जोधपुर में बोर्ड किसका? मेहता का दावा मजबूत, सोलंकी की व्यूह रचना से मुकाबला टाइट
समझें क्या है पूरा मामला
- जोधपुर महापौर चुनाव में 52 बनाम 48 की शह-मात।
- भाजपा ने किया निर्दलीयों के बूते 52 का दावा किया।
- कांग्रेस ने बागियों को वापस लाकर पलटवार किया।
- प्रसन्नचंद मेहता बनाम राजेंद्र सोलंकी की टक्कर।
- फ्लोर टेस्ट में 4 पार्षदों का रुख तय करेगा खेल।
जोधपुर नगर निगम में महापौर की कुर्सी के लिए जोरदार मुकाबला है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस आमने-सामने हैं। दोनों दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मामला अब आर-पार की जंग बन गया है।
भाजपा ने निर्दलीयों के बूते 52 पार्षदों के समर्थन का दावा किया है। पार्टी ने प्रसन्नचंद मेहता को मैदान में उतारा है। उनकी संघ पृष्ठभूमि है। इससे भाजपा का बोर्ड बनना तय माना जा रहा था। लेकिन कांग्रेस ने अंतिम वक्त में बागियों को साधकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।
संख्याबल का गणित: 52 पर भाजपा, कांग्रेस 48 के फेर में
जोधपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 45 और कांग्रेस ने 44 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 10 सीटों पर निर्दलीय और 1 सीट पर आरएलपी (RLP) जीती है।
- भाजपा का दावा: 7 निर्दलीय पार्षदों (जिनमें कांग्रेस के बागी विशाल सांखला और चेतन गहलोत शामिल हैं) के समर्थन के साथ भाजपा ने 52 पार्षदों की लामबंदी कर बहुमत (51) से एक अधिक का आंकड़ा जुटाने का दावा किया है।
- कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस ने वार्ड संख्या 69 से बागी हुए लियाकत अली रंगरेज की पार्टी में वापसी कराकर मुकाबले को जिंदा रखा है। 3 अन्य निर्दलीयों को साधने के बाद कांग्रेस का आंकड़ा 48 तक पहुंचता दिख रहा है।
प्रतिष्ठा की सीधी भिड़ंत: मेहता बनाम सोलंकी
यह मुकाबला केवल आंकड़ों का नहीं बल्कि दोनों दलों के शीर्ष नेताओं की साख का भी बन चुका है:
- प्रसन्नचंद मेहता (भाजपा): संघ पृष्ठभूमि से आने वाले मेहता पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी उम्मीदवारी को संगठन और असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया का समर्थन माना जा रहा है।
- राजेन्द्र सोलंकी (कांग्रेस): पूर्व मंत्री सोलंकी पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी हैं और उन्होंने खुद पार्षद का चुनाव नहीं लड़ा था। स्थानीय राजनीति और बिसात बिछाने में माहिर सोलंकी के दम पर ही कांग्रेस यह चुनाव लड़ रही है।
25 सितंबर को फ्लोर टेस्ट पर टिकीं निगाहें
यदि कांग्रेस 48 के संभावित आंकड़े के साथ मैदान में उतरती है, तो उसे बाजी पलटने के लिए केवल 4 अतिरिक्त पार्षदों के पाला बदलने (Cross-Voting) की जरूरत होगी। 25 सितंबर 2026 को होने वाले मतदान के दिन यह देखना होगा कि निर्दलीय और असंतुष्ट पार्षद किस करवट बैठते हैं।
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