकरी के नाम पर ठगी का सबसे बड़ा नुकसान मानसिक और
सामाजिक स्तर पर होता है।
भरोसा कैसे लौटेगा
सर्वे के अनुसार ठगी के बढ़ते मामलों से उम्मीदवार अब आकर्षक वेतन वाले पदों पर भी आवेदन करने से बचते हैं। सबसे पहले वे भर्ती की विश्वसनीयता जांचते हैं। 50 फीसदी लोगों ने कहा कि रिक्रूटर की पहचान आसानी से सत्यापित हो सके तो भरोसा बढ़ेगा।
वहीं 47 फीसदी लोगों ने कंपनी की आधिकारिक ईमेल आईडी से आए ईमेल को सबसे विश्वसनीय माना है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को सत्यापित भर्ती प्रोफाइल और प्रमाणित जॉब पोस्टिंग अपनानी चाहिए। स्पष्ट चयन प्रक्रिया से ही उम्मीदवारों का भरोसा वापस लौट सकता है।
कंपनी की मेल आईडी जरूर करें चेक
आईटी एक्सपर्ट धीरज विजयवर्गीय के अनुसार कोई भी कंपनी इंटरव्यू से पहले रजिस्ट्रेशन या जॉइनिंग फीस नहीं मांगती। उनका कहना है कि साइबर ठग फर्जी जॉब पोर्टल, व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप के जरिए युवाओं को निशाना बनाते हैं।
उनके अनुसार किसी भी नौकरी के लिए आवेदन से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, ईमेल आईडी (ID – Identity) और रिक्रूटर की पहचान जरूर जांचनी चाहिए। डिजिटल भर्ती बढ़ने के साथ सतर्कता और भी जरूरी हो गई है।
सत्यापित रिक्रूटर्स के जरिए हो भर्ती
फोर्टी (FORTI) के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार आईटी, मैन्युफैक्चरिंग, ई-कॉमर्स और सेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में भर्तियां हो रही हैं। उनका कहना है कि फर्जी भर्ती और जॉब स्कैम नौकरी तलाशने वाले युवाओं का भरोसा तोड़ते हैं।
इससे कंपनियों की साख को भी नुकसान पहुंचता है। उनके अनुसार उद्योगों को आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और सत्यापित रिक्रूटर्स के जरिए ही भर्ती करनी चाहिए। इससे नौकरी बाजार में भरोसा फिर से मजबूत हो सकता है।
ये भी पढ़ें:-
पॉश सोसायटी बनी साइबर ठगों का अड्डा, अमेरिका-कनाडा तक किया डिजिटल अरेस्ट
चेयरमैन की व्हाट्सएप DP से 5.30 करोड़ की ठगी, आरोपी गिरफ्तार
500 करोड़ की नवअंश चिटफंड ठगी में ईडी की एंट्री, पीड़ितों को समन
विदेश से MBBS, भारत में FMGE पास न कर पाए, फिर बनवाया फर्जी सर्टिफिकेट