जोधपुर निगम चुनाव: 44-44 पर अटकी BJP-कांग्रेस, जानें क्या कहते हैं ज्योतिषीय संयोग?

Saurabh Mishra | Sept 15, 2026, 12:23 IST
आंकड़ों में अटका बोर्ड
जोधपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस 44-44 सीटों पर बराबर हैं। 11 निर्दलीय पार्षद अब मेयर चुनाव में निर्णायक बन गए हैं। वार्ड 50 पर रिपोलिंग बाकी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • जोधपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा-कांग्रेस को मिली 44-44 सीटें।
  • जोधपुर में कांटे की टक्कर, निर्दलीय बने किंगमेकर।
  • जोधपुर नगर निगम चुनाव, 11 निर्दलीयों के हाथ सत्ता की चाबी।
  • जोधपुर में मेयर की रेस खुली, कौन मारेगा बाजी?।
  • जोधपुर नगर निगम: बराबरी की टक्कर में फंसा मेयर पद।

नरेश रमेश @ जोधपुर जोधपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने शहर की सियासत में नया रोमांच पैदा कर दिया। 100 वार्ड वाले नगर निगम में फिलहाल 99 सीटों के नतीजे सामने आए हैं। इनमेंभाजपा और कांग्रेस 44-44 सीटों पर बराबरी पर हैं, जबकि 11 निर्दलीय उम्मीदवारोंने जीत दर्ज की है। वार्ड नंबर 50 पर तकनीकी कारणों से दोबारा वोटिंग होनी है। ऐसे में अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं हुई है, लेकिन मौजूदा नतीजों ने मेयर की कुर्सी का मुकाबला बेहद रोचक बना दिया।



44-44 वार्ड जीतने की वजह से भाजपा और कांग्रेस में से कोई भी पार्टी अपने दम पर बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है। ऐसे में अब11 निर्दलीय पार्षद किंगमेकरकी भूमिका में आ गए। आने वाले दिनों में किस दल को इनका समर्थन मिलता है, इसी पर बोर्ड गठन और मेयर चुनाव का समीकरण काफी हद तक निर्भर करेगा।



इसी बीचअंक ज्योतिषी आचार्य देव नवल पंडितने जोधपुर के इस चुनावी समीकरण को अंक ज्योतिष के नजरिए से समझाया। उनके अनुसार 44-44-11 का यह आंकड़ा कई विशेष संकेत देता है। हालांकि, यह ज्योतिषीय व्याख्या है और इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चुनावी भविष्यवाणी नहीं माना जा सकता।



44-44 के आंकड़े में क्या है खास?

आचार्य देव नवल पंडित के मुताबिक, अंक ज्योतिष में4 अंक को राहु से जोड़ा जाता है। राहु को अचानक बदलाव, संघर्ष, असमंजस और अप्रत्याशित परिस्थितियों का कारक माना जाता है।



उनके मुताबिक भाजपा और कांग्रेस दोनों का 44-44 सीटों पर रुकना एक तरह के संतुलन और राजनीतिक खींचतान का संकेत माना जा सकता। दोनों दलों को लगभग बराबर राजनीतिक ताकत मिली है, लेकिन कोई भी पार्टी अकेले सत्ता बनाने की स्थिति में नहीं है।यही वजह है कि जोधपुर का चुनाव परिणाम किसी एक दल की स्पष्ट जीत के बजायकड़े मुकाबले और नए राजनीतिक समीकरणकी तस्वीर पेश कर रहा है।



11 निर्दलीयों की भूमिका सबसे अहम

जोधपुर के चुनावी गणित में सबसे अहम आंकड़ा 11 निर्दलीय पार्षदों का है। अंक ज्योतिष में11 को मास्टर नंबरमाना जाता। इसे अंतर्ज्ञान, प्रभाव और विशेष ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता।



आचार्य देव नवल के मुताबिक, 11 निर्दलीयों का यह आंकड़ा आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम में उनकी अहम भूमिका की ओर संकेत करता। वहीं राजनीतिक गणित के हिसाब से भी इन पार्षदों की स्थिति बेहद मजबूत हो गई।



भाजपा और कांग्रेस दोनों 44-44 सीटों पर हैं। ऐसे में निर्दलीयों का समर्थन जिस दल के पक्ष में जाएगा, उसके लिए बोर्ड गठन का रास्ता आसान हो सकता। यही कारण है कि अब दोनों प्रमुख दलों की नजर इन निर्दलीय पार्षदों पर टिकी है।



44+44+11 का योग भी दिलचस्प

आचार्य देव नवल पंडित के विश्लेषण में 44-44-11 का कुल योग भी खास माना गया है।44 + 44 + 11 = 99।यानी रिपोलिंग वाले वार्ड को छोड़कर घोषित 99 सीटों का आंकड़ा सामने आता है। अंक ज्योतिष की गणना के अनुसार 99 का योग 18 और फिर 1+8 करने पर9अंक आता है।



अंक ज्योतिष में 9 कोमंगल का अंकमाना जाता। मंगल को साहस, ऊर्जा, संघर्ष और त्वरित निर्णयों से जोड़ा जाता। आचार्य के अनुसार इस गणना को संकेत के तौर पर देखें तो जोधपुर में आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती और मेयर चुनाव को लेकर जोड़-तोड़ का दौर देखने को मिल सकता।



किसके सिर सजेगा मेयर का ताज?

44-44 की बराबरी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जोधपुर का अगला मेयर किस दल का होगा। मौजूदा नतीजों में भाजपा और कांग्रेस दोनों बहुमत से दूर हैं। ऐसे मेंएक-एक पार्षद का समर्थन भी पूरे समीकरण को बदल सकता है।



आचार्य देव नवल पंडित के अनुसार ग्रहों की स्थिति को अंक ज्योतिष के साथ जोड़कर देखने पर मुकाबला कूटनीति और रणनीति का बनता नजर आता। उनके मुताबिक बुध को कूटनीति और संवाद से जोड़ा जाता है, जबकि राहु अप्रत्याशित परिस्थितियों का संकेत माना जाता है।



ऐसे में जो दल निर्दलीय पार्षदों को अपने साथ जोड़ने और अपने खेमे को एकजुट रखने में सफल रहेगा, उसके लिए मेयर की कुर्सी तक पहुंचने की संभावना मजबूत हो सकती है।



जनता ने दिया मिला-जुला जनादेश

जोधपुर के नतीजों का एक बड़ा संदेश यह भी है कि जनता ने किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। भाजपा और कांग्रेस दोनों को बराबर सीटें मिलने से स्थानीय राजनीति मेंउम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय मुद्दोंकी भूमिका भी सामने आती है।



अब चुनावी मुकाबला मतदान और नतीजों से आगे बढ़कर बोर्ड गठन तक पहुंच गया है। वार्ड नंबर 50 की रिपोलिंग के बाद अंतिम तस्वीर सामने आएगी। इसके बाद मेयर चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।



फिलहाल जोधपुर नगर निगम की सियासत44-44-11 के त्रिकोणमें फंसी हुई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच बराबरी है, जबकि 11 निर्दलीयों के हाथ में सत्ता की चाबी नजर आ रही। ऐसे में अब देखना होगा कि कौन सा दल बेहतर रणनीति और कूटनीति के दम पर मेयर की कुर्सी अपने नाम करता है।



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