जोधपुर में गोशाला में 1 करोड़ का फर्जीवाड़ा, दो सगे भाइयों पर आरोप
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर गोशाला में 1 करोड़ के फर्जीवाड़े का आरोप।
- स्वामी रामप्रकाश समेत 5 पर केस दर्ज।
- फर्जी कार्यकारिणी और हस्ताक्षर का आरोप।
- सरकार से गोशाला को 42 लाख अनुदान मिला।
- पुलिस बोली, गबन जांच के बाद साफ होगा।
जोधपुर जिले के डांगियावास थाना क्षेत्र स्थित श्री संभवनाथ राधे गोविंद गोशाला में अनुदान राशि में फर्जीवाड़े का आरोप लगा है। परिवादी जोराराम के इस्तगासे पर कोर्ट के आदेश से 26 अगस्त को मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि करीब 1 करोड़ रुपए की राशि और सरकारी अनुदान में गड़बड़ी की गई। मामले में कथावाचक स्वामी रामप्रकाश और रामविचार महाराज सहित पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। पुलिस ने कहा है कि फिलहाल यह मामला जांच का विषय है और गबन हुआ या नहीं, यह जांच के बाद ही साफ होगा।
परिवादी जोराराम का आरोप
परिवादी जोराराम का आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी कार्यकारिणी बनाकर उसमें हनुमान सिंह राजपूत के फर्जी साइन कर दिए, जबकि राजपूत साल 2006 में ही इस्तीफा दे चुके थे। जोराराम के मुताबिक एक साल पहले रामप्रकाश ने उनके खिलाफ थाने में झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। उनका दावा है कि जांच में यह शिकायत झूठी पाई गई थी।
'दो भाइयों ने बना ली नई कार्यकारिणी'
जोराराम ने बताया कि रामविचार और रामप्रकाश महाराज सगे भाई हैं और कथा करते हैं। उनका आरोप है कि दोनों ने मिलकर फर्जीवाड़ा किया, जिसमें एक अध्यक्ष और दूसरा कोषाध्यक्ष बन गया। जोराराम के अनुसार पहले से एक कार्यकारिणी बनी हुई थी, जिसकी जगह नई कार्यकारिणी बना दी गई।
दो पदाधिकारियों की मौत के बाद बदला घटनाक्रम
जोराराम के मुताबिक पहले गोशाला धर्मानंद महाराज चलाते थे और उस दौर की कमेटी में वे खुद अध्यक्ष थे। धर्मानंद महाराज का 14 फरवरी 2025 को निधन हो गया था। इसके कुछ समय बाद तत्कालीन कोषाध्यक्ष मोडाराम जाणी का भी 17 मार्च 2025 को निधन हो गया। जोराराम का आरोप है कि इसके बाद पांचों आरोपियों ने मिलकर फर्जी कार्यकारिणी तैयार कर ली।
कौन-कौन हैं आरोपी
मामले में जिन पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, उनमें रेवंतराम देवासी के दो पुत्र रामप्रकाश और रामविचार (निवासी उम्मेद नगर), लादूराम मेघवाल के पुत्र कालूराम (निवासी बिसलपुर), नथमल शर्मा (निवासी खोखरिया) और गोशाला के अकाउंटेंट हरिभजन (निवासी मेड़ता) शामिल हैं।
एसएचओ बोले, अभी वर्चस्व की लड़ाई नजर आ रही
डांगियावास थाना अधिकारी राजूराम काला ने बताया कि गोशाला पांच गांवों के सार्वजनिक सहयोग से पिछले 20 साल से चल रही है। पहले यह गोशाला अनुदानित नहीं थी, पिछले साल ही इसे अनुदान मिलना शुरू हुआ। इसमें राजस्थान सरकार से 42 लाख रुपए की अनुदान राशि आई थी। थानाधिकारी के मुताबिक प्रारंभिक तौर पर यह मामला वर्चस्व की लड़ाई जैसा नजर आ रहा है। उन्होंने साफ कहा कि गबन हुआ है या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता, इसका पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
कार्यकारिणी को लेकर दोनों पक्षों में अलग-अलग दावे
इस मामले में एक अहम पहलू यह भी है कि कार्यकारिणी के गठन को लेकर परिवादी और पुलिस की जानकारी में अंतर है। जहां परिवादी जोराराम इसे फर्जी कार्यकारिणी बता रहे हैं, वहीं थानाधिकारी राजूराम काला के मुताबिक धर्मानंद महाराज के निधन के बाद पांचों गांवों के लोगों ने मिलकर निर्वाचित कार्यकारिणी के लिए चुनाव करवाए थे, जिसमें सर्वसम्मति से संत रामप्रकाश को अध्यक्ष चुना गया था।
अब आगे क्या होगा
थानाधिकारी के मुताबिक कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज होने के बाद अब संबंधित विभाग से जरूरी दस्तावेज मांगे गए हैं। दस्तावेज मिलने के बाद ही जांच आगे बढ़ेगी। पुलिस के मुताबिक जांच पूरी होने पर ही यह तय हो पाएगा कि किसी तरह का गबन हुआ है या नहीं।
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