बासनी अग्निकांड में दूसरे दमकलकर्मी सुरेंद्र की मौत, बिना ट्रेनिंग आग में उतारने का आरोप
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर बासनी अग्निकांड में घायल दमकलकर्मी सुरेंद्र बोराणा की मौत।
- हादसे में अब तक दो ठेकाकर्मी दमकलकर्मियों की जा चुकी जान।
- वाल्मीकि समाज ने बिना ट्रेनिंग और सुरक्षा उपकरणों का लगाया आरोप।
- मृतक परिवारों के लिए एक करोड़ मुआवजे और नौकरी की मांग।
- नगर निगम ने मृतक परिवार को 5 लाख रुपए देने की घोषणा की।
राजस्थान में जोधपुर के बासनी इलाके की केमिकल फैक्ट्री में लगी आग बुझाते हुए कई दमकलकर्मी झुलस गए थे। इनमें से ठेकाकर्मी सुरेंद्र बोराणा की इलाज के दौरान मौत हो गई है। इससे पहले ठेकाकर्मी प्रीतेश परमार की भी जान जा चुकी है। वाल्मीकि समाज का आरोप है कि इन युवाओं को बिना ट्रेनिंग और सुरक्षा उपकरणों के आग में भेजा गया। परिवारों के लिए एक करोड़ रुपए मुआवजे और सरकारी नौकरी की मांग उठी है।
कैसे हुआ था हादसा
बासनी औद्योगिक क्षेत्र की एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लगी थी। आग बुझाने के दौरान हुए विस्फोट में कई दमकलकर्मी झुलस गए। घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल भेजा गया। कुछ का इलाज जोधपुर में भी चल रहा है।
प्रीतेश को दी गई अंतिम विदाई
प्रीतेश परमार की शनिवार को मौत हुई थी। वे बुरी तरह झुलस गए थे। बिच्छीवाड़ा में उन्हें राजकीय सम्मान और फायर सर्विस के झंडे के साथ अंतिम विदाई दी गई। डूंगरपुर के प्रीतेश के पिता धुलेश्वर परमार 25 साल से ज्यादा समय से फायर ब्रिगेड में लीडिंग फायरमैन हैं। बेटा भी फायर फाइटर बनने की ट्रेनिंग ले रहा था।
घायलों की हालत
हादसे में घायल ठेकाकर्मी प्रदीप (23) की हालत गंभीर है। वे वेंटिलेटर पर हैं। नगर निगम के तीन कर्मचारी भी झुलसे हैं। अविनाश हंस और प्रेम तम्बोली का एसएमएस अस्पताल में इलाज चल रहा है। कुनाल चौधरी भी घायल हैं। तीनों अनुकंपा नियुक्ति के तहत निगम में काम कर रहे हैं और अभी प्रोबेशन पर हैं।
बिना ट्रेनिंग आग में भेजने का आरोप
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि सुरेश जोड़ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि युवाओं को बिना ट्रेनिंग और बिना डिप्लोमा के आग में भेजा गया।
उनके मुताबिक प्रीतेश और सुरेंद्र समेत कई दमकलकर्मियों के पास फायर फाइटिंग का कोई डिप्लोमा नहीं था। उनका कहना है कि निगम के तीनों घायल कर्मचारियों के पास भी यह योग्यता नहीं है। सुरेश जोड़ का आरोप है कि इन युवाओं को सिर्फ 7 हजार रुपए महीने की तनख्वाह मिलती थी।
सुरक्षा उपकरणों पर सवाल
सुरेश जोड़ का आरोप है कि कर्मचारियों को फायर-प्रूफ सूट तक नहीं दिए गए। उनका कहना है कि हेलमेट भी घटिया क्वालिटी के थे, जो आग में पिघल गए। इससे जवानों की चोटें और गंभीर हो गईं।
ठेकेदार और निगम पर सवाल
दमकलकर्मी ठेके पर एक निजी कंपनी के जरिए काम कर रहे थे। सुरेश जोड़ के मुताबिक ठेकेदार कंपनी से कर्मचारियों के डिप्लोमा मांगे गए, पर वह कोई दस्तावेज नहीं दिखा सकी।उनका आरोप है कि नगर निगम आयुक्त राहुल जैन ने भी इस पर कोई जवाब नहीं दिया। ठेकेदार कंपनी और निगम का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
निगम ने की मुआवजे की घोषणा
नगर निगम ने मृतक दमकलकर्मी के परिवार को 5 लाख रुपए और गंभीर घायलों को 2-2 लाख रुपए देने की घोषणा की है। महापौर प्रसन्नचंद मेहता ने कहा कि दमकलकर्मी निगम परिवार का हिस्सा हैं और संकट में निगम उनके साथ है। सुरेश जोड़ ने इस मुआवजे को नाकाफी बताया है। उनका आरोप है कि यह राशि लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश है।
एक करोड़ और नौकरी की मांग
वाल्मीकि समाज ने कई मांगें रखी हैं। मृतकों के परिवार को एक करोड़ रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग है। घायलों को 30 लाख रुपए और निगम में संविदा नौकरी देने की मांग भी की गई है। समाज का कहना है कि ये युवा अपने परिवारों के मुख्य सहारा थे।
जोधपुर तक पहुंचा आंदोलन
इस मुद्दे पर विरोध जयपुर से शुरू हुआ था। अब यह आंदोलन जोधपुर तक पहुंच गया है। दमकलकर्मियों की सुरक्षा और ठेका प्रणाली को लेकर सवाल लगातार तेज हो रहे हैं। अब नजर इस पर है कि सरकार और नगर निगम इन मांगों पर क्या फैसला लेते हैं। साथ ही, हादसे की जवाबदेही कैसे तय होती है।
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