जोधपुर में 20 करोड़ की जमीन हड़पने का खेल, पटवारी और बैंक कर्मियों की मिलीभगत से बुजुर्ग की 22 बीघा जमीन पर कब्जा

Jageshwar Prasad | Nov 08, 2026, 11:15 IST
मानसिक रूप से बीमार बुजुर्ग को बनाया शिकार: फर्जी मुख्तारनामा बनवाकर करोड़ों की पुश्तैनी जमीन अपने नाम कराई
जोधपुर शहर के उदयमंदिर थाना क्षेत्र में एक बुजुर्ग की करीब 20 करोड़ रुपए की 22 बीघा पुश्तैनी जमीन पर कब्जे और धोखाधड़ी का आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार यह पूरा मामला योजनाबद्ध तरीके से किया गया। बुजुर्ग के बेटे की रिपोर्ट पर पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें पटवारी, बैंक मैनेजर और कुछ अन्य लोगों पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है, और अंतिम तस्वीर जांच के नतीजों से ही साफ होगी।




बेटे की शिकायत में क्या है?

पीड़ित के बेटे दिलीप सिंह, जो माणकलाव करवड़ के निवासी हैं। दिलीप ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनके पिता इंद्र सिंह शेखावत कई सालों से मानसिक बीमारी और अस्वस्थता से ग्रसित हैं। उनका इलाज जोधपुर और अहमदाबाद के डॉक्टरों से चल रहा है। शिकायत के अनुसार आरोपियों ने इसी स्थिति का फायदा उठाया।



शिकायत में आरोपियों के नाम सोहनलाल बिश्नोई, राकेश गोदारा, लक्ष्य बिश्नोई, पटवारी राजाराम बिश्नोई और अन्य लोग बताए गए हैं।




फर्जी मुख्तारनामा और नामांतरण

आरोप है कि जोधपुर कचहरी परिसर में एक फर्जी आम मुख्तारनामा तैयार करवाया गया। बिना जानकारी और सहमति के जमीन को आरोपियों और उनके परिजनों के नाम ट्रांसफर करवा लिया गया। शिकायत में कहा गया है कि पटवारी राजाराम बिश्नोई की भूमिका से कागजों और नामांतरण में हेरफेर हुआ।



बैंक खाता और लेन-देन पर सवाल

शिकायत के अनुसार आरोपियों ने सरकारी मुआवजे या योजनाओं का झांसा देकर बुजुर्ग को बैंक ले जाकर एक नया खाता खुलवाया। इस खाते में फर्जी हस्ताक्षर और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बड़ी रकम ट्रांसफर की गई और बाद में निकाल ली गई।




धमकी और कब्जे की कोशिश

बेटे के मुताबिक जब उन्होंने तहसील में आपत्ति दर्ज करवाई, तो आरोपी पक्ष ने विरोध किया। शिकायत के अनुसार 7 अक्टूबर 2026 को कचहरी परिसर में गाड़ी लेकर पहुंचे आरोपियों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद खेतों के पास आकर जबरन कब्जा करने की कोशिश हुई, और खुलेआम धमकी दी गई कि जमीन छोड़ दो, वरना परिणाम बुरा होगा।



पुलिस की जांच और आगे की राह

उदयमंदिर थाना पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क, बैंक अधिकारियों और पटवारी की संलिप्तता की बारीकी से जांच कर रही है। अभी तक किसी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं है।



जमीन जैसे मामलों में राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण की फाइल और रजिस्ट्री के दस्तावेज जांच का मुख्य आधार बनते हैं। इन दस्तावेजों की जांच से ही स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं।




बुजुर्गों की संपत्ति की सुरक्षा का सवाल

ऐसे मामले बताते हैं कि बुजुर्गों और मानसिक रूप से कमजोर लोगों की संपत्ति कितनी आसानी से निशाने पर आ सकती है। परिवार के लिए जरूरी है कि संपत्ति के दस्तावेज और बैंक खातों की नियमित जानकारी रखी जाए। प्रशासन के लिए जरूरी है कि नामांतरण और मुख्तारनामे की प्रक्रिया में सख्त जांच हो।



FAQs

  1. जोधपुर में जमीन के फर्जी नामांतरण मामले में आरोप क्या हैं?
    इस मामले में पटवारी, बैंक मैनेजर और कुछ अन्य लोगों पर मिलीभगत के आरोप लगे हैं, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति की मानसिक स्थिति का फायदा उठाकर उनकी जमीन का फर्जी नामांतरण किया।
  2. जोधपुर में जमीन के फर्जी नामांतरण मामले में किन बातों की जांच की जा रही है?
    पुलिस जांच के तहत आरोपियों की संलिप्तता, बैंक अधिकारियों और पटवारी की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। इसके लिए राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण की फाइल, और रजिस्ट्री के दस्तावेजों की जांच की जाएगी।
  3. बुजुर्गों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
    बुजुर्गों की संपत्ति की सुरक्षा के लिए परिवार को संपत्ति के दस्तावेजों और बैंक खातों की नियमित जानकारी रखनी चाहिए, और प्रशासन को नामांतरण तथा मुख्तारनामे की प्रक्रिया में सख्त जांच करनी चाहिए।
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