21 लाख के टेंडर में चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने का आरोप, जोधपुर नगर निगम कमिश्नर ने बैठाई जांच

The Sootr | Oct 07, 2026, 19:50 IST
जोधपुर नगर निगम टेंडर विवाद
जोधपुर नगर निगम के 21 लाख रुपए के फॉगिंग और प्रचार वाहन टेंडर में गड़बड़झाले के आरोप लगे हैं। छुट्टियों के बीच बेहद कम समय देने और 2022 से 2024 के अनुभव की शर्त पर सवाल उठे हैं। कमिश्नर राहुल जैन ने मामले की जांच कराने और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की बात कही है।

नरेश रमेश @ जोधपुर



जोधपुर नगर निगम में 21 लाख रुपए के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया। यह टेंडर फॉगिंग और प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों के लिए जारी किया गया था। आरोप है कि टेंडर की तारीख और अनुभव से जुड़ी शर्तें इस तरह रखी गईं, जिससे बाकी ठेकेदारों को आवेदन करने का पूरा मौका नहीं मिला। एक खास फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए पूरा गड़बड़झाला किए जाने के आरोप लग रहे हैं। बड़ी बात ये है कि ये प्रचार-प्रसार का 21 लाख का टेंडर सिर्फ 4 महीने के काम के लिए निकाला गया है।



जोधपुर नगर निगम के कमिश्नर राहुल जैन ने मामला सामने आने के बाद इसकी जांच कराने की बात कही है। कमिश्नर का कहना है कि मामला उनके ध्यान में आया है। जांच में नियम तोड़ने या किसी तरह की गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ टेंडर इंचार्ज मनीष बैरवा ने आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि टेंडर जारी करने में सभी नियमों और शर्तों का पालन किया गया है।



छुट्टियों के बीच जोधपुर नगर निगम में निकला टेंडर

जोधपुर नगर निगम के इस टेंडर पर सबसे बड़ा सवाल इसकी टाइमिंग को लेकर उठ रहा। जानकारी के मुताबिक निगम ने टेंडर के दस्तावेज 1 अक्टूबर की शाम करीब 5 बजे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किए। इसके तुरंत बाद छुट्टियां शुरू हो गईं। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती थी। इसके बाद 3 अक्टूबर को शनिवार और 4 अक्टूबर को रविवार था। टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख 5 अक्टूबर थी और जमा करने का समय भी सुबह 10 बजे तक ही था।



यानी दस्तावेज अपलोड होने से लेकर टेंडर जमा करने की आखिरी तारीख तक बीच में कोई सामान्य वर्किंग डे नहीं मिला। इसी टाइमिंग को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठाए जा रहे।



ठेकेदारों का आरोप- दस्तावेज जुटाने का समय नहीं मिला

टेंडर में हिस्सा लेने के इच्छुक ठेकेदारों का आरोप है कि इतने कम समय में जरूरी कागजात तैयार करना आसान नहीं था। टेंडर के लिए काम के अनुभव से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और EMD समेत कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। छुट्टियों के कारण सरकारी कार्यालय और कई दूसरे संस्थान बंद थे। ऐसे में नए सिरे से कोई दस्तावेज लेना या प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल था।



आरोप लगाने वाले ठेकेदारों का कहना है कि अगर जोधपुर नगर निगम ज्यादा समय देता तो दूसरी फर्म भी आसानी से आवेदन कर सकती थीं। लेकिन 1 अक्टूबर की शाम टेंडर अपलोड करके 5 अक्टूबर सुबह तक का समय देने से मुकाबले में शामिल होने का मौका सीमित हो गया। इसी वजह से सवाल उठ रहा है कि आखिर टेंडर के लिए इतनी कम समय सीमा क्यों रखी गई?



