2.5 महीने के मासूम को नया जीवन, दिमागी बुखार-हाइपरटेंशन से जंग जीत 27 दिन बाद डिस्चार्ज
पांच पॉइंट में समझें पूरा मामला
- जोधपुर के MDH अस्पताल के डॉक्टरों का कमाल।
- दिमागी बुखार से पीड़ित ढाई महीने के शिशु की जान बचाई।
- 23 अगस्त को एमडीएम अस्पताल में हुआ था भर्ती।
- हाइपरटेंशन और दौरों के कारण वेंटिलेटर पर भी रखना पड़ा।
- 27 दिन के इलाज के बाद बच्चे की बची जान और घर लौटा।
नरेश रमेश@ जोधपुर. ढाई महीने के मासूम खुशवंत ने जिंदगी की मुश्किल जंग जीत ली। तेज बुखार था। लगातार दौरे पड़ रहे थे। ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था और सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था। हालत इतनी गंभीर थी कि उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। परिवार एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगा चुका था।
उम्मीद भी टूटने लगी थी। आखिर जोधपुर के मथुरादास माथुर (एमडीएम) अस्पताल में 27 दिन चले इलाज के बाद मासूम स्वस्थ हो गया। शुक्रवार को डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी।
MDH अस्पताल के डॉक्टरों ने ढाई महीने के शिशु की जान बचाई
जोधपुर के MDH अस्पतालके शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर और यूनिट हेड डॉ हरीश मौर्य के मुताबिक खुशवंत को 23 अगस्त 2026 की सुबह अस्पताल लाया गया था। उस समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी। उसे दिमागी बुखार था। इसके साथ ब्लड प्रेशर काफी बढ़ा हुआ था। सांस लेने में परेशानी हो रही थी और लगातार दौरे भी पड़ रहे थे।
हालत देखते ही डॉक्टरों ने बच्चे को वेंटिलेटर पर लिया। इसके साथ बुखार, हाई बीपी और दौरों को कंट्रोल करने के लिए इलाज शुरू किया गया।
ब्यावर से अजमेर ले गया था परिवार
खुशवंत के पिता के मुताबिक बच्चे की तबीयत खराब होने के बाद परिवार सबसे पहले उसे ब्यावर के अस्पताल लेकर गया था। वहां इलाज के बावजूद दौरे बंद नहीं हुए। इसके बाद मासूम को अजमेर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया। यहां भी दो दिन इलाज चला, लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं आया। बच्चे की बिगड़ती हालत देखकर परिवार उसे लेकर जोधपुर पहुंचा। यहां एमडीएम अस्पताल के शिशु आईसीयू (PICU) में भर्ती किया गया।
10 दिन वेंटिलेटर पर रहा मासूम
खुशवंत की हालत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसे लगातार 10 दिन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखना पड़ा। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी करती रही। धीरे-धीरे इलाज का असर दिखाई देने लगा। बच्चे की सांस सामान्य होने लगी। बुखार कंट्रोल में आया और दौरे भी पूरी तरह बंद हो गए।इसके बाद उसे वेंटिलेटर से हटाया गया, लेकिन सांस के लिए सपोर्ट की जरूरत बनी रही।
सात दिन तक शिशु को ऑक्सीजन पर रखा गया
वेंटिलेटर से हटाने के बाद बच्चे को सात दिन तक HFNC यानी हाई फ्लो नेजल कैनुला सपोर्ट पर रखा गया। हालत में लगातार सुधार के बाद ऑक्सीजन सपोर्ट भी धीरे-धीरे कम किया गया। आखिर इसे पूरी तरह हटा दिया गया। डॉक्टरों ने उसकी सेहत पर नजर रखी और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद छुट्टी देने का फैसला किया।
पिता बोले- उम्मीद छोड़ चुके थे
बच्चे को स्वस्थ देखकर परिवार भी भावुक हो गया। खुशवंत के पिता ने बताया कि एक समय ऐसा आया था, जब उन्हें बेटे के बचने की उम्मीद नहीं रही थी।उन्होंने डॉ. हरीश मौर्य और उनकी टीम के डॉक्टरों के साथ PICU इंचार्ज मदन और पूरी टीम का आभार जताया। पिता ने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल की टीम की लगातार कोशिशों से उनके बच्चे को नया जीवन मिला है। अब वे अपने स्वस्थ बच्चे को लेकर घर लौट रहे हैं।
खुशवंत का जोधपुर अस्पताल में कुल 27 दिन इलाज चला। पूरी तरह स्वस्थ घोषित किए जाने के बाद उसे डिस्चार्ज किया गया। मासूम के स्वस्थ होकर घर लौटने पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ बीएस. जोधा और एमडीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ विकास राजपुरोहित ने शिशु रोग विभाग की पूरी टीम को बधाई दी।
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