जोधपुर निगम के टेंडर में अनुभव की शर्त पर भी सवाल

विवाद केवल टेंडर की तारीख तक सीमित नहीं है। अनुभव को लेकर रखी गई शर्त भी सवालों के घेरे में है। जानकारी के मुताबिक टेंडर में वर्ष 2022 से 2024 के बीच का एक साल का अनुभव मांगा गया। इसी शर्त पर ठेकेदार आपत्ति जता रहे हैं। उनका सवाल है कि अगर किसी फर्म के पास 2025 में इसी तरह का काम करने का अनुभव है तो उसे क्यों नहीं माना जा रहा? इसी तरह 2021 या उससे पहले काम कर चुकी फर्म के अनुभव को भी इस शर्त में जगह नहीं मिलती।



क्या किसी एक फर्म के हिसाब से बनी शर्त?

ठेकेदारों की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि अनुभव की समय सीमा जानबूझकर बहुत सीमित रखी गई। उनका दावा है कि इससे कई ऐसी फर्म बाहर हो सकती हैं, जिनके पास काम का अनुभव तो है, लेकिन वह तय अवधि का नहीं है। इसी आधार पर एक खास फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए शर्त तैयार करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, किसी खास फर्म को फायदा पहुंचाने का आरोप अभी साबित नहीं हुआ है। जांच के बाद ही साफ हो सकेगा कि शर्तें किस आधार पर बनाई गईं और क्या वे लागू नियमों के मुताबिक थीं।



जोधपुर नगर निगम के टेंडर इंचार्ज ने आरोप नकारे

जोधपुर नगर निगम के टेंडर इंचार्ज मनीष बैरवा ने टेंडर में गड़बड़झाले के आरोपों से इनकार किया है। बैरवा का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक की गई है। टेंडर जारी करते समय तय नियमों का पालन किया गया और किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई। ऐसे में अब एक तरफ टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाले ठेकेदारों के आरोप हैं तो दूसरी तरफ निगम के जिम्मेदार अधिकारी प्रक्रिया को सही बता रहे हैं। इसी वजह से जांच अहम हो गई है।



जोधपुर निगम कमिश्नर ने दिए जांच के आदेश

मामला जोधपुर नगर निगम के कमिश्नर राहुल जैन तक पहुंच चुका है। कमिश्नर ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है। राहुल जैन के मुताबिक मामला उनके ध्यान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में अगर टेंडर जारी करने की प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।



अब जांच में मुख्य रूप से दो सवाल अहम रहेंगे। पहला, टेंडर जमा करने के लिए इतनी कम समय सीमा क्यों दी गई? दूसरा, अनुभव के लिए केवल 2022 से 2024 के बीच की अवधि को ही क्यों चुना गया? जांच में इन दोनों बिंदुओं से जुड़े रिकॉर्ड और नियम देखे जाने की उम्मीद है।



21 लाख का है पूरा टेंडर

जोधपुर नगर निगम का यह टेंडर 21 लाख रुपए का है। इसके जरिए फॉगिंग और प्रचार-प्रसार के लिए वाहनों की व्यवस्था की जानी है। नगर निगम में फॉगिंग का काम सीधे तौर पर शहर की सफाई और मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम से जुड़ा है। वहीं प्रचार वाहनों का इस्तेमाल निगम की योजनाओं और अभियानों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए किया जाता है।



ऐसे में इस काम के टेंडर में ज्यादा फर्मों को बराबर मौका मिलना और पूरी प्रक्रिया का साफ होना जरूरी है। फिलहाल गड़बड़झाले के आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी।



जांच के बाद साफ होगी तस्वीर

जोधपुर नगर निगम में इस टेंडर को लेकर फिलहाल सवाल और जवाब दोनों सामने हैं। शिकायत करने वाले पक्ष का दावा है कि समय और अनुभव की शर्तों के जरिए मुकाबला सीमित किया गया। वहीं टेंडर इंचार्ज मनीष बैरवा इसे नियमों के मुताबिक बता रहे हैं।



कमिश्नर राहुल जैन ने जांच की बात कही है। ऐसे में अब नजर जांच रिपोर्ट पर रहेगी। अगर जांच में नियमों का उल्लंघन मिलता है तो कमिश्नर के मुताबिक संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जोधपुर नगर निगम के इस टेंडर में कथित गड़बड़झाले को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब जांच से ही मिलेगा।



